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घंटों लेट रहीं ट्रेनें, बदले रूट से भेजी गईं मालगाड़ियां
Pratapgarh
Updated Sun, 15 Jun 2014 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। रायबरेली में पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण दूसरे दिन भी गाड़ियां अस्त-व्यस्त रहीं। लोगों को गाड़ियों के जाने पर ही संशय नजर आता रहा। उधर, मालगाड़ियों को बदले हुए मार्ग से लखनऊ की तरफ भेजा गया।
पुल पर संचालन शुरू होने के बाद भी स्टेशन पर ट्रेनों का संचालन रूटीन पर नहीं आ पाया है। शनिवार को कई ट्रेनें स्टेशन पर लेट पहुंची। इसमें सबसे ज्यादा पांच घंटे लेट भोपाल एक्सप्रेस रही। इसके बाद दो घंटे की देरी से स्टेशन आने वाली काशी विश्वनाथ ट्रेन रही। इसके अलावा पद्मावत, जनता एक्सप्रेस भी दो और तीन घंटे की देरी से स्टेशन पहुंची। ट्रेनों के लेट होने के कारण यात्रियों में संशय की स्थिति रही। काफी यात्रियों ने ट्रेन के आने में देर होने के कारण अपनी यात्राएं निरस्त कर दीं तो कुछ घंटों ट्रेन के इंतजार में स्टेशन पर बैठे रहे। यही नहीं परिजनों को रिसीव करने के लिए आने वाले यात्री भी ट्रेनों की लोकेशन लेते रहे। वे, यह पता करते रहे कि कहीं ट्रेनें फिर से रायबरेली या अन्य जगहों पर तो नहीं रुक गई हैं। उधर, मालगाड़ियों का संचालन स्टेशन से बदले हुए रूट से किया गया। लखनऊ की तरफ जाने वाली सभी ट्रेनों को सुल्तानपुर के रास्ते भेजा गया।
स्टेशन पर सुबह से ही ट्रेनों की लोकेशन पता करने के लिए लोगों की भीड़ जमा थी। ट्रेन ज्यादा और जगह कम होने के कारण बोर्ड पर सूचनाएं अस्पष्ट थीं। इसके चलते काफी लोग एसएम आफिस में भी पूछताछ करने पहुंच रहे थे। यही नहीं लेट होने वाली ट्रेनें अपने निर्धारित स्टेशन से बनकर लौटेंगी या नहीं इसकी भी जानकारी लोग करते रहे। स्टेशन पर ध्वनि विस्तारक यंत्र भी चलाया नहीं गया था। इसके अलावा पूछताछ काउंटर पर किसी के न होने के कारण लोग भ्रमित होते रहे।
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पुल पर संचालन शुरू होने के बाद भी स्टेशन पर ट्रेनों का संचालन रूटीन पर नहीं आ पाया है। शनिवार को कई ट्रेनें स्टेशन पर लेट पहुंची। इसमें सबसे ज्यादा पांच घंटे लेट भोपाल एक्सप्रेस रही। इसके बाद दो घंटे की देरी से स्टेशन आने वाली काशी विश्वनाथ ट्रेन रही। इसके अलावा पद्मावत, जनता एक्सप्रेस भी दो और तीन घंटे की देरी से स्टेशन पहुंची। ट्रेनों के लेट होने के कारण यात्रियों में संशय की स्थिति रही। काफी यात्रियों ने ट्रेन के आने में देर होने के कारण अपनी यात्राएं निरस्त कर दीं तो कुछ घंटों ट्रेन के इंतजार में स्टेशन पर बैठे रहे। यही नहीं परिजनों को रिसीव करने के लिए आने वाले यात्री भी ट्रेनों की लोकेशन लेते रहे। वे, यह पता करते रहे कि कहीं ट्रेनें फिर से रायबरेली या अन्य जगहों पर तो नहीं रुक गई हैं। उधर, मालगाड़ियों का संचालन स्टेशन से बदले हुए रूट से किया गया। लखनऊ की तरफ जाने वाली सभी ट्रेनों को सुल्तानपुर के रास्ते भेजा गया।
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स्टेशन पर सुबह से ही ट्रेनों की लोकेशन पता करने के लिए लोगों की भीड़ जमा थी। ट्रेन ज्यादा और जगह कम होने के कारण बोर्ड पर सूचनाएं अस्पष्ट थीं। इसके चलते काफी लोग एसएम आफिस में भी पूछताछ करने पहुंच रहे थे। यही नहीं लेट होने वाली ट्रेनें अपने निर्धारित स्टेशन से बनकर लौटेंगी या नहीं इसकी भी जानकारी लोग करते रहे। स्टेशन पर ध्वनि विस्तारक यंत्र भी चलाया नहीं गया था। इसके अलावा पूछताछ काउंटर पर किसी के न होने के कारण लोग भ्रमित होते रहे।
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