फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   sylabus taiyaar

सिलेबस तैयार हुआ नहीं, कैंपस में हो गए एडमिशन

Sat, 10 Sep 2016 02:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Sat, 10 Sep 2016 02:26 AM IST
विज्ञापन
sylabus taiyaar
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
 डिग्री कॉलेजों को नसीहत देने वाला चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय खुद के मामलों में ढुलमुल रवैया अपना रहा है। पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में इसी सत्र से च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू होना है। दो मेरिट के एडमिशन भी हो चुके हैं। लेकिन, अभी तक सिलेबस तैयार नहीं हुआ है। अधिकारियों को इतनी भी फुरसत नहीं है कि वे इसकी प्रगति पर नजर रखें। जबकि, विवि के पास ठीकठाक मैन पॉवर है। अब एडमिशन पूरे होने वाले हैं तो इसे लेकर हायतौबा मच रही है।
विज्ञापन

समय पर काम नहीं करने के लिए विवि कॉलेजों को नसीहत देता रहता है। लेकिन, खुद कैंपस में सीबीसीएस को लेकर लापरवाह बना रहा। पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में दूसरी मेरिट से एडमिशन की अंतिम तिथि 10 सितंबर है। अधिकांश एडमिशन हो चुके हैं। इसके बाद एडमिशन के लिए ओपन मेरिट जारी की जा सकती है। अहम यह है कि क्लास शुरू होने वाली हैं, लेकिन अधिकांश विषयों का सिलेबस ही तैयार नहीं हुआ। यह बात अधिकारियों के भी संज्ञान में है। वैसे विवि में रोज बैठकें होती हैं, लेकिन सिलेबस को लेकर विभागाध्यक्ष से लेकर अधिकारियों तक का रवैया ढुलमुल रहा। अब जब क्लास शुरू होने में चंद दिन ही बचे हैं तो तेजी दिखाई जा रही है। एमएचआरडी के निर्देश पर सीबीसीएस लागू हो रहा है। विवि इसे पिछले साल ही लागू करना चाह रहा था। लेकिन, एक साल मामला टला फिर भी ऐसे हालात हैं। विवि कैंपस के बाद यह प्रयोग सफल रहा तो कॉलेजों में भी लागू किया जाएगा।
विज्ञापन


...और नीरो बंसी बजा रहा है
विवि की लापरवाही में दूसरा बड़ा मामला पीएचडी का है। पीएचडी एंट्रेंस हुए चार महीने हो गए। इसके आगे क्या और कब होगा, यह स्पष्ट नहीं है। विवि को खाली सीटों का ब्यौरा जारी करना था। बताना था कि एंट्रेंस से छूटे और एंट्रेंस क्लियर करने वाले कितने अभ्यर्थी हैं। कोर्स वर्क कब शुरू करना है, इन सवालों के जवाब विवि के पास नहीं हैं। शोध की जिम्मेदारी डिप्टी रजिस्ट्रार नारायण प्रसाद के पास है। उनको खोजना आसान नहीं है। कुलपति के पास कई बार इस बात की शिकायत जा चुकी है कि पीएचडी के मामले में डिप्टी रजिस्ट्रार दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। इससे लेट हो रहा है। हकीकत भी यही है कि वह बांसुरी बजाने के शौकीन हैं। उनकी तो बांसुरी बज रही है, लेकिन काम नहीं होने से छात्रों की बैंड बज गई है। बड़े अफसरों के कानों तक न तो बांसुरी की आवाज जा रही है और न ही बैंड की।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed