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ईश्वर की याद ही सबसे बड़ी संपत्ति
Pratapgarh
Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
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प्रतापगढ़। विपत्ति को विपत्ति नहीं कहते, संपत्ति को संपत्ति नहीं कहते। ईश्वर को भूल जाना सबसे बड़ी विपत्ति है और उसे याद रखना ही सबसे बड़ी संपत्ति। वैभव का अभिमान करने वाला नष्ट हो जाता है। ये बातें गोपाल मंदिर में होने वाली भागवत कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए व्यास कृष्णकांत तिवारी ने कही।
उन्होंने कहा कि भगवान ऐसी पत्नी सबको दे जो ईश्वर से मिलने की प्रेरणा दे। सुदामा की पत्नी ने अगर उन्हें भगवान के पास जाने के बार-बार आग्रह न किया होता तो वह शायद ही भगवान से इतनी जल्दी मिल पाते। उनके मिलन की अवधि और समय भी बदल जाता। आचार्य गिरीश शुक्ल एवं संजय तिवारी ने वैदिक मंत्रों से पूर्णाहुति कराई। आयोजन समिति के मुख्य यजमान टेकचंद्र अग्रवाल, हरिशंकर खंडेलवाल, अनूप खंडेलवाल, अरुण अग्रवाल, राजेश सिंह, चंद्र नारायण शर्मा, राकेश कसौधन, रमाकांत तिवारी, नीरज दुबे, गौरव, विवेक पांडेय, रमेश तिवारी, देवी प्रसाद पांडेय शामिल रहे। कार्यक्रम में जवाहर लाल चौरसिया, हरिकेश सिंह चौहान, कामता प्रसाद पांडेय, आनंद मिश्र आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि भगवान ऐसी पत्नी सबको दे जो ईश्वर से मिलने की प्रेरणा दे। सुदामा की पत्नी ने अगर उन्हें भगवान के पास जाने के बार-बार आग्रह न किया होता तो वह शायद ही भगवान से इतनी जल्दी मिल पाते। उनके मिलन की अवधि और समय भी बदल जाता। आचार्य गिरीश शुक्ल एवं संजय तिवारी ने वैदिक मंत्रों से पूर्णाहुति कराई। आयोजन समिति के मुख्य यजमान टेकचंद्र अग्रवाल, हरिशंकर खंडेलवाल, अनूप खंडेलवाल, अरुण अग्रवाल, राजेश सिंह, चंद्र नारायण शर्मा, राकेश कसौधन, रमाकांत तिवारी, नीरज दुबे, गौरव, विवेक पांडेय, रमेश तिवारी, देवी प्रसाद पांडेय शामिल रहे। कार्यक्रम में जवाहर लाल चौरसिया, हरिकेश सिंह चौहान, कामता प्रसाद पांडेय, आनंद मिश्र आदि मौजूद रहे।
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