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महाकुंभ में पुण्य, मोक्ष की कामना के साथ आस्था की डुबकी
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/ब्यूरो
Updated Mon, 14 Jan 2013 10:43 PM IST
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दुनिया के सबसे बडे़ धार्मिक आयोजन महाकुंभ का आज शाही स्नान के साथ शुभारंभ हो गया। पूरे 147 वर्षों बाद बने इस दुर्लभ ग्रहीय संयोग पर संगम के जल में पुण्य व मोक्ष की कामना के साथ आस्था की डुबकी लगाने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा है।
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मेला प्रशासन पहले शाही स्नान मकर संक्राति पर लगभग सवा करोड़ श्रद्धालुओं के संगम स्नान की संभावना जताई है। आसपास के जिलों, राज्यों के साथ ही विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु महाकुंभ का पुण्य लेने के लिए जुटे हैं।
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दुर्लभ ग्रहीय संयोग
संगम की रेती पर महाकुंभ का दुर्लभ ग्रहीय संयोग देवगुरु बृहस्पति के वृष राशि से संचरण के कारण बना है। इसके साथ ही शनि और राहु के तुला राशि में संचरण का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। इससे पहले जनवरी 1865 में प्रयाग में ही अर्धकुंभ के दौरान ऐसा ग्रहीय संयोग बना था। तब भी शनि-राहु का तुला राशि में संचरण हुआ था।
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विशेष ग्रहीय स्थिति में संगम जल में स्नान के लिए संगम की रेती पर बसने वाली तंबुओं की नगरी में विशाल मानव समागम होने लगा है। दुनिया भर से अनेक मत-मतांतर, भाषा-भाषी, रीति-रिवाज, संस्कार, प्रथा-परंपरा के श्रद्धालु पुण्य और मोक्ष की कामना से जुटे हैं जो आज सुबह से संगम में डुबकी लगा रहे हैं।
स्नान के लिए बेहतर समय
स्थानीय समयानुसार सोमवार को दोपहर 12.22 बजे सूर्य का धनु से मकर राशि में संचरण शुरू होगा। स्नान के लिए यह बेहतर समय माना जा रहा है।
कुल 12.48 घंटे रहेगा पुण्यकाल
संक्राति का समय 12.22 बजे है लेकिन इससे 6.24 घंटे पहले और बाद में पुण्यकाल माना जाता है। ऐसे में पूरे दिन स्नान किया जा सकता है। ज्योतिषियों के मुताबिक संक्रांति काल में सिद्धि योग और घनिष्ठा नक्षत्र रहेगा जो पुण्यदायी माना जाता है। ज्योतिर्विद ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक संक्रांति काल में पूर्ण पुण्यकाल रहेगा। सूर्योदय के करीब होने के कारण यह अवधि सूर्योपासना के लिए अद्भुत संयोग बना रही है। पश्चिमीवाहिनी गंगा में स्नान पुण्यदायी रहेगा।
महाकुंभ की तैयारियों पर एक नजर
-एक करोड़ 99 लाख वर्ग मीटर में बसा है तंबुओं का शहर।
-13,800 वर्ग फीट है स्नान का क्षेत्र।
-15 हजार सुरक्षाकर्मी मेले में तैनात।
-14 आईपीएस, 60 एसपी मेला व्यवस्था में लगे।
-120 डिप्टी एसपी प्रदेश भर से बुलाए गए।
-6700 रेलकर्मी देश भर से आए।
-116 विशेषज्ञ चिकित्सक विभिन्न जिलों से आए।
-20 बेड के 12 जोनल हॉस्पिटल तैयार।
-8000 सफाई कर्मी मेला क्षेत्र में तैनात।
-1.50 लाख साधु संत करेंगे मकर संक्रांति का स्नान।
-5000 से अधिक संस्थाएं कर रही लोगों की सेवा।
-11000 से अधिक दुकानों पर मिल रही विविध सामग्री।
-1.50 लाख से अधिक बिजली के कनेक्शन दिए गए।
-50 हजार से अधिक कर्मचारी लगे हैं ड्यूटी पर
मेले में जुटने वाले नामचीन संत
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, नरेंद्रानंद सरस्वती, स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ, स्वामी अवधेशानंद गिरि, महामंडलेश्वर पायलट बाबा, महेश्वरानंद पुरी, स्वामी गुरुशरणानंद, दाती महाराज, ज्ञानानंद, स्वामी रामदेव, रमेश भाई ओझा, देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा जी, संत आसाराम बापू सहित अनेक संत मेले में शामिल होंगे।