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स्थानीय लोगों के बल पर हस्तिनापुर सेंक्चुरी होगी ‘हॉट’
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sat, 23 Jul 2016 02:18 AM IST
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बिग बाइट में आयोजित वर्कशॉप
- फोटो : अमर उजाला
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पांच जिलों में फैली हस्तिनापुर सेंक्चुरी का मैनेजमेंट प्लान बनाने की तैयारी वन विभाग ने शुरू कर दी है। शुक्रवार को पहला कदम बढ़ाते हुए विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के साथ मिलकर वर्कशॉप का आयोजन किया।
जिसमें वाइल्ड लाइफ और फोरेस्ट्री का एक्सपर्ट शामिल हुए। प्लान को लेकर उन्होंने अपने राय दी। चंबल सेंक्चुरी से भी एक्सपर्ट बुलाए गए थे। निचोड़ यह निकला कि क्षेत्रीय लोगों को साथ लेकर चले बिना प्लान सफल नहीं हो सकता। उनकी राय और सहयोग महत्वपूर्ण है। अब विभाग इस दिशा में काम करेगा।
परतापुर बाईपास स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित वर्कशॉप में मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, हापुड़ और बुलंदशहर जिले में फैली सेंक्चुरी के मैनेजमेंट को लेकर चर्चा हुई। यहां गंगा नदी में और किनारे पर घड़ियाल, कछुए, सारस, डॉल्फिन और बारहसिंघा आदि प्रजातियां हैं। प्रदूषण और अतिक्रमण से इनका संरक्षण करना है। रिवर्स वैट लैंड एंड वॉटर पॉलिसी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के निदेशक सुरेश प्रभु ने कहा गंगा में 606 घड़ियालों को री इंटरड्यूस किया जा चुका है। यह लोकल लोगों के समर्थन की वजह से संभव हो पाया। चिंता की बात यह है कि गंगा और सेंक्चुरी क्षेत्र की जमीन का यूज बदल रहा है।
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यह वन्य जीवों के लिए ठीक नहीं है। प्रोफेसर बीसी चौधरी ने चंबल सेंक्चुरी का उदाहरण देकर सुझाव दिए। चंबल सेंक्चुरी राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आती है। हस्तिनापुर सेंक्चुरी पांच जिलों में है। मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार ने कहा हस्तिनापुर सेंक्चुरी दिल्ली के नजदीक होने और महाभारत कालीन इतिहास की वजह से हॉट स्पॉट है। यह ईको टूरिज्म की बेहतर जगह बन सकती है।
विभाग इस क्षेत्र में काम कर रहा है। वन संरक्षक सुशील कुमार अवस्थी ने सेंक्चुरी की खासियत और चुनौती के बारे में बताया। उन्होंने कहा सेंक्चुरी के दायरे के 173 किमी क्षेत्र में गंगा बहती है। कुल क्षेत्रफल 2073 वर्ग किमी है। यहां भरपूर मेडिशनल प्लांट हैं। प्रोफेसर अफीफुल्ला खान ने सेंक्चुरी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वर्कशॉप में डीएफओ मेरठ अदिति शर्मा, डीएफओ बागपत मनीष मित्तल, घड़ियाल प्रोजेक्ट के इंचार्ज संजीव यादव अधिकारी मौजूद रहे। वर्कशॉप में वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक उमेंद्र शर्मा ने भी भाग लिया।
कब्जे की जमीन पर लगवाएं पौधे : उमेंद्र शर्मा
प्रमुख वन संरक्षक उमेंद्र शर्मा ने कहा वन विभाग की जमीन पर जो अवैध कब्जे हो गए हैं, उन पर पौधरोपण कराया जाए। ग्राम समाज की जमीन पर ग्रामीणों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए। कब्जे पर फोरेस्ट्री के लिए सुझाव मांगे। उन्होंने कहा हस्तिनापुर सेंक्चुरी दिल्ली के पास होने की वजह से ईको टूरिज्म की संभावना है। प्लान सस्टेनेबल होना चाहिए। 24 घंटे में पांच करोड़ पौधे लगाने के लिए उन्होंने विभाग को बधाई दी।
प्लान के लिए यह निकला निचोड़
क्षेत्रीय लोगों को जोड़ा जाए। सेंक्चुरी पर आधारित लोगों की सलाह और सहयोग लिया जाए
सेंक्चुरी की लंबाई काफी है। सुरक्षा की दृष्टि से तैनाती को बढ़ाया जाए
दिल्ली में आवाज उठाने के लिए प्रेशर ग्रुप बनाया जाए, जो मैनेजमेंट प्लान की आवाज बुलंद कर सके
रिलिजियस टूरिज्म और हिस्ट्री को लेकर संरक्षण प्लान बनाया जाए
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जिसमें वाइल्ड लाइफ और फोरेस्ट्री का एक्सपर्ट शामिल हुए। प्लान को लेकर उन्होंने अपने राय दी। चंबल सेंक्चुरी से भी एक्सपर्ट बुलाए गए थे। निचोड़ यह निकला कि क्षेत्रीय लोगों को साथ लेकर चले बिना प्लान सफल नहीं हो सकता। उनकी राय और सहयोग महत्वपूर्ण है। अब विभाग इस दिशा में काम करेगा।
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परतापुर बाईपास स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित वर्कशॉप में मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, हापुड़ और बुलंदशहर जिले में फैली सेंक्चुरी के मैनेजमेंट को लेकर चर्चा हुई। यहां गंगा नदी में और किनारे पर घड़ियाल, कछुए, सारस, डॉल्फिन और बारहसिंघा आदि प्रजातियां हैं। प्रदूषण और अतिक्रमण से इनका संरक्षण करना है। रिवर्स वैट लैंड एंड वॉटर पॉलिसी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के निदेशक सुरेश प्रभु ने कहा गंगा में 606 घड़ियालों को री इंटरड्यूस किया जा चुका है। यह लोकल लोगों के समर्थन की वजह से संभव हो पाया। चिंता की बात यह है कि गंगा और सेंक्चुरी क्षेत्र की जमीन का यूज बदल रहा है।
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यह वन्य जीवों के लिए ठीक नहीं है। प्रोफेसर बीसी चौधरी ने चंबल सेंक्चुरी का उदाहरण देकर सुझाव दिए। चंबल सेंक्चुरी राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आती है। हस्तिनापुर सेंक्चुरी पांच जिलों में है। मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार ने कहा हस्तिनापुर सेंक्चुरी दिल्ली के नजदीक होने और महाभारत कालीन इतिहास की वजह से हॉट स्पॉट है। यह ईको टूरिज्म की बेहतर जगह बन सकती है।
विभाग इस क्षेत्र में काम कर रहा है। वन संरक्षक सुशील कुमार अवस्थी ने सेंक्चुरी की खासियत और चुनौती के बारे में बताया। उन्होंने कहा सेंक्चुरी के दायरे के 173 किमी क्षेत्र में गंगा बहती है। कुल क्षेत्रफल 2073 वर्ग किमी है। यहां भरपूर मेडिशनल प्लांट हैं। प्रोफेसर अफीफुल्ला खान ने सेंक्चुरी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वर्कशॉप में डीएफओ मेरठ अदिति शर्मा, डीएफओ बागपत मनीष मित्तल, घड़ियाल प्रोजेक्ट के इंचार्ज संजीव यादव अधिकारी मौजूद रहे। वर्कशॉप में वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक उमेंद्र शर्मा ने भी भाग लिया।
कब्जे की जमीन पर लगवाएं पौधे : उमेंद्र शर्मा
प्रमुख वन संरक्षक उमेंद्र शर्मा ने कहा वन विभाग की जमीन पर जो अवैध कब्जे हो गए हैं, उन पर पौधरोपण कराया जाए। ग्राम समाज की जमीन पर ग्रामीणों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए। कब्जे पर फोरेस्ट्री के लिए सुझाव मांगे। उन्होंने कहा हस्तिनापुर सेंक्चुरी दिल्ली के पास होने की वजह से ईको टूरिज्म की संभावना है। प्लान सस्टेनेबल होना चाहिए। 24 घंटे में पांच करोड़ पौधे लगाने के लिए उन्होंने विभाग को बधाई दी।
प्लान के लिए यह निकला निचोड़
क्षेत्रीय लोगों को जोड़ा जाए। सेंक्चुरी पर आधारित लोगों की सलाह और सहयोग लिया जाए
सेंक्चुरी की लंबाई काफी है। सुरक्षा की दृष्टि से तैनाती को बढ़ाया जाए
दिल्ली में आवाज उठाने के लिए प्रेशर ग्रुप बनाया जाए, जो मैनेजमेंट प्लान की आवाज बुलंद कर सके
रिलिजियस टूरिज्म और हिस्ट्री को लेकर संरक्षण प्लान बनाया जाए