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देश पर जब आई आंच ‘राम-रहीम’ ने मिल कर दी जान
Pratapgarh
Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। सियासत के गंदे जल से भारत में जातीयता के कंटीले वृक्ष भले बढ़े हों, मगर देश की बात आई तो मजहबी सोच से ऊपर उठ जिले ने हमेशा लहू बहाया है। अब तक हुए युद्ध में ‘राम’ के साथ ‘रहीम’ के लाल भी तिरंगे के लिए जान देने में पीछे नहीं रहे। आज बढ़ते आतंकवाद व वोट के लिए हिन्दू मुश्किल को लेकर बेतुके बयान की तलवार से नेता एकता का सिर कतर रहे हैं। ऐसे में सैनिक कल्याण बोर्ड के शिलापट पर ही सही, शहीद उन जवानों के नाम हमें आज भी देश के लिए एकजुट होकर शहादत की सीख दे रहे हैं। तिरंगे को जब भी जरूरत पड़ी वे हिन्दू व मुस्लिम की भावना से हट कर खुद को भारत मां को समूत समझे और उसकी रक्षा में शहीद हुए।
इन बातों को मैं नहीं, इतिहास से लेकर जिले में जगह-जगह लगे शहीदों के शिलापट खुद कहते हैं। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में गार्डमैन सीताराम सिंह, सिपाही हरिविलास सिंह, भगवती प्रसाद सिंह, नायक राज बहादुर यादव, गनर राजपत सिंह, लांस नायक हरिनारायण सिंह के साथ ग्रेनेडियर लियाकत अली और अब्दुल हुसैन तिरंगे के लिए मुस्करा कर शहीद हो गए। इतना ही नहीं वर्ष 1965 में जब पाकिस्तान भारत से टकराया तो मो. इरफान देश की तरफ बढ़ रही पाक की गोलियों को सीने पर रोक कर शहीद हुए। इस लड़ाई में बीक्यूएमएस जगदीश प्रसाद तिवारी, हवलदार रामसुख तिवारी, ग्रेनेडियर राजपाल, सिपाही भीसम सिंह, अच्छे लाल, अर्जुन सिंह, राम बहादुर सिंह, एमएसआई एसएन पाठक, पाइनियर राम विलास, सिग्नलमैन सूर्यनारायण व एमआई द्वितीय बंसी लाल भी देश की खातिर शहीद होकर सदा के लिए अमर हो गए। वर्ष 1989 में आपरेशन पवन के दौरान सिपाही मो. शरीफ की शहीदी देश के लिए जातीयता की कुंठित सोच को तमाचा जड़ रही है। आपरेशन विजय ‘कारगिल’ के जंग में उतरे लांसनायक विजय कुमार शुक्ल और आपरेशन रक्षक में लांस नायक रामेंन्द्र प्रताप सिंह, नायक शशिकांत, मेजर मनोज कुमार पांडेय नायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह, चंद्रभूषण सिंह के साथ नायब सूबेदार शमसुल हक भी शहीद हो गए। आपरेशन पराक्रम में शहीद हवलदार मो. इसरार और नायब सूबेदार अतीकुर्रहमान का नाम भी शिलापट से ही सही हमें एकता और देश के लिए जातीयता से उठ कर सोचने और जान देने का पाठ पढ़ा रहा है। सच में, धन्य हैं वे माताएं जिन्होंने हिन्दू, मुस्लिम की जातिवादी सोच से हट कर तिरंगे और देश के लिए सपूतों को जन्म दिया। ऐसी माताओं और उन शहीदों को बारंबार सलाम करें तो भी शायद कम होगा। सब को एकता और देश के लिए मिटने की सीख दे रहे जिले के उन शहीदों को गणतंत्र दिवस पर नमन करना आज हर भारतीय का धर्म और कर्तव्य है। जय हिंद...जय भारत।
आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आने वाले बच्चों को गणतंत्र दिवस का मतलब बताया जाएगा। इसके लिए सभी कार्यकत्रियों को निर्देश दिए गए हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश मिश्र ने कहा कि 26 जनवरी को ऐसा करने वाली कार्यकत्रियों पर कार्रवाई होगी। केन्द्रों पर आने वाले बच्चों को 26 जनवरी के महत्व की जानकारी हो। वे इस बात को समझें कि गणतंत्र दिवस किस लिए मनाया जाता है। बच्चों को यह तालीम देने के लिए सभी परियोजनाओं को पत्र भेजा गया है।
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इन बातों को मैं नहीं, इतिहास से लेकर जिले में जगह-जगह लगे शहीदों के शिलापट खुद कहते हैं। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में गार्डमैन सीताराम सिंह, सिपाही हरिविलास सिंह, भगवती प्रसाद सिंह, नायक राज बहादुर यादव, गनर राजपत सिंह, लांस नायक हरिनारायण सिंह के साथ ग्रेनेडियर लियाकत अली और अब्दुल हुसैन तिरंगे के लिए मुस्करा कर शहीद हो गए। इतना ही नहीं वर्ष 1965 में जब पाकिस्तान भारत से टकराया तो मो. इरफान देश की तरफ बढ़ रही पाक की गोलियों को सीने पर रोक कर शहीद हुए। इस लड़ाई में बीक्यूएमएस जगदीश प्रसाद तिवारी, हवलदार रामसुख तिवारी, ग्रेनेडियर राजपाल, सिपाही भीसम सिंह, अच्छे लाल, अर्जुन सिंह, राम बहादुर सिंह, एमएसआई एसएन पाठक, पाइनियर राम विलास, सिग्नलमैन सूर्यनारायण व एमआई द्वितीय बंसी लाल भी देश की खातिर शहीद होकर सदा के लिए अमर हो गए। वर्ष 1989 में आपरेशन पवन के दौरान सिपाही मो. शरीफ की शहीदी देश के लिए जातीयता की कुंठित सोच को तमाचा जड़ रही है। आपरेशन विजय ‘कारगिल’ के जंग में उतरे लांसनायक विजय कुमार शुक्ल और आपरेशन रक्षक में लांस नायक रामेंन्द्र प्रताप सिंह, नायक शशिकांत, मेजर मनोज कुमार पांडेय नायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह, चंद्रभूषण सिंह के साथ नायब सूबेदार शमसुल हक भी शहीद हो गए। आपरेशन पराक्रम में शहीद हवलदार मो. इसरार और नायब सूबेदार अतीकुर्रहमान का नाम भी शिलापट से ही सही हमें एकता और देश के लिए जातीयता से उठ कर सोचने और जान देने का पाठ पढ़ा रहा है। सच में, धन्य हैं वे माताएं जिन्होंने हिन्दू, मुस्लिम की जातिवादी सोच से हट कर तिरंगे और देश के लिए सपूतों को जन्म दिया। ऐसी माताओं और उन शहीदों को बारंबार सलाम करें तो भी शायद कम होगा। सब को एकता और देश के लिए मिटने की सीख दे रहे जिले के उन शहीदों को गणतंत्र दिवस पर नमन करना आज हर भारतीय का धर्म और कर्तव्य है। जय हिंद...जय भारत।
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आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आने वाले बच्चों को गणतंत्र दिवस का मतलब बताया जाएगा। इसके लिए सभी कार्यकत्रियों को निर्देश दिए गए हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश मिश्र ने कहा कि 26 जनवरी को ऐसा करने वाली कार्यकत्रियों पर कार्रवाई होगी। केन्द्रों पर आने वाले बच्चों को 26 जनवरी के महत्व की जानकारी हो। वे इस बात को समझें कि गणतंत्र दिवस किस लिए मनाया जाता है। बच्चों को यह तालीम देने के लिए सभी परियोजनाओं को पत्र भेजा गया है।
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