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450 मजरों को रोशन करने की योजना अधर में
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 23 Jun 2016 12:02 AM IST
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12वीं योजना में संतृप्त पाए मजरों के बचे धन से विद्युतीकरण की राह देख रहे जिले के करीब 450 नये मजरों को रोशन करने में धन का पेच फंस गया है। विद्युतीकरण करने वाली कंपनी ने धन की कमी बताकर फिलहाल इन मजरों में काम करने से हाथ खड़े कर दिये हैं। कंपनी का कहना है कि उसका प्रोजेक्ट बढ़ गया है। जिससे पूर्व से स्वीकृत बजट में नये साढ़े चार सौ मजरों का विद्युतीकरण होना संभव नहीं दिखाई दे रहा है। इसके लिये कंपनी के जिम्मेदारों ने धन की कमी बताकर पल्ला झाड़ लिया है। जबकि विभाग का कहना है कि 120 करोड़ की 12वीं योजना में पहले से संतृप्त मिले मजरों को बदले में ही नये 450 मजरों का विद्युतीकरण कंपनी को करना है।
जिले में जिन मजरों की आबादी तीन और पांच सौ है ऐसे 5013 मजरों का विद्युतीकरण किया जाना था। इसके लिए 12वीं योजना के तहत एक सौ बीस करोड़ की योजना पारित हुई। शुरुआत के दौरान विद्युतीकरण करा रही कंपनी आरकेईएस को करीब साढ़े चार सौ मजरे ऐसे मिले जो कि पहले की योजना से संतृप्त थे। इन मजरों के स्थान पर बाद में जनप्रतिनिधियों द्वारा सुझाए गए नए मजरों को शामिल कर उनका विद्युतीकरण कराए जाने पर विभाग और कंपनी के बीच सहमति बनी। आगामी दो जून को होने वाली जिला विद्युत कमेटी (डीईसी) की बैठक में जनप्रतिनिधियों की ओर से यह मुद्दा उठेगा। बिजली विभाग के विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इससे चिंतित बिजली अफसरों ने विद्युतीकरण की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए जब आरकेईएस कंपनी के अधिकारियों से बात की तो मामला ही उलटा पड़ गया।
पता चला है कि कंपनी ने यह कहकर नये 450 मजरों का विद्युतीकरण कराने से इनकार कर दिया है कि योजना के लिये एक सौ बीस करोड़ कम पड़ गये हैं। जो लक्ष्य मिला है उसको ही पूरा करने में धन कम पड़ रहा है। योजना भले ही एक सौ बीस करोड़ की थी, मगर खर्चा करीब पौने दो सौ करोड़ बैठ रहा है। कंपनी के जवाब से अधिकारी सन्न हो गए हैं। आगामी दो जुलाई को होने वाली र्डीईसी की बैठक में जब नेतागण मजरों का नाम सुझायेंगे तो अधिकारी क्या करेंगे। यह सोचकर उनकी नींद उड़ गई है। फिलहाल अधिकारी बराबर कंपनी के लोगों के टच में हैं। उनसे शीघ्र ही इस बारे मेें जवाब मांगा गया है। इस बारे में एक्सईएन ओपी मिश्रा का कहना है कि कंपनी से बात चल रही है। 450 मजरों का पैसा उसके पास है उसको विद्युतीकरण करना चाहिए। फिलहाल कंपनी के अधिकारियों से इस बारे में बातचीत का सिलसिला जारी है। बात बन जायेगी।
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जिले में जिन मजरों की आबादी तीन और पांच सौ है ऐसे 5013 मजरों का विद्युतीकरण किया जाना था। इसके लिए 12वीं योजना के तहत एक सौ बीस करोड़ की योजना पारित हुई। शुरुआत के दौरान विद्युतीकरण करा रही कंपनी आरकेईएस को करीब साढ़े चार सौ मजरे ऐसे मिले जो कि पहले की योजना से संतृप्त थे। इन मजरों के स्थान पर बाद में जनप्रतिनिधियों द्वारा सुझाए गए नए मजरों को शामिल कर उनका विद्युतीकरण कराए जाने पर विभाग और कंपनी के बीच सहमति बनी। आगामी दो जून को होने वाली जिला विद्युत कमेटी (डीईसी) की बैठक में जनप्रतिनिधियों की ओर से यह मुद्दा उठेगा। बिजली विभाग के विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इससे चिंतित बिजली अफसरों ने विद्युतीकरण की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए जब आरकेईएस कंपनी के अधिकारियों से बात की तो मामला ही उलटा पड़ गया।
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पता चला है कि कंपनी ने यह कहकर नये 450 मजरों का विद्युतीकरण कराने से इनकार कर दिया है कि योजना के लिये एक सौ बीस करोड़ कम पड़ गये हैं। जो लक्ष्य मिला है उसको ही पूरा करने में धन कम पड़ रहा है। योजना भले ही एक सौ बीस करोड़ की थी, मगर खर्चा करीब पौने दो सौ करोड़ बैठ रहा है। कंपनी के जवाब से अधिकारी सन्न हो गए हैं। आगामी दो जुलाई को होने वाली र्डीईसी की बैठक में जब नेतागण मजरों का नाम सुझायेंगे तो अधिकारी क्या करेंगे। यह सोचकर उनकी नींद उड़ गई है। फिलहाल अधिकारी बराबर कंपनी के लोगों के टच में हैं। उनसे शीघ्र ही इस बारे मेें जवाब मांगा गया है। इस बारे में एक्सईएन ओपी मिश्रा का कहना है कि कंपनी से बात चल रही है। 450 मजरों का पैसा उसके पास है उसको विद्युतीकरण करना चाहिए। फिलहाल कंपनी के अधिकारियों से इस बारे में बातचीत का सिलसिला जारी है। बात बन जायेगी।
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