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जेल में ही बेचे जा रहे थे मोबाइल फोन
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 14 Mar 2016 12:52 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुजफ्फरनगर। जिला कारागार में रविवार को अधिकारियों के छापे के दौरान सभी मोबाइल एक ही कंपनी के पाए गए हैं और खास बात यह है कि सभी फोन एक ही मॉडल के हैं। आईपीएस एसपी सिटी संतोष मिश्रा को इसकी गहनता से जांच के लिए लगाया गया है। मिश्रा ने बताया कि सभी फोनों के आईएमईआई नंबरों नोट कर लिए गए हैं। यह पता लगा जा रहा है कि इन्हें कहां से और किस डीलर से खरीदा गया है। एक ही तरह के फोन होने से यह भी आशंका जताई जा रही है कि यह फोन जेल का ही कोई कर्मचारी उपलब्ध करा रहा था।
मुजफ्फरनगर ही नहीं आसपास के जिलों में भी मुजफ्फरनगर जेल से रंगदारी की कॉल्स जा रही थीं। मेरठ में एक डॉक्टर से रंगदारी नहीं देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई थी। मंसूरपुर में रंगदारी नहीं देने पर सर्राफ के बेटे पर गोलियां बरसाई गईं। अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया।
अफसर जागे और रविवार को योजनाबद्ध तरीके से जेल पर छापा मारा गया। चार घंटे चली कार्रवाई में बंदियों से 22 मोबाइल, बड़ी संख्या में लाइटर, लोहे की रोड, खुखरी के अलावा आधा किलो चरस मिली तो अफसर भी चौंक गए। यह बात पुष्ट हो गई है कि जेल में जेल अफसरों की मिलीभगत के बिना यह सामान अंदर जाना मुमकिन नहीं है।
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आईजी सुजीत पांडेय के निर्देश पर डीएम निखिल चंद्र और एसएसपी केबी सिंह ने यह कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दी। टीम में मौजूद अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं दी गई थी। इससे पहले के छापों की सूचना अफसरों के पहुंचने से पहले ही जेल में पहुंच जाती थी, तब तक सबकुछ ओके कर दिया जाता था। डीएम और एसएसपी ने जब जेल अफसरों से बरामद सामान पर सवाल किए तो वह निरुत्तर थे। इस बारे में कुछ नहीं बोल पाए। जेल में बंद कुछ दबंग बंदियों का पूरा राज चलता है।
जेल का स्टाफ उन्हें कुछ पैसे तो कुछ रौब के चलते कोई बंदिश नहीं लगा पाता। छापे में बड़ी तादाद में चलते मिले मोबाइलों से साफ हो गया है कि रंगदारी के लिए जेल से ही व्यापारियों और अन्य लोगों को फोन किए जाते थे। छापेमार कार्रवाई के बाद जेल अफसरों पर बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही हैं। डीएम ने स्पष्ट किया कि इस बारे में शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है, किसी भी दोषी अधिकारी और कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
पैसा फेंको और बन जाओ वीआईपी
जेल में पैसे के बदले सारी सुख-सुविधाएं मिलती हैं, यह अफसरों के छापे से साबित हो चुका है। एक दो नहीं पूरे 22 मोबाइल फोन पकड़े गए हैं। इनके अलावा दर्जभर सिमकार्ड अलग मिले हैं। रॉड, खुखरी और कट्टन, यानी जेल में किसी को भी मौत के घाट उतारने का पूरा इंतजाम। आधा किलो चरस मिलने से साफ है कि बंदियों के नशे का शौक भी पूरा होता था। यह सब साजो सामान जेल में कैसे पहुंचा, कोई बताने को तैयार नहीं है। इस कार्रवाई के बाद जेल अफसरों को मानो सांप सूंघ गया है।
नाली और कपड़ों में मिले मोबाइल
मुजफ्फरनगर। कारागार में बंदियों की तलाशी के दौरान फोन नहीं मिलने पर अधिकारियों का माथा ठनका। तलाशी चलती रही तो कुछ देर बाद नाली में एक फोन मिला तो उसके बाद लाइन ही लग गई। बंदियों ने धुलाई के बाद जा कपड़े सुखाने के लिए डाले थे उनकी जेबों, नालियों और बाथरूम की छतों पर छुपाए गए फोन बरामद हुए।
मुजफ्फरनगर जेल में मारे गए छापे में बड़ी बरामदगी हुई है। हम लोगों को मुजफ्फरनगर और मेरठ जेल से रंगदारी मांगे जाने की लगातार सूचनाएं मिल रही थी। मुजफ्फरनगर जेल प्रशासन के बारे में शासन को अवगत करा दिया गया है। शासन के निर्देश पर ही अगली कार्रवाई होगी। अब जोन की अन्य जेलों पर इसी तरह की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जिन अपराधियों से चरस, मोबाइल या धारदार हथियार बरामद हुए हैं, उन पर मुकदमे दर्ज कराएं जाएंगे।
-सुजीत पांडेय, आईजी मेरठ जोन
धड़ल्ले से चल रहा था रंगदारी का खेल
मुजफ्फरनगर। जिला कारागर में पकड़े गए मोबाइल फोन ही मंसूरपुर के जीएम और सर्राफ के लड़के पर हुए कातिलाना हमले के जिम्मेदार हैं।
19 जनवरी को मंसूरपुर स्थित डिस्टलरी के मैनेजर को जेल से आए फोन पर लाखों की रंगदारी नहीं देने पर बदमाशों ने घेरकर मारने का प्रयास किया था। 28 फरवरी को मेरठ के एक चिकित्सक से भी कारागार से ही एक करोड़ की फिरौती मांगी गई थी। पिछले दिनों मंसूरपुर के सर्राफ के पुत्र को भी फिरौती नहीं देने पर बदमाश उसकी दुकान पर ही गोली मारकर भाग गए। शामली के भी खाद और दवा व्यापारी से जिला कारागार से फिरौती मांगने की बातें सामने आई थी। इतनी घटनाएं होने के बाद भी जेल प्रशासन हमेशा अपने यहां फिरौती मांगे जाने की बात को नकारता रहा।
छले सात माह के भीतर 42 बड़े बदमाशों को दूसरी जेलों में शिफ्ट करने के बाद भी जेल से रंगदारी मांगे जाने की घटनाओं पर अकुंश नहीं लग पा रहा था। रविवार के छापे के बाद यह साफ हो गया है कि रंगदारी जेल के अंदर से ही मांगी जा रही थी।
कारागार में चल रही है फेसबुक
मुजफ्फरनगर। जिला कारागार में बंदी किस हद तक मौजमस्ती कर रहे थे, इसका अंदाजा एक फेसबुक एकाउंट से लगाया जा सकता है। किसी ने अपनी फेसबुक वॉल पर जेल के अंदर बैरकों में बंदियों की फोटो अपलोड कर दी। कुछ दिनों बाद मामला चर्चाओं में आया तो आनन-फानन में इसकी जांच की गई। बाद में यह फोटो फेसबुक से गायब हो गईं। संबंधित खबर पेज- 3 पर भी पढ़ें।
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मुजफ्फरनगर ही नहीं आसपास के जिलों में भी मुजफ्फरनगर जेल से रंगदारी की कॉल्स जा रही थीं। मेरठ में एक डॉक्टर से रंगदारी नहीं देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई थी। मंसूरपुर में रंगदारी नहीं देने पर सर्राफ के बेटे पर गोलियां बरसाई गईं। अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया।
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अफसर जागे और रविवार को योजनाबद्ध तरीके से जेल पर छापा मारा गया। चार घंटे चली कार्रवाई में बंदियों से 22 मोबाइल, बड़ी संख्या में लाइटर, लोहे की रोड, खुखरी के अलावा आधा किलो चरस मिली तो अफसर भी चौंक गए। यह बात पुष्ट हो गई है कि जेल में जेल अफसरों की मिलीभगत के बिना यह सामान अंदर जाना मुमकिन नहीं है।
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आईजी सुजीत पांडेय के निर्देश पर डीएम निखिल चंद्र और एसएसपी केबी सिंह ने यह कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दी। टीम में मौजूद अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं दी गई थी। इससे पहले के छापों की सूचना अफसरों के पहुंचने से पहले ही जेल में पहुंच जाती थी, तब तक सबकुछ ओके कर दिया जाता था। डीएम और एसएसपी ने जब जेल अफसरों से बरामद सामान पर सवाल किए तो वह निरुत्तर थे। इस बारे में कुछ नहीं बोल पाए। जेल में बंद कुछ दबंग बंदियों का पूरा राज चलता है।
जेल का स्टाफ उन्हें कुछ पैसे तो कुछ रौब के चलते कोई बंदिश नहीं लगा पाता। छापे में बड़ी तादाद में चलते मिले मोबाइलों से साफ हो गया है कि रंगदारी के लिए जेल से ही व्यापारियों और अन्य लोगों को फोन किए जाते थे। छापेमार कार्रवाई के बाद जेल अफसरों पर बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही हैं। डीएम ने स्पष्ट किया कि इस बारे में शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है, किसी भी दोषी अधिकारी और कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
पैसा फेंको और बन जाओ वीआईपी
जेल में पैसे के बदले सारी सुख-सुविधाएं मिलती हैं, यह अफसरों के छापे से साबित हो चुका है। एक दो नहीं पूरे 22 मोबाइल फोन पकड़े गए हैं। इनके अलावा दर्जभर सिमकार्ड अलग मिले हैं। रॉड, खुखरी और कट्टन, यानी जेल में किसी को भी मौत के घाट उतारने का पूरा इंतजाम। आधा किलो चरस मिलने से साफ है कि बंदियों के नशे का शौक भी पूरा होता था। यह सब साजो सामान जेल में कैसे पहुंचा, कोई बताने को तैयार नहीं है। इस कार्रवाई के बाद जेल अफसरों को मानो सांप सूंघ गया है।
नाली और कपड़ों में मिले मोबाइल
मुजफ्फरनगर। कारागार में बंदियों की तलाशी के दौरान फोन नहीं मिलने पर अधिकारियों का माथा ठनका। तलाशी चलती रही तो कुछ देर बाद नाली में एक फोन मिला तो उसके बाद लाइन ही लग गई। बंदियों ने धुलाई के बाद जा कपड़े सुखाने के लिए डाले थे उनकी जेबों, नालियों और बाथरूम की छतों पर छुपाए गए फोन बरामद हुए।
मुजफ्फरनगर जेल में मारे गए छापे में बड़ी बरामदगी हुई है। हम लोगों को मुजफ्फरनगर और मेरठ जेल से रंगदारी मांगे जाने की लगातार सूचनाएं मिल रही थी। मुजफ्फरनगर जेल प्रशासन के बारे में शासन को अवगत करा दिया गया है। शासन के निर्देश पर ही अगली कार्रवाई होगी। अब जोन की अन्य जेलों पर इसी तरह की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जिन अपराधियों से चरस, मोबाइल या धारदार हथियार बरामद हुए हैं, उन पर मुकदमे दर्ज कराएं जाएंगे।
-सुजीत पांडेय, आईजी मेरठ जोन
धड़ल्ले से चल रहा था रंगदारी का खेल
मुजफ्फरनगर। जिला कारागर में पकड़े गए मोबाइल फोन ही मंसूरपुर के जीएम और सर्राफ के लड़के पर हुए कातिलाना हमले के जिम्मेदार हैं।
19 जनवरी को मंसूरपुर स्थित डिस्टलरी के मैनेजर को जेल से आए फोन पर लाखों की रंगदारी नहीं देने पर बदमाशों ने घेरकर मारने का प्रयास किया था। 28 फरवरी को मेरठ के एक चिकित्सक से भी कारागार से ही एक करोड़ की फिरौती मांगी गई थी। पिछले दिनों मंसूरपुर के सर्राफ के पुत्र को भी फिरौती नहीं देने पर बदमाश उसकी दुकान पर ही गोली मारकर भाग गए। शामली के भी खाद और दवा व्यापारी से जिला कारागार से फिरौती मांगने की बातें सामने आई थी। इतनी घटनाएं होने के बाद भी जेल प्रशासन हमेशा अपने यहां फिरौती मांगे जाने की बात को नकारता रहा।
छले सात माह के भीतर 42 बड़े बदमाशों को दूसरी जेलों में शिफ्ट करने के बाद भी जेल से रंगदारी मांगे जाने की घटनाओं पर अकुंश नहीं लग पा रहा था। रविवार के छापे के बाद यह साफ हो गया है कि रंगदारी जेल के अंदर से ही मांगी जा रही थी।
कारागार में चल रही है फेसबुक
मुजफ्फरनगर। जिला कारागार में बंदी किस हद तक मौजमस्ती कर रहे थे, इसका अंदाजा एक फेसबुक एकाउंट से लगाया जा सकता है। किसी ने अपनी फेसबुक वॉल पर जेल के अंदर बैरकों में बंदियों की फोटो अपलोड कर दी। कुछ दिनों बाद मामला चर्चाओं में आया तो आनन-फानन में इसकी जांच की गई। बाद में यह फोटो फेसबुक से गायब हो गईं। संबंधित खबर पेज- 3 पर भी पढ़ें।