फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   System in connivance with government property private

सिस्टम की साठगांठ से निजी हो गईं सरकारी संपत्ति  

Wed, 06 Apr 2016 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Wed, 06 Apr 2016 01:26 AM IST
विज्ञापन
System in connivance with government property private
होटल अलकरीम - फोटो : अमर उजाला

विज्ञापन
सिस्टम की साठगांठ से सरकारी संपत्ति निजी हाथों में चली गईं। नगर निगम की भूमि पर अवैध तरीके से अलकरीम होटल का ही निर्माण नहीं हुआ, बल्कि पाल और सिटी होटल के अलावा पालिका बाजारों तक का स्वरूप बदल दिया गया।

यही नहीं, निगम की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति को बेच दिया गया। चंद अफसरों और कर्मचारियों की शह पर सरकारी संपत्ति खुर्द बुर्द हो रही है तो कई फाइलें गुम होने के संकेत मिल रहे हैं। जिम्मेदार अफसर सब कुछ जानते हुए अनजान बने बैठे हैं। 
विज्ञापन


पाल होटल : निगम रिकार्ड के मुताबिक घंटाघर स्थित यह होटल यशपाल को किराए पर दिया गया था। काफी समय से होटल बंद पड़ा रहा और अंदर ही अंदर होटल तोड़कर दुकानों का अवैध निर्माण किया गया। इसमें नगर निगम प्रशासन ही नहीं बल्कि एमडीए के अधिकारियों की भी मिलीभगत रही। तीन साल पहले होटल की आधी बिल्डिंग की छत पर आठ अवैध दुकानों का निर्माण कर बेच भी दी गई। यही नहीं होटल की छत पर हाल ही में आधा दर्जन दुकानें बना दी गई, जिनकी खरीद-फरोख्त हो चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


शिकायतें हुईं तो अफसरों ने कानूनी दांवपेंच का पाठ पढ़ा दिया।
सिटी होटल : घंटाघर पर ही नगर निगम मार्केट के ऊपर यह होटल है। होटल में अवैध निर्माण करके बिल्डिंग का स्वरूप ही बदल दिया गया। दुकानों के आगे बरामदे के ऊपर भी निर्माण करके होटल को बड़ा रूप दे दिया गया। निगम कहता है कि होटल मालिक पर 10 लाख से भी अधिक का किराया बकाया चल रहा है। निगम की संपत्ति पर तो अवैध कब्जे हो ही गए, साथ ही किराया तक भी नहीं वसूला जा रहा है।

पालिका बाजार : निगम के शहर में जगह-जगह पालिका बाजार हैं। जिनमें 963 दुकानें हैं। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत दुकानों को किराएदारों ने ही 100-100 रुपये के स्टांप पेपर पर करोड़ों में बेच दिया है। साथ ही दुकानों का अवैध निर्माण करके स्वरूप बदल दिया गया। निगम प्रशासन के पास शिकायतें पहुंची, लेकिन सभी को रद्दी की टोकरी दिखा दी गई।

अभी अलकरीम होटल पर कार्रवाई हो रही है। इसके बाद एक-एक करके सभी पर कार्रवाई होगी। फाइलों पर काम चल रहा है। शीघ्र ही बड़ी कार्यवाही देखने को मिलेगी।- उमेश प्रताप, नगरायुक्त
---
सरकारी संपत्तियां खुर्द-बुर्द न हो, इसके लिए हमने हमने उप समिति बनायी हुई है। समिति चेयरमैन को समय- समय पर जांच करनी चाहिए। हमने भी पत्रावली मांगी थी, लेकिन पत्रावली अभी तक नहीं मिली। अब नगरायुक्त से बात की जाएगी।- हरिकांत अहलूवालिया, महापौर 

--
निगम में काफी गडबड़ हो रहा है। अधिकारी और कर्मचारी कोई भी उपसमिति मानने को तैयार नहीं हैं। पिछले दिनों होटल और दुकानों की फाइलें मांगी थी, आज तक नहीं दी। जिससे साफ जाहिर है कि या तो रिकॉर्ड गायब कर दिया गया है या फिर बड़े घोटाले को जन्म दिया गया है।- ऋषिपाल चौधरी, चेयरमैन उप समिति संपत्ति नगर निगम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed