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मोबाइल टावर लगाने की नई नीति जल्द

Tue, 19 Nov 2013 01:35 AM IST
अमर उजाला, नोएडा
अमर उजाला, नोएडा Updated Tue, 19 Nov 2013 01:35 AM IST
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the new policy for mobile towers soon

नोएडा में मोबाइल टावर लगाने की नई नीति को आगामी बोर्ड बैठक में मंजूरी मिल जाएगी। बैठक के एजेंडों में इसे भी शामिल कर लिया गया है।

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इसके अलावा बकाया लीज रेंट वालों के लिए भी समाधान योजना लाने की तैयारी है। अभी नोएडा में मोबाइल टावर लगाने को लेकर कोई नीति नहीं है।

लोग किराए के लालच में घरों की छत पर लगवा लेते हैं, जिससे पड़ोसियों को ज्यादा दिक्कत होती है। आवासीय सेक्टरों की ऐसी दर्जनों शिकायतें प्राधिकरण में दर्ज हैं।

शिकायतों में लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने और प्रदूषण फैलने की बात कही है। इसे ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण पॉलिसी बनाने जा रहा है।

मंजूरी मिलने पर घरों की छत पर लगे टावर हटाने पड़ सकते हैं। यह पार्क, बारातघर, ग्रीन बेल्ट आदि जगहों पर लगाए जाएंगे। उसके लिए प्राधिकरण ही जगह चिह्ति करके देगा।
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नोएडा के आवासीय क्षेत्रों (गांव व सेक्टर दोनों शामिल हैं) में 350 और पूरे शहर में करीब छह सौ मोबाइल टावर लगे हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पहले ही नीति बना चुका है। अब नोएडा की बारी है।
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दूसरी ओर जिन लोगों का लीज रेंट पिछले पांच साल से बकाया है। उनको जमा कराने के लिए प्राधिकरण समाधान योजना लागू करने पर विचार कर रहा है।

यह मुद्दा भी प्राधिकरण की बोर्ड बैठक के समक्ष रखा जाएगा। इसके तहत बीते पांच साल के अलावा आने वाले पांच साल तक का लीज रेंट एकमुश्त भर सकेंगे।

उस पर ब्याज नहीं देना पड़ेगा। नोएडा में प्रॉपर्टी फ्री होल्ड नहीं है, बल्कि 90 साल की लीज पर दी जाती है। जिस कारण प्राधिकरण आवंटियों से लीज रेंट लेता है। यह आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और संस्थागत का अलग-अलग हैं।

किसानों की आवासीय योजना जल्द
प्राधिकरण की बोर्ड बैठक के बाद फिर से किसानों के लिए आरक्षित योजना को लांच किया जा सकता है। करीब एक साल पहले जब यह योजना लांच की गई थी, उस समय उन किसानों का नाम सूची से हटा दिया गया था, जिन्होंने प्राधिकरण की अधिग्रहित जमीन पर अतिक्रमण कर रखा था।


इसका किसानों ने विरोध कर दिया, जिसके चलते योजना ही रद्द करनी पड़ी। अतिक्रमण में नाम होने के बावजूद किसानों का नाम योजना की पात्रता सूची से न हटाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे प्राधिकरण की बोर्ड बैठक के समक्ष रखा जाएगा। अगर मंजूरी मिल गई तो करीब एक हजार भूखंडों वाली इस योजना को शीघ्र ही लांच कर दिया जाएगा।

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