मिट्टी की ढांग गिरने से दबे दो मजदूर, कड़ी मशक्कत के बाद निकाला शव
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मेडिकल थाना क्षेत्र के सरायकाजी में शुक्रवार दोपहर सीवर लाइन के लिए गड्ढा खोदते समय मिट्टी की ढांग गिर गई। इसमें दो मजदूर दब गए। एक मजदूर को तो आनन फानन में निकाल लिया गया, जबकि दूसरे मजदूर की मिट्टी में दबने से मौत हो गई। साढ़े तीन घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने मजदूर के शव को बाहर निकाला।
गढ़ रोड से सरायकाजी के लिए जाने वाली मेन रोड पर सड़क के बीचों बीच शुक्रवार को जल निगम द्वारा सीवर लाइन के लिए गड्ढा खोदा जा रहा था। हापुड़ के धौलाना थाना क्षेत्र के बझेड़ा निवासी ठेकेदार शौकीन पुत्र यामीन ने जेसीबी से गड्ढे की खुदाई का काम शुरू किया। उस समय ठेकेदार के अलावा उसका भाई वकील, धौलाना क्षेत्र के बझेड़ा निवासी अफजाल (25) पुत्र मोहम्मद रफीक व सिविल लाइन क्षेत्र के वाल्मीकि बस्ती निवासी अरुण पुत्र अशोक 10 फीट गहरे गड्ढे से मिट्टी निकाल रहे थे। दोपहर करीब 12 बजे अचानक मिट्टी की ढांग टूट गई। इस पर अरुण और अफजाल मिट्टी में दब गये। आनन फानन में जेसीबी चालक और अन्य मजदूरों ने दस मिनट की मशक्कत करते हुए अरुण को बाहर निकालाकर अस्पताल भेज दिया।
वहीं अफजाल मिट्टी में दब गया। सूचना पर एसओ मेडिकल मोहम्मद असलम, सीओ सिविल लाइन चक्रपाणि, नौचंदी, सिविल लाइन और लालकुर्ती थाना प्रभारी भी फोर्स के साथ पहुंचे। एडीएम सिटी और फायर ब्रिगेड के अधिकारी भी पहुंचे। बाद में दो जीसीबी लगाकर साढ़े तीन घंटे की मशक्कत के बाद अफजाल को मिट्टी से निकाला गया। पुलिस उसे एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एसओ मेडिकल मोहम्मद असलम ने बताया कि ठेकेदार और अफजाल के परिजनों ने लिखित में समझौता कर लिया। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया।
लोगों ने किया हंगामा
जिस समय ढांग टूटी तो आसपास के घरों में रहने वाले लोगों ने हंगामा कर दिया। पड़ोस के लोगों का कहना है कि ढांग टूटने से उनके घर की दीवार भी खिसक सकती है। जिसके चलते बड़ा नुकसान हो जाएगा।
बेबस पिता को थी आस
अफजाल पांच भाइयों में तीसरे नंबर का था। दो साल पहले ही उसकी शादी हुई थी। युवक के एक साल का बेटा है। दोपहर को जैसे ही अफजाल के दबने का पता चला तो उसका पिता रफीक भी अन्य लोगों के साथ मौके पर पहुंच गया। बेटे की जिंदगी की आस में बेबस पिता कई घंटे तक फूटकर बिलखता रहा। बीच में जैसे ही शोर मचता कि अफजाल यहां है, तो पिता गड्ढे की तरफ झांककर देखता और फिर आंखों से आंसू बहने लगते। जैसे ही अफजाल को बाहर निकाला, तो पिता उसके सीने से लिपटकर रोने लगा।
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