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रास्ता प्यार का, करतूत हैवानियत भरी

Mon, 11 Feb 2013 03:35 PM IST
बागपत/इंटरनेट डेस्क
बागपत/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 11 Feb 2013 03:35 PM IST
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obscene mms blackmailing

कुछ साल पहले तक किसी ने सोचा भी नहीं था कि एमएमएस यानी मल्टी मीडिया मैसेजिंग को अपराध से जोड़कर देखा जाएगा। लेकिन आज स्कूलों, कॉलेजों से लेकर सूदूर ग्रामीण इलाकों तक में एमएमएस का आतंक छाया हुआ है। लड़कियां अक्सर इसके जाल में फंस रही हैं। दोस्ती, प्यार और रिश्ते को आधार बनाकर धोखे से बनाए जा रहे ये एमएमएस कहीं-कहीं ब्लैकमेल करने का साधन भी बन जाते है।

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यह मामला भी कुछ इसी तरह का है। यूपी के बागपत में प्रेम-प्रपंच के छल में एक और युवती फांसकर एक फरेबी युवक ने उसकी अश्लील क्लिपिंग बना ली और ब्लैकमेल करने लगा। इतना ही नहीं, गांव में क्लिपिंग बांट भी दी। इस से भी हैरतभरी बात यह है कि पुलिस ने इस शर्मनाक करतूत पर कार्रवाई करने के बजाय समझौता कराकर पल्ला झाड़ लिया।
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बिनौली क्षेत्र की लड़की से बड़ौत के युवक ने दोस्ती की। फिर प्यार का नाटक कर विश्वास में लिया। एक महीने पहले धोखे से मोबाइल से उसकी अश्लील क्लीपिंग बना ली। उसे दिखाकर बोला कि 25 हजार लाकर दे, वरना यह क्लीपिंग  गांव में बांट देगा।बेचारी ने अपनी मौसी से यह रकम लाकर उसे दी।
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इसके बाद वह फिर से इतनी ही रकम की मांग करने लगा। इस बार उससे इंतजाम नहीं हुआ। उसने उसके आगे हाथ जोड़े, लेकिन उसे तरस नहीं आया। पुलिस को मिली शिकायत के मुताबिक उसने क्लीपिंग गांव में बांट दी। लड़की के पिता ने बिनौली थाना में इसकी शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को पूछताछ के लिए थाना बुलाया।

जिन युवकों को क्लीपिंग बांटी गई, उनमें से भी दो को बुलाया गया। लेकिन कार्रवाई करने के बजाय लड़का-लड़की के बीच समझौता करा दिया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि लड़की को 25 हजार वापस दिला दिए गए। थाना प्रभारी ने बताया कि दोनों में समझौता हो गया है। लड़की कार्रवाई नहीं चाहती थी।

ऐसे तो बढ़ेगा दुस्साहस?
जिसकी बेटी को अश्लील क्लीपिंग बनाकर ब्लैकमेल किया गया, वह रिपोर्ट दर्ज कराने से डर गया। जिस पुलिस की जिम्मेदारी, ऐसे दरिंदों को जेल तक पहुंचाने की थी, उसने तहरीर न मिलने का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लिया। तो फिर दरिंदगी खत्म कैसे होगी?

ऐसे तो वहशी सोच रखने वालों का दुस्साहस और बढ़ेगा। कानून में यह कहां लिखा है कि अगर ब्लैकमेलर ब्लैकमेलिंग से मिली रकम वापस कर दे, तो माफ कर दिया जाए। यदि ऐसा होने लगा तो चोर-डकैत लूटा माल वापस करेंगे कहेंगे, हमें छोड़ दो।


जब ब्लैकमेलिंग के साक्ष्य मिल गए तो पुलिस ने मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया। अगर पुलिस अपना रवैया अगर सुधार नहीं सकती तो प्रदेश के डीजीपी क्यों बार बार फरमान सुनाते हैं कि महिला उत्पीड़न के मामले संज्ञान में आते ही तुरंत दर्ज किए जाएंगे?

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