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जाट-मुस्लिम समीकरण बनाने में लगे मुलायम

Fri, 14 Feb 2014 12:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 14 Feb 2014 12:22 AM IST
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mulayam planning jat muslim equation

मुजफ्फरनगर दंगे के बाद बिगड़े अपने जाट-मुस्लिम समीकरण को बनाने के लिए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव एक के बाद एक जाट नेताओं को ओहदे दे रहे हैं। बागपत में उम्मीदवार बनाया है मुस्लिम को और ओहदे दिए जा रहे हैं जाटों को।

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पहले साहब सिंह और कुलदीप उज्ज्वल को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया और अब गुरुवार को ओमवीर तोमर को राज्य योजना आयोग का सलाहकार बना दिया गया है।

मुलायम सिंह ने बागपत लोकसभा सीट पर सबसे पहले विजयपाल के रूप में जाट प्रत्याशी को उतारा था। इसके बाद विजयपाल का टिकट काटकर सोमपाल शास्त्री को मैदान में उतारा। तब भी जाट मुस्लिम ट्रैक पर ही साइकिल चलाने की तैयारी थी लेकिन दंगे ने खेल बिगाड़ दिया।

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मुलायम ने नहीं छोड़ी है जाटों से आस

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पहले सोमपाल शास्त्री ने टिकट लौटाया, फिर पूर्व विधायक महक सिंह और अजय कुमार साइकिल से उतर गए। एक बार तो ऐसे लगा जैसे सपा जाटों से उम्मीद छोड़ देगी।

लेकिन अब लग रहा है कि मुलायम ने आस नहीं छोड़ी है। पहले कुलदीप को और अब ओमवीर तोमर को बड़ा ओहदा दिया गया है। ज्ञात हो कि राज्य योजना आयोग के अध्यक्ष मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हैं।

धर्मार्थ कार्य विभाग के सलाहकार के रूप में साहब सिंह को पहले ही ओहदा मिला हुआ है। साफ लग रहा है कि रालोद के गढ़ में जीत का खाता खोलने के लिए सपा जाट मुस्लिम समीकरण पर ही चलना चाहती है।

'चौधरी साहब के अधूरे काम पूरे करूंगा'

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राज्य योजना आयोग के सलाहकार बनने के बाद ओमवीर तोमर ने बताया कि बागपत उनकी जन्मभूमि है। चौधरी चरण सिंह ने राजनीति का पाठ पढ़ाया, उनके अधूरे काम पूरे करने की कोशिश करेंगे।

किताब लिखते ही मिल गई कुर्सी

31 जुलाई 1952 को इसोपुर गांव में पैदा हुए ओमवीर तोमर अब बड़ौत की टीचर्स कॉलोनी में रहते हैं। वह 1977-1978 में जनता वैदिक कॉलेज, बड़ौत के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। चौधरी चरण सिंह ने उन्हें और नीतीश कुमार (बिहार के मुख्यमंत्री) को 1980 में एक साथ युवा लोकदल का राष्ट्रीय महासचिव बनाया था। 1984 में कांग्रेस के टिकट पर बरनावा से चुनाव लड़े लेकिन हार गए।

इसके बाद बसपा के उम्मीदवार बने, लेकिन जीत नहीं पाए। विधानसभा चुनाव 2012 में बड़ौत से जनता दल यू के टिकट पर लड़े, लेकिन हार गए। हाल ही में दो किताबें लिखीं हैं, कुछ नए ख्वाब तामीर करो और संघर्ष सफर का नायक मुलायम सिंह। किताबों का विमोचन होते ही अब राज्य योजना आयोग के सलाहकार का महत्वपूर्ण पद मिल गया।

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