झंडा रोग, ब्लाईट रोग के बारे में बताया, धान की ज्यादातर फसल इस रोग की चपेट में
बताया कि अगर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा लगातार जानकारी दी जाती रहे तो इस रोग से बचा जा सकता है। किसान जगतार सिंह, रोहित गुर्जर, सतपाल सिंह ने कहा कि किसानों धान की फसल में नुकसान झेलना पड़ रहा है। गोष्ठी में मौजूद स्वामी कल्याण देव केंद्र के कृषि विशेषज्ञ डा. शिव मालियान व कृषि विशेषज्ञ मुकेश सिंह के मुताबिक ब्लाईट व झंडा रोग बीमारी होने पर धान के तने पर चिट्टीदार धब्बे पड़ जाते है।
यह बीमारी इतनी तेजी से बढ़ती है कि एक सप्ताह में धान की फसल को बर्बाद कर देती है। इस बीमारी से बचाव के लिए हैक्जाकोना, प्रोटीकोना जोल 1 ग्राम 300 एमएल या वैलिडामाईसिन की 300 एमएल दवाई का तीन सौ लीटर पानी में प्रति एकड़ मिलाकर छिड़काव कर सकते है। झंडा रोग के बचाव के लिए कार्बनडाजिम 2 ग्राम प्रति लीटर प्रति टंकी का स्प्रे कर सकते है।
पूूसा बासमती 1 में ब्लाईट (बीएलबी) में झुलसा का प्रकोप हो जाता है। यह बीमारी यूरिया के अधिक प्रयोग करने से पनप रही है। इसकी पहचान के लिए पत्तियां गोल बंडल के रूप में बन जाती है।
इस बीमारी से बचने के लिए कापर आक्सीक्लोराईड की 400 ग्राम मात्रा को स्टूपटो साइकलीन की 18 ग्राम मात्रा के साथ 200 लीटर पानी को प्रति एकड़ प्रयोग करने की सलाह दी है। इस मौके पर मनीष राणा, डॉ. श्रीपाल कोहली, हेमंत, सतबीर, करतब सिंह, गुरुप्रीत सिंह, रोहित बसंल, विकास शर्मा, सौभाग्यवीर मान आदि रहे।