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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Powder holder not showing footage of legislative action

विधानसभा की कार्रवाई की फुटेज में नहीं दिखा पाउडर रखने वाला, MLA दोहरे से आज होगी पूछताछ

Mon, 17 Jul 2017 01:06 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 17 Jul 2017 01:06 AM IST
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 Powder holder not showing footage of legislative action
विधानसभा
विधानसभा के मंडप में विस्फोटक पदार्थ रखने वाले की शिनाख्त अब तक नहीं हो सकी है। सुरक्षा एजेंसियों ने मंडप में लगे ट्रांसमिशन कैमरों की जो फुटेज
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खंगाली है उसमें पाउडर रखते हुए कोई नहीं दिखा है। सूत्रों का कहना है कि लगभग पांच घंटे की फुटेज तलाशी गई है। जांच के दौरान कुछ और विधायकों को चिन्हित किया
गया है जिनसे एटीएस की टीम पूछताछ करेगी। वहीं 11 जुलाई को उस सीट पर बैठने वाले एक अन्य विधायक अनिल दोहरे से सोमवार को पूछताछ की जाएगी। यह पूछताछ
राष्ट्रपति पद के लिए होने वाली वोटिंग के बाद की जाएगी।

किसी के नाम की नहीं है सीट
विधानसभा में जिस सीट पर कुशन के नीचे विस्फोटक पदार्थ मिला था वह सीट किसी विधायक के नाम नहीं थी। सीट पर बारी बारी से कई विधायक बैठे थे। दर असल
विधानभवन में केवल मुख्यमंत्री, संसदीय कार्यमंत्री, प्रमुख विभागों के मंत्री, नेता विरोधी दल और प्रमुख दलों के विधानमंडल दल के नेता के नाम की पट्टी लगी होती है।
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किसी भी विधायक का नाम सीट पर नहीं होता। जिस सीट नंबर से विस्फोटक बरामद हुआ था वहां एक दिन पहले सपा विधायक मनोज पांडेय और अनिल दोहरे बैठे थे।
मनोज पांडेय रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक हैं और अनिल दोहरे कन्नौज से विधायक हैं।

19 माननीयों ने तोड़ा नियम, सचिवालय प्रशासन ने दी रिपोर्ट

विधानसभा की सुरक्षा सख्त होने के बाद सचिवालय प्रशासन ने उन माननीयों की लिस्ट तैयार की है जिन्होंने शुक्रवार को सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया और नियम
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तोड़ कर विधानभवन के अंदर घुसे। इसमें कुल 19 माननीयों का नाम शामिल है। इनकी सूची प्रमुख सचिव विधानसभा को सौंपी गई है। नियम तोड़ने वालों में सबसे ऊपर
संसदीय कार्य व नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना का नाम है। सुरेश खन्ना के अलावा औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, गन्ना विकास के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

सुरेश राणा, भाजपा विधायक संगीत सोम, बसपा के पूर्व नेता और विधान परिषद के सदस्य नसीमुद्दीन सिद्दीकी, निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया का
नाम शामिल है।

प्रमुख सचिव से लेकर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव तक को जाना पड़ा वापस
इसके अलावा सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों को नियमों का हवाला दिया गया और नियम के अनुसार ही प्रवेश दिया गया। इसमें
प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दूबे बिना पास लगी गाड़ी से पहुंचे तो उनका पास देख कर पैदल जाने की इजाजत दी गई। एडीजी जोन लखनऊ पहुंचे तो उनकी गाड़ी
वापस कर दी गई, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव टीपी जोशी, कमिश्नर लखनऊ अनिल गर्ग, आईजी रेंज लखनऊ जय नारायण सिंह समेत कई अधिकारियों को बिना
अधिकृत पास प्रवेश देने से रोक दिया गया था।
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