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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   black marketing of urea

किसानों पर भारी, खाद की कालाबाजारी

Sun, 16 Oct 2016 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़। Updated Sun, 16 Oct 2016 11:42 PM IST
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जिले की साधन सहकारी समितियों पर डीएपी और एनपीके (मिक्चर) खाद की कालाबाजारी की जा रही है। किसानों से निर्धारित दर से अधिक धनराशि वसूली जा रही है। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहे खेल पर अंकुश नहीं लगने से किसान खुले बाजार में खाद खरीदने के लिए मजबूर हैं।
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जिले की साधन सहकारी समितियों पर डीएपी की सप्लाई करने के लिए इफको अधिकृत है। प्राइवेट दुकानों पर समितियों से कम दर पर बिकने वाली खाद की बिक्री प्रभावित होने पर इफको ने डीएपी और एनपीके के दामों में कमी कर दी है। हालांकि बोरियों में पुरानी दर लिखी हुई है। इफको ने बीते माह डीएपी की बोरियों में 56 रुपये और एनपीके की पचास किग्रा की बोरियों में 50 रुपये की कमी कर दी। पूर्व में डीएपी की दाम 1106 रुपये और एनपीके का दाम 1039 रुपये निर्धारित था। मगर बीते माह डीएपी का दाम घटाकर 1050 और एनपीके का दाम घटाकर 989 रुपये निर्धारित कर दिया।
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हालांकि डीएपी की बोरियों में 1106 और एनपीके (मिक्चर) की बोरियों में 1039 रुपये छपा हुआ है। साधन सहकारी समितियों के सचिव इसी का नाजायज फायदा उठा रहे हैं। वह किसानों से पुराना दाम ही वसूल रहे हैं। जो किसान रसीद मांग रहे हैं, उन्हें खाद देने के लिए बहाना खोज रहे हैं। विभागीय अधिकारियों से इस बात की शिकायत की गई, मगर अभी तक कोई पहल नहीं हुई है। सचिवों के अधिक रुपये वसूलने से परेशान किसान खुले बाजार में खाद खरीदने को मजबूर है।
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वहीं जिले में रबी की सीजन में डीएपी और एनपीके की खपत अधिक होती है।

उद्यान विभाग के पास नहीं है आलू के बीज
हर साल शासन उद्यान विभाग के माध्यम से किसानों को आलू उपलब्ध कराता था। जिससे किसानों को उन्नतशील बीज प्राप्त होते थे, लेकिन इस बार उद्यान विभाग के पास आलू का बीज ही नहीं हैं। जबकि उद्यान विभाग ने सौ क्किंटल बीज के लिए योजना बनाई थी। आलू के बीज उपलब्ध न होने किसानों की परेशानी बढ़ गई है।

सितंबर माह के अंत तक किसान आलू की खेती करने के लिए खेत तैयार करने लगते हैं। अक्टूबर में  बुआई भी शुरू हो जाती है।  उद्यान विभाग किसानों को सस्ते दामों के साथ अच्छे किस्म के आलू के बीज भी  किसानों को मुहैया कराता चला आ रहा है। इस बार जिला उद्यान अधिकारी ने  बीते वर्ष की तरह इस वर्ष भी सौ क्किंटल आलू के बीज के लिए प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा है।  अक्टूबर माह में पखवारे भर का समय बीत गया मगर  उद्यान विभाग को अब तक आलू का बीज नहीं मिला।


जबकि खेत तैयार कर चुके किसान आलू के बीज के लिए परेशान है। वे उद्यान विभाग का चक्कर लगा रहे हैं। किसानों को आज और कल वितरण होने की बात कहकर लौटा दिया जा रहा है। अगर यहीं हाल रहा तो इस बार बेल्हा में आलू की खेती हो पाना मुश्क्किल है। आने वाले दिनों में आलू का दाम  आसमान छूने लगेगा। बीते वर्ष 100 क्किंटल आलू का बीज उद्यान विभाग को मिला था। काफी किसान आलू की खेती नहीं कर पाये थे। इसके चलते इस बार आलू का दाम घटने की जगह आसमान छू रहा था। बीस रुपये किलो तक आलू की बिक्री हुई हैं।

 
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