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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   PM Narendra Modi lauds country's first interactive Chandra Shekhar Azad Gallery plan

Chandra Shekhar Azad : देश की पहली इंटरेक्टिव आजाद गैलरी की योजना को पीएम मोदी ने सराहा

Thu, 02 Sep 2021 05:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 02 Sep 2021 05:16 PM IST
सार

  • इलाहाबाद म्यूजियम में निर्माणाधीन आजाद गैलरी की रूपरेखा पर पीएमओ ने संस्कृति मंत्रालय से मांगी जानकारी
  • 1857 की मशीनगन, प्रथम विश्व युद्ध के समय की मशीन गन के अलावा क्रांतिकारियों के पत्र, वस्त्र और दस्तावेज होंगे प्रदर्शित
  • 10 करोड़ की लागत से इलाहाबाद म्यूजियम में पहली आजाद गैलरी का निर्माण कार्य चल रहा है।
  • 05 हजार स्कवायर फीट जमीन में बनेगी आजाद गैलरी
  • 2022 में इंटरेक्टिव आजाद गैलरी को देश को समर्पित करने की तैयारी

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PM Narendra Modi lauds country's first interactive Chandra Shekhar Azad Gallery plan
चंद्रशेखर आजाद। - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

इलाहाबाद संग्रहालय में 1857 से लेकर 1947 की हर क्रांति को प्रदर्शित करने वाली देश की पहली इंटरेक्टिव गैलरी में प्रथम विश्व युद्ध की शीनगन और तोप भी प्रदर्शित की जाएगी। इसके अलावा गदर मूवमेंट से लेकर आजाद हिंद फौज से जुड़े दुर्लभ दस्तावेजों के अलावा भारत माता की आजादी के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले क्रांतिकारियों की अमर निशानियां इस गैलरी की शोभा बढ़ाएंगी। पीएमओ ने इस गैलरी के बारे में संस्कृति मंत्रालय से जानकारी ली है। इसके साथ ही आजादी के अमृत महोत्सव के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गैलरी को अहम बताते हुए इसके भव्य निर्माण की इच्छा जताई है। इससे तीन साल से ठहरी इस गैलरी के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है।
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अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद को समर्पित यह गैलरी सशस्त्र क्रांति से जुड़े उस समय के दस्तावेजों,हथियारों,वस्त्रों के अनूठे संग्रह के रूप में एक डिजिटल अनुभव देगी। यह देश की पहली ऐसी गैलरी होगी, जिसमें स्वतंत्रता आंदोलन की हर क्रांति को लाइट और साउंड के माध्यम दिखाया जाएगा। इसमें हर क्रांतिकारी की कहानियां भी आडियो, वीडियो के जरिए बयां होंगी। इस गैलरी में 1857 की तोप और प्रथम विश्व युद्ध की मशीन गन आकर्षण का केंद्र बनेगी। इसके अलावा अंग्रेजों के दांत खट्टे करने में इस्तेमाल किए गए कई छोटे-बड़े हथियार प्रदर्शित किए जाएंगे।

इस गैलरी में चंद्रशेखर आजाद की वह कोल्ट पिस्टल भी रखी जाएगी, जिससे उन्होंने अल्फ्रेड पार्क में ब्रिटिश फौज का पसीना छुड़ाया था। लेकिन, बाद में गोली लगने और घिरने के बाद इसी पिस्टल से अपनी कनपटी में गोली मारकर शहीद हो गए थे। यह पिस्टल आज भी संग्रहालय के सेंट्रल हाल में रखी हुई है। इसके अलावा कारोरी कांड के दस्तावेज और उसमें शामिल क्रांतिकारियों की जेल से लिखी चिट्ठियां भी शामिल हैं। काकोरी कांड में शामिल रहे विष्णु शरण दुबलिश का वह ऐतिहासिक पत्र भी लोग इस गैलरी में देख सकेंगे, जिसे दुबलिश ने एक नवंबर 1937 को अंडमान जेल से छूटने के बाद लिखा था।

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इसके अलावा महाराष्ट्र के केसरी मराठा ट्रस्ट और वीर सावरकर ट्रस्ट के पदाधिकारियों से भी संग्रहालय के अफसरों ने संपर्क किया है, ताकि सशस्त्र क्रांति के वाहकों में से एक राजगुरु और वीर सावरकर से संबंधित दस्तावेजों को आजाद गैलरी में रखने के लिए लाया जा सके। संग्रहालय के निदेशक डॉ सुनील गुप्त बताते हैं कि पुणे से शहीद राजगुरु के कुछ पत्रों को लाने के लिए संपर्क किया गया है। इस गैलरी में आजादी की झलक प्रस्तुत करने वाली तस्वीरें और वस्तुएं प्रदर्शित की जाएंगी। इसमें जलियावाला बाग सामूकिक नरसंहार, गदर मूवमेंट, आजाद पार्क की घटना समेत अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की गाथा को भी प्रदर्शित किया जाएगा। 

संग्रहालय के लिए सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री ने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत इस गैलरी के निर्माण को बेहद अहम माना है। संस्कृति मंत्रालय की ओर से आजाद गैलरी के बारे में पीएमओ को अवगत कराया गया है। इसके लिए संग्रहालय की ओर से मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी गई थी। अब इस इंटरेक्टिव गैलरी की डिजाइन के लिए काम तेज कर दिया गया है। -डॉ सुनील गुप्ता, निदेशक-संग्रहालय।

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हाईकमिश्नर के हस्तक्षेप पर इंग्लैंड से भारत लाई जा सकी आजाद की कोल्ट पिस्तौल
27 फरवरी, 1931 को अल्फ्रेड पार्क में ब्रिटिश पुलिस से मुठभेड़ में अपनी जिस पिस्तौल से कनपटी पर गोली मार कर चंद्रशेखर आजाद शहीद हुए थे, उसकी इंग्लैंड से वापसी की कहानी बेहद दिलचस्प है। दरअसल जिस एसएसपी नाट बाबर ने पार्क में आजाद की घेराबंदी की थी, उसकी सेवानिवृत्ति के बाद ब्रिटिश सरकार ने उनकी पिस्तौल उसे उपहार में दे दी थी। इसे बाद में लगातार पत्राचार के बाद इंग्लैंड से वापस लाया जा सका। अब आजाद की वो कोल्ट इलाहाबाद संग्रहालय में मौजूद है। 

अंग्रेज एसएसपी नाट बावर सेवानिवृत्ति के वक्त उपहार में मिली आजाद की कोल्ट को लेकर इंग्लैंड चले गए थे। उनका दावा था कि अल्फ्रेड पार्क में आजाद को सबसे पहले उन्हीं की गोली लगी थी। बावर उन दिनों उत्तर प्रदेश शासन के पेंशनर हुआ करते थे और शायद इसी अधिकार से बाद में आजाद की कोल्ट वापस लाने की मांग उठने पर इलाहाबाद के तत्कालीन कमिश्नर मुस्तफी ने बावर को उसे लौटाने के लिए पत्र लिखा। कमिश्नर मुस्तफी के पत्र का बावर ने कोई जवाब नहीं दिया था।

बाद में उन्हें कोल्ट लौटाने के लिए इंग्लैंड स्थित भारतीय हाई कमिश्नर की मदद ली गई और अंतत: वे इस शर्त पर इसके लिए राजी हो गए कि भारत की ओर से उनसे इसका लिखित अनुरोध किया जाए।  साथ ही यह भी कहा कि अनुरोध पत्र के साथ इलाहाबाद में आजाद के शहादत स्थल पर लगी मूर्ति का चित्र भी भेजा जाए।

उनकी शर्त स्वीकार करनेके बाद 1972 में यह ऐतिहासिक कोल्ट पिस्तौल देश की राजधानी दिल्ली लौटी और 27 फरवरीए 1973 को लखनऊ में क्रांतिकारी शचींद्र नाथ बख्शी की अध्यक्षता में हुए समारोह के बाद लखनऊ के संग्रहालय में रखवा दी गई। इसके कुछ साल बाद इलाहाबाद का नया संग्रहालय बनकर तैयार हुआ तो इसको वहां के एक विशेष कक्ष में स्थानांतरित कर दिया गया। अब प्रयागराज के सरकारी मालखाने में इस कोल्ट की बरामदगी का विवरण इस प्रकार दर्ज है- कोल्ट पिस्तौल, पीटीएफ, मैन्युफैक्चरिंग कंपनी हार्टफोर्ड सिटी (अमेरिका) पेटेंटेड, अप्रैल 20,18977- दिसंबर 22, 1903 कोल्ट आटोमेटिक कैलिबर, 32, रिमलेस ऐंड स्मोकलेस।
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