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जनाब! इस ट्रैफिक पुलिस का जाम पर जोर नहीं, यहां तो सदाबहार जाम

Wed, 04 Oct 2017 10:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Wed, 04 Oct 2017 10:56 AM IST
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traffic police have no contoll on traffic
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

शहर का रोजाना का जाम खुलवाना ट्रैफिक पुलिस या तो भूल चुकी है या फिर उसकी जिम्मेदारी ही नहीं रह गई है। सड़कें घेरकर अवैध पार्किंग बना चुके ऑटो और ई-रिक्शा चालक को हटाने की भी इनकी हिम्मत जवाब दे गई है। बस जोर चल रहा है तो जनता के धड़ाधड़ चालान काटकर टारगेट पूरे करने का। क्योंकि इनका लक्ष्य जाम खुलवाकर जनता को राहत देने के बजाय ज्यादा से ज्यादा चालान कर अपने नंबर बढ़ाना रह गया है।

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मंगलवार को दिन भर शहर जाम से हांफता रहा और पूरा सिस्टम बेबस नजर आया। दोपहर को लालकुर्ती पैठ बाजार से जीरो माइल तक वाहनों की लंबी कतारें लग गई। जीरो माइल से बेगमपुल तक भी बुरा हाल रहा। बेगमपुल चौराहे सेेेेे लेकर भैसाली बस अड्डे तक लोग जाम में फंसे रहे। केसरगंज, रेलवे रोड चौराहा, मेट्रो प्लाजा और बागपत रोड के अलावा रेलवे रोड चौराहे से घंटाघर तक एसपी सिटी कार्यालय के सामने वाहन चालक जाम में फंसकर पुलिस को कोसते नजर आए। जिला अस्पताल रोड, छतरी वाला पीर, खैरनगर, कबाड़ी बाजार, सराफा बाजार और देहली गेट चौराहे पर भी जाम की स्थिति बनी रही।
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यहां तो सदाबहार जाम
हापुड़ अड्डा चौराहा, लिसाड़ी गेट चौराहा और भूमिया पुल पर रोजाना जाम रहता है। हापुड़ अड्डा चौराहे पर सूरजकुंड की तरफ पुलिया निर्माण कार्य के चलते जाम रहता है। रही सही कसर टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा वाले सोहराब गेट मार्केट के सामने आधी से ज्यादा सड़क घेरकर पूरी कर देते हैं। मंगलवार को भी दोपहर से देर शाम तक यहां भीषण जाम लगा रहा।
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चुभती है अफसरों की खामोशी
यहां सवाल केवल हापुड़ अड्डा चौराहे या भूमिया पुल का नहीं है। शहर के मुख्य चौराहे बेगमपुल से लेकर जीरो माइल तक टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने सड़क घेरकर अवैध पार्किंग बना ली ही। बेगमपुल से भैसाली बस अड्डे की तरफ भी ऑटो और ई-रिक्शा अवैध तरीके से सड़क पर खड़े होते हैं। यही हाल दिल्ली रोड पर फुटबाल चौराहा, दिल्ली चुंगी और नवीन मंडी के पास का है। लेकिन पता नहीं क्यों सब कुछ जानते हुए पुलिस और ट्रैफिक अफसर खामोश हैं। 

किस काम का यह अमला
मैनपावर का रोना रोने वाले ट्रैफिक महकमे में एसपी ट्रैफिक, तीन सीओ, एक इंस्पेक्टर, दो टीएसआई, 11 एचसीपी और 105 सिपाहियों के अलावा होमगार्ड तैनात हैं। एक जीप, दो इंटरसेप्टर वाहन, छह ट्रैमो के अलावा अभियान के दौरान ट्रैफिक पुलिस क्रेन लेकर चलती है। लेकिन शहर तो रोजाना जाम रहता है, ऐसे में इतना अमला जनता के किस काम का। इसके विपरीत सितंबर माह में ट्रैफिक पुलिस ने 10150 वाहनों के चालान काटे और 6 लाख रुपये से ज्यादा का शमन शुल्क वसूला।


रोजाना के कम से कम दस चालान
शहर में जाम न लगे, इसकी जिम्मेदारी केवल ट्रैफिक पुलिस नहीं बल्कि थानों की पुलिस की भी है। लेकिन दरोगा जी सड़क पर तभी उतरते हैं, जब उन्हें रोजाना कम से कम दस चालान काटने का लक्ष्य पूरा करना होता है। इस दौरान दरोगा जी के आसपास जाम लग गए, तो मजाल है कि चालान छोड़कर जाम खुलवाया जाए। जहां दस चालान पूरे हुए, दरोगा जी सिपाहियों के साथ दूसरे काम पर निकल लेते हैं।

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