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फेसबुक पर झलकी पुलिस अधिकारियों की पीड़ा

Tue, 05 Mar 2013 07:47 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Tue, 05 Mar 2013 07:47 PM IST
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pps association shows anger on facebook on dsp murder in kunda

‘‘जब तक भ्रष्ट, सत्ता के गुलाम, जातिवादी और नपुंसक ईमानदार, बदतमीज अधिकारी शीर्ष पर रहेंगे, उनके हाथों में नेतृत्व रहेगा, उन्हें पुरस्कृत किया जाता रहेगा, तब तक स्थिति में कोई सुधार होने वाला नहीं है। हम अपनी विवशता के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं। एक तथ्य और, सत्य जो हमने आईपीएस और पीपीएस अधिकारियों की संयुक्त मीटिंग में विचार हेतु रखा था कि ‘कोई ऐसा आईपीएस अधिकारी नहीं जिसे उत्कृष्ट या सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित न किया गया हो? और जब प्रदेश पुलिस का नेतृत्व इन्हीं के हाथों में है तो फिर विभाग की दुर्गति कैसे हो रही है?’ यक्ष प्रश्न है।’’

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सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर यह टिप्पणी किसी और की नहीं, बल्कि पीपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष जुगुल किशोर तिवारी की है। कुंडा में शहीद जांबाज पुलिस उपाधीक्षक को श्रद्धांजलि...शीर्षक से यह टिप्पणी इलाहाबाद में एसोसिएशन की बैठक के बाद पोस्ट की गई।
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तिवारी कहते हैं कि यह टिप्पणी अकेले उनकी नहीं, बैठक में मौजूद सदस्यों की आमराय है। सदस्य अब चुप बैठने को तैयार नहीं हैं। अभी तक सारे संसाधनों और अधिकारों पर एक वर्ग का एकाधिकार है। अनुशासन के नाम पर कोई कुछ नहीं बोलता। मगर अब नियमों के दायरे में जिम्मेदारी के अनुरूप अधिकारों को लेकर बात होगी। हर जिले की बैठक में यह बात तय हो गई है।
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वे कहते हैं कि हम खुद का भी मूल्यांकन करेंगे। अपनी कमियां दूर करेंगे लेकिन अन्याय नहीं सहेंगे। एएसपी स्तर के अधिकारी से थानेदार की तैनाती तक में राय नहीं ली जाती, कोई मामला होता है तो जिम्मेदारी तय करने का रास्ता ढूंढा जाता है। सूबे के सीओ संसाधनों की कमी में जी रहे हैं। किसी भी जिले के एसपी और डिप्टी एसपी के आवास और कार्यालय का हाल देखा जा सकता है।

तिवारी ने कहा कि यह चिंतन का विषय है कि सूबे का शायद ही कोई आईपीएस हो, जिसे विशिष्ट सम्मान से न नवाजा गया हो। जब इतने उत्कृष्ट आचरण वाले हमारे सेनापति हैं तो फिर फोर्स की यह दुर्दशा क्यों है? एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से संवर्ग की समस्याओं को लेकर मिलने के लिए समय मांगा है। समय मिलते ही पूरी स्थिति उनके सामने रखी जाएगी।

ऐसे निकाला गुबार

पीपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष जुगुल किशोर तिवारी ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर एसोसिएशन की राय क्या पोस्ट की, इस पर प्रतिक्रियाओं की झड़ी लग गई। कुछ टिप्पणियां -

‘जब तक बेईमान अधिकारियों और भ्रष्ट नेताओं का गठजोड़ रहेगा, तब तक ईमानदारों का यही हश्र होगा।’

‘अत्यंत दुखद, पीपीएस एसोसिएशन के लिए गंभीर चुनौती।’

‘यूपी में आईएएस और आईपीएस लॉबी जनता के हित में काम करने के बजाय सरकार का एजेंट बनकर काम करती है, चाहे जिसकी सरकार हो।’ -  अविनाश दीक्षित

‘संगठन अब भी कुछ नहीं कर पाया तो संगठन को लानत है।’

‘यह एक सही वक्त है। जब हर पुलिस अधिकारी भ्रष्ट और कामकाजी तंत्र में अपनी मौजूदगी की अहमियत समझें। बजाय इसके कि उनकी जी हुजूरी।..भ्रष्ट तंत्र की आज्ञा पालन के बजाय अपना स्टेटस और संवैधानिक दायित्व समझे।’

- आलोक श्रीवास्तव

‘जब एक पुलिस अधिकारी के साथ ऐसा हो रहा है तो आम आदमी की तो...जाने दो..।’ - अतुल तिवारी

‘सर! ये पुलिस मेडल सभी अधिकारियों को मिलना यही प्रदर्शित करता है कि मानकों का जबर्दस्त दुरुपयोग होता है। और शायद इसी वजह से पुलिस का मनोबल गिरता है। ईमानदार अधिकारी आज हाशिए पर हैं। - मयंक अवस्थी

‘सर! हम किसी के जीवन के वैल्यू को समझें। पैसे से क्यों तौलकर देखते हैं? यह उचित नहीं है।’ - निशांत पाठक

'राष्ट्रपति पदक चापलूसों को मिलता है, वीरों को नहीं।' - सतीश द्विवेदी

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