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Meerut News: स्वामी विरजानंद के योगदान को याद किया
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- आर्य समाज थापर नगर में हुआ सत्संग का हुआ आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर के रविवारीय सत्संग में महर्षि दयानंद सरस्वती के गुरु दंडी स्वामी विरजानंद के 158वें स्मृति दिवस पर उनके जीवन और योगदान को याद किया गया। प्रधान राजेश सेठी ने बताया कि स्वामी विरजानंद का जन्म 1789 में पंजाब के करतारपुर के निकट गंगापुर गांव में हुआ था। बचपन में चेचक के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। उन्होंने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति और अध्ययन के बल पर संस्कृत व्याकरण एवं शास्त्रों में विद्वता हासिल की।
राजेश सेठी बताया कि 1860 में स्वामी दयानंद सरस्वती शिक्षा प्राप्त करने उनके पास पहुंचे। स्वामी विरजानंद के निधन पर महर्षि दयानंद ने कहा था कि व्याकरण का सूर्य अस्त हो गया। कार्यक्रम में प्रीति सेठी, विदुला सोनी, कमलेश चांदना, सुमन आनंद और सुभाष मल्होत्रा ने भजन प्रस्तुत किए। राजेश सेठी के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ हुआ। यजमान मणि एवं विक्रम सोंधी रहे। कार्यक्रम का संचालन मंत्री मनीष शर्मा ने किया। इस अवसर पर अशोक सुधाकर, करुणा सागर, विजय बंसल, लोकेंद्र सिंह, योगेश मुवार, चांद ग्रोवर और राजीव सोनी रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर के रविवारीय सत्संग में महर्षि दयानंद सरस्वती के गुरु दंडी स्वामी विरजानंद के 158वें स्मृति दिवस पर उनके जीवन और योगदान को याद किया गया। प्रधान राजेश सेठी ने बताया कि स्वामी विरजानंद का जन्म 1789 में पंजाब के करतारपुर के निकट गंगापुर गांव में हुआ था। बचपन में चेचक के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। उन्होंने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति और अध्ययन के बल पर संस्कृत व्याकरण एवं शास्त्रों में विद्वता हासिल की।
राजेश सेठी बताया कि 1860 में स्वामी दयानंद सरस्वती शिक्षा प्राप्त करने उनके पास पहुंचे। स्वामी विरजानंद के निधन पर महर्षि दयानंद ने कहा था कि व्याकरण का सूर्य अस्त हो गया। कार्यक्रम में प्रीति सेठी, विदुला सोनी, कमलेश चांदना, सुमन आनंद और सुभाष मल्होत्रा ने भजन प्रस्तुत किए। राजेश सेठी के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ हुआ। यजमान मणि एवं विक्रम सोंधी रहे। कार्यक्रम का संचालन मंत्री मनीष शर्मा ने किया। इस अवसर पर अशोक सुधाकर, करुणा सागर, विजय बंसल, लोकेंद्र सिंह, योगेश मुवार, चांद ग्रोवर और राजीव सोनी रहे।
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