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विवादों के बीच विकास की राह पर आवास विकास, 968 आवासों का कर दिया ड्रा
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Updated Wed, 11 Jan 2017 11:31 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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तमाम गतिरोध के बावजूद जागृति विहार एक्सटेंशन में आवास विकास परिषद सधे कदमों से आगे बढ़ गया है। दरअसल यहां पहली बार आवास विकास ने बड़े स्तर पर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग का प्रयोग किया है। वर्ष 2012 में फ्लैट बने तो उसके बाद लगातार निर्माण चल रहा है। वर्तमान में भी इस स्थान पर समाजवादी आवास बनाए जा रहे हैं।
968 आवासों का कर दिया ड्रा
जागृति विहार एक्सटेंशन में फिलहाल लगभग 16 सौ फ्लैट बनाए जा रहे हैं। तीन श्रेणी में यहां आवास बनाए जा रहे हैं। 57 वर्ग मीटर में बन रहे आवासों के लिए कुल 180 लोगों, 64 वर्ग मीटर में 276 जबकि 32 वर्ग मीटर क्षेणी में कुल 512 लोगों ने आवेदन किया है। परिषद ने तीन दिनों में इन सभी फ्लैटों का नंबरिंग ड्रा कर दिया है। यानी यह तय कर दिया गया है कि कौन सा फ्लैट किसका है। बाकी फ्लैटों के लिए भी प्लानिंग बना ली गई है। तैयारी है कि बचे फ्लैटों को सीधे ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर आवंटित कर दिया जाएगा। इस बाबत आवंटन खुले हैं।
अब भूखंडों की बारी
परिषद अब इसके बाद भूखंड देने पर भी प्लान बन रहा है। लेआउट तैयार कर लिया गया है। तीन श्रेणियों मेें ही भूखंड भी काटे जाएंगे। जल्द यहां सीवर, वाटर सप्लाई, सड़क आदि की प्लानिंग तैयार होगी।
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चल रहे हैं विवाद
सरायकाजी, काजीपुर, कमालपुर आदि गांव के किसानों के साथ यहां आवास विकास परिषद का विवाद चल रहा है। किसान अधिग्रहीत जमीन के बदले अतिरिक्त प्रतिकर की मांग कर रहे हैं। समय-समय पर आंदोलन भी कर रहे हैं। बावजूद इसके आवास विकास अपनी इस योजना को धीरे-धीरे ही सही पर आगे बढ़ा रहा है।
आवंटियों को रहना होगा अलर्ट
अहम बात यह है कि आवंटियों को भी यहां फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा। आवंटी रख भी रहे हैं। यदि ऐसा न होता तो फिर ये सारे फ्लैट एक साथ ही बुक हो गए होते। दरअसल यहां किसानों का विवाद है और किसान कई बार बड़ा विरोध दर्ज करा चुके हैं। यहां पड़ी खाली जमीन पर जुताई कर चुके हैं। हालांकि आवास विकास ने सख्ती दिखाते हुए जहां थाना पुलिस को पत्र लिखा है, तो वहीं डीएम से मुलाकात भी की है। एसएसपी को भी पत्र लिखकर मांग कर चुके हैं कि यहां किसानों के गतिरोध पर सख्ती की जाए। परिषद अधिकारियों का कहना है कि इस जमीन का पैसा किसानों को दिया जा चुका है। अब मांग गलत है। यदि कोई बात बनती भी है तो वह फैसला हो जाएगा। लेकिन जमीन पर अब मालिकाना हक आवास विकास का है। ऐसे में यदि वहां कोई विरोध करता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
एमडीए जैसी न हो जाए हालत
इस योजना में बड़ी चिंता यह है कि कहीं इसकी हालत भी एमडीए की शताब्दीनगर योजना जैसी न हो जाए। एमडीए की यह योजना किसानों के गतिरोध के कारण ठप पड़ी है। किसान नई अधिग्रहण नीति से मुआवजा मांग रहे हैं और एमडीए का कहना है कि किसानों को तीन बार पैसा दिया जा चुका है। अब नहीं दिया जा सकता है। ऐसे में यहां आवंटी बुरी तरह से फंस गए हैं।
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968 आवासों का कर दिया ड्रा
जागृति विहार एक्सटेंशन में फिलहाल लगभग 16 सौ फ्लैट बनाए जा रहे हैं। तीन श्रेणी में यहां आवास बनाए जा रहे हैं। 57 वर्ग मीटर में बन रहे आवासों के लिए कुल 180 लोगों, 64 वर्ग मीटर में 276 जबकि 32 वर्ग मीटर क्षेणी में कुल 512 लोगों ने आवेदन किया है। परिषद ने तीन दिनों में इन सभी फ्लैटों का नंबरिंग ड्रा कर दिया है। यानी यह तय कर दिया गया है कि कौन सा फ्लैट किसका है। बाकी फ्लैटों के लिए भी प्लानिंग बना ली गई है। तैयारी है कि बचे फ्लैटों को सीधे ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर आवंटित कर दिया जाएगा। इस बाबत आवंटन खुले हैं।
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अब भूखंडों की बारी
परिषद अब इसके बाद भूखंड देने पर भी प्लान बन रहा है। लेआउट तैयार कर लिया गया है। तीन श्रेणियों मेें ही भूखंड भी काटे जाएंगे। जल्द यहां सीवर, वाटर सप्लाई, सड़क आदि की प्लानिंग तैयार होगी।
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चल रहे हैं विवाद
सरायकाजी, काजीपुर, कमालपुर आदि गांव के किसानों के साथ यहां आवास विकास परिषद का विवाद चल रहा है। किसान अधिग्रहीत जमीन के बदले अतिरिक्त प्रतिकर की मांग कर रहे हैं। समय-समय पर आंदोलन भी कर रहे हैं। बावजूद इसके आवास विकास अपनी इस योजना को धीरे-धीरे ही सही पर आगे बढ़ा रहा है।
आवंटियों को रहना होगा अलर्ट
अहम बात यह है कि आवंटियों को भी यहां फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा। आवंटी रख भी रहे हैं। यदि ऐसा न होता तो फिर ये सारे फ्लैट एक साथ ही बुक हो गए होते। दरअसल यहां किसानों का विवाद है और किसान कई बार बड़ा विरोध दर्ज करा चुके हैं। यहां पड़ी खाली जमीन पर जुताई कर चुके हैं। हालांकि आवास विकास ने सख्ती दिखाते हुए जहां थाना पुलिस को पत्र लिखा है, तो वहीं डीएम से मुलाकात भी की है। एसएसपी को भी पत्र लिखकर मांग कर चुके हैं कि यहां किसानों के गतिरोध पर सख्ती की जाए। परिषद अधिकारियों का कहना है कि इस जमीन का पैसा किसानों को दिया जा चुका है। अब मांग गलत है। यदि कोई बात बनती भी है तो वह फैसला हो जाएगा। लेकिन जमीन पर अब मालिकाना हक आवास विकास का है। ऐसे में यदि वहां कोई विरोध करता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
एमडीए जैसी न हो जाए हालत
इस योजना में बड़ी चिंता यह है कि कहीं इसकी हालत भी एमडीए की शताब्दीनगर योजना जैसी न हो जाए। एमडीए की यह योजना किसानों के गतिरोध के कारण ठप पड़ी है। किसान नई अधिग्रहण नीति से मुआवजा मांग रहे हैं और एमडीए का कहना है कि किसानों को तीन बार पैसा दिया जा चुका है। अब नहीं दिया जा सकता है। ऐसे में यहां आवंटी बुरी तरह से फंस गए हैं।