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EXCLUSIVE: 105 मृतकों से छांटे जाएंगे दंगा पीड़ित
मदन बालियान/मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 18 Sep 2013 08:08 AM IST
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उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर हिंसा के बाद अब मृतकों की सही सूची तैयार करने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। झंझट से बचने के लिए प्रशासन ने कवाल के तिहरे हत्याकांड से अब तक के सभी मृतकों की सूची तैयार कराई है।
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स्वास्थ्य विभाग ने 105 मृतकों की संख्या भेजी है। इनमें दंगा पीड़ितों की छंटनी, जांच के बाद हो पाएगी। हालांकि प्रशासन 39 और शासन 44 मौतों की पुष्टि कर रहा है।
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यूपी और केंद्र की यूपीए सरकार ने हिंसा की भेंट चढ़े मृतक आश्रित परिवारों के लिए सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता की घोषणा की है। अब सवाल हताहतों का उठता है।
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मृतकों और दंगे के बीच तार जोड़कर देखे जा रहे हैं। पहली रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग ने शामली और मुजफ्फरनगर में सात सितंबर से अब तक मारे गए 51 लोगों की सूची प्रशासन को सौंपी थी।
अफसरों ने मंथन किया तो सवाल उठा कि कवाल में तीन युवकों की हत्या हिंसा का प्रमुख कारण है। तय किया गया कि सूची 27 अगस्त से ही तैयार कराई जाए।
स्वास्थ्य विभाग ने 14 सितंबर तक दोनों जिलों के मृतकों की जो रिपोर्ट बनाकर भेजी है, उसमें संख्या 105 पर पहुंच गई है। वैसे अब तक मौतों की संख्या 110 तक पहुंच गई है।
इनमें हिंसा के शोलों में कितने जले, यह पुलिस की जांच के बाद ही तय हो पाएगा। मृतकों, गंभीर घायलों और सामान्य घायलों की अंतिम सूची तैयार करना भी पुलिस-प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नही है।
कैसे होगी पहचान
मुजफ्फरनगर। हिंसा की भेंट चढ़े शवों में अब तक भी नौ अज्ञात हैं। पुलिस ने अंतिम संस्कार तो करा दिया, लेकिन इनकी पहचान नहीं हो सकी। कोई दावेदार भी अब तक सामने नहीं आया है। मृतक आश्रित न मिलने के कारण सहायता लटक जाएगी।
'प्रशासन ने 27 अगस्त से दोनों जिलों के मृतकों की सूची स्वास्थ्य विभाग से मांगी थी। पोस्टमार्टम के आधार पर सूचना भेज दी गई है। पीएम रिपोर्ट संबंधित थानाध्यक्षों को भेजने के प्रावधान का पालन भी किया गया है। जांच के बाद पुलिस और प्रशासन ही हताहतों की संख्या तय करेगा।'
- डॉ. वीके जौहरी सीएमओ मुजफ्फरनगर