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थाने आने से जनता डरती है, माफिया नहीं: डीजीपी

Tue, 11 Jun 2013 12:51 AM IST
फैजाबाद/ब्यूरो
फैजाबाद/ब्यूरो Updated Tue, 11 Jun 2013 12:51 AM IST
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People are afraid to come to the police station: DGP

उत्तरप्रदेश के पुलिस विभाग के मुखिया ने ही महकमे के कामकाज और पुलिस बल के काम करने के तरीकों पर बड़ा सवालिया निशान लगाया है।

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मंडलीय समीक्षा बैठक के लिए सोमवार को फैजाबाद आए पुलिस महानिदेशक देवराज नागर ने शहर कोतवाली का मुआयना करने के दौरान कहा कि पूरे प्रदेश में आलम यह है कि थाने आने से जनता को डर लगता है पर माफिया बेहिचक अपनी आमद दर्ज कराते हैं।

डीजीपी ने कहा कि महकमे के कर्मियों में समन्वय की बेहद कमी है और इसे दूर करने के लिए पूरे पुलिस बल को टीम भावना से काम करना चाहिए।

कोतवाली निरीक्षण के दौरान डीजीपी ने पुलिस कर्मियों को क्षेत्र में लोगों को अपना मोबाइल नंबर वितरित करने तथा लोगों से सतत संपर्क बनाए रखने की नसीहत दी। कहा कि अभिसूचना संकलन के लिए थाने स्तर पर काम कराया जा रहा है।
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तमाम प्रकार के प्रोफार्मा पर भरी जानकारियों के माध्यम से अधिकारियों के काम का पर्यवेक्षण तथा उनकी सफलता-असफलता का मूल्यांकन किया जाता है। व्यावसायिक दक्षता पर जोर देते हुए कहा कि विभाग में यह काम दारोगा व आरक्षी पर निर्भर है।
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आम आदमी का वास्ता अक्सर इन्हीं से पड़ता है। निरीक्षण के पूर्व कानून में संशोधन तथा महिलाओं के प्रति हिंसा को लेकर बने नए कानून के साथ आईपीसी की धारा 166 (ए) के तहत रिपोर्ट न लिखने वाले कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई किए जाने के प्राविधान की जानकारी दी गई।

आरोप है कि एक नेता की सिफारिश पर दोनों को छोड़ा गया। हालांकि सीओ सिटी वैभव कृष्ण ने किसी को भी सिफारिश पर छोड़ने की बात से इंकार किया है।

लिखा-पढ़ी से दूर किया दरोगा

खुर्जा गेट पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी प्रकरण के खुलासे के बाद शक के घेरे में हैं। पुलिस ने भी उनकी जांच करने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करने का दावा किया है।

उक्त चौकी के एक दरोगा पर सवाल उठने के बावजूद रविवार को वह मामले की लिखा-पढ़ी में व्यस्त था, लेकिन जब इसकी चर्चा शुरू हुई तो उसे लिखा-पढ़ी से अलग कर दिया गया। मामले के वादी आईपीएस वैभव कृष्ण बनाए गए हैं।


लड़कियों को केवल 30 प्रतिशत
पुलिस ने बताया कि ग्राहकों से वसूले जाने वाली राशि का 30 फीसदी ही लड़कियों को मिलता था और शेष रकम दलाल अपने पास रखते थे। दलाल इसकी एवज में लड़कियों और ग्राहकों को पुलिस सुरक्षा का भरोसा देते थे।

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