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'मंत्री जी से जुगाड़ लगवाइए, मलाइदार पद पाइए'

Wed, 01 May 2013 03:25 PM IST
कानपुर/संजय त्रिपाठी
कानपुर/संजय त्रिपाठी Updated Wed, 01 May 2013 03:25 PM IST
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No action against the Commerce officers

मलाईदार पदों पर तैनाती के लिए मंत्री-नेताओं से जुगाड़ लगवाने वाले वाणिज्य कर अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।

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पिछले साल कमिश्नर ने ऐसे पौने चार सौ अफसरों पर आचरण नियमावली के तहत कार्रवाई की संस्तुति शासन से की थी।

शासन ने तर्क दिया है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए अगर कोई नेता-मंत्री पत्र लिखता है तो वह ‘सिफारिश’ की श्रेणी में नहीं आता। इस जवाब से जुगाड़ी अफसर खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं।

सत्ता परिवर्तन के बाद वाणिज्य कर विभाग में प्रदेश भर में कुल 2700 अधिकारी तैनात हैं। पिछली सरकार में तबादला सत्र लगातार शून्य होने से तबादले काफी समय से लंबित थे।
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नई सरकार का गठन होने के ठीक बाद निकाय चुनाव की वजह से तबादले नहीं हो सके।

इधर अगस्त में प्रदेश भर के लगभग 1200 अधिकारी ट्रांसफर कर दिए गए। इनमें से तमाम तो नई तैनाती पर चले गए मगर बड़ी संख्या में अफसरों ने जुगाड़ के लिए अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल किया।
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मंत्रियों-विधायकों और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के पैड पर उन्होंने अपनी मनचाही तैनाती के लिए सिफारिशी पत्र लिखवाए। इसके अलावा तमाम ने फोन पर सिफारिश करवाई।

भारी संख्या में सिफारिशी पत्र देख वाणिज्य कर कमिश्नर की त्यौरियां चढ़ गई।

उन्होंने सिफारिश लगवाने वाले 373 अफसरों की सूची बनवा ली और सरकारी अधिकारी-कर्मचारी आचरण नियमावली (नियम 27) के उल्लंघन का दोषी मानते हुए इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा।

इस सूची में कानपुर के 59 अफसरों के नाम थे। विभाग के एक अधिकारिक सूत्र के मुताबिक शासन ने इन अफसरों पर कार्रवाई से इंकार कर दिया है।

शासन ने कमिश्नर को भेजे पत्र में कहा है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए मंत्री-विधायक की पैरवी को सिफारिश नहीं माना जा सकता है।

इसलिए कार्रवाई संभव नहीं। इस बारे में वाणिज्य कर कमिश्नर हिमांश कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि अफसरों की सूची शासन को भेजी गई थी।


नहीं कसा विजिलेंस का शिकंजा
कानपुर। इस कार्रवाई के ठीक पहले वाणिज्य कर कमिश्नर ने 46 ऐसे अफसरों की सूची शासन को भेजी थी, जिनके विरुद्ध भ्रष्टाचार की तमाम शिकायतें थी।

इन अधिकारियों द्वारा काली कमाई से तमाम संपत्तियां बनाने की भी जानकारी ऊपर दी गई थी। कमिश्नर ने इन सभी की जांच विजिलेंस से करने की संस्तुति की थी, मगर इस मामले में भी आज तक कुछ नहीं हुआ।

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