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आज जाएगी 13वें शहर की स्मार्ट सूची
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Mon, 28 Sep 2015 01:46 AM IST
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राज्य सरकार स्मार्ट सिटी के चयन के लिए मेरठ और रायबरेली के नाम आज केंद्र सरकार को भेज देगी। मेरठ का दावा सबसे ज्यादा मजबूत है। ऐसे में केंद्र को मेरठ के नाम पर ही स्वीकृति देनी होगी। यदि इस बार केंद्र ने मेरठ को अनदेखा किया तो यह भाजपा पर भारी पड़ेगा।
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केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी के चयन की गेंद दो बार राज्य सरकार के पाले में डाल चुकी है। राज्य सरकार ने भी किसी एक शहर का नाम जारी करने की बजाए केंद्र सरकार को दोनों शहरों (मेरठ, रायबरेली) की सूची भेजने का निर्णय लिया हुआ है। संभवत: आज सोमवार को राज्य सरकार स्मार्ट सिटी के लिए दोनों शहरों के नामों की सूची केंद्र सरकार को भेजकर अपने सिर से वजन हलका करने का काम करेगी। हालांकि अभी तक के एपीसोड से साफ जाहिर है कि मेरठ और रायबरेली के इतिहास को दोनों सरकार जानती हैं। अगर केंद्र सरकार ने सही निर्णय लिया तो मेरठ को ही स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल किया जाएगा।
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स्मार्ट सिटी पर 30 जुलाई से जद्दोजहद चल रही है। पहले दिन भले ही राज्य सरकार ने स्मार्ट सिटी की दौड़ में मेरठ के साथ जबरन रायबरेली को खड़ा किया हो, लेकिन अब राज्य सरकार मेरठ के इतिहास और उपलब्धियों को जान चुकी है। यही कारण है कि 21 सितंबर को लखनऊ में हुई बैठक के दौरान मेरठ के पक्ष गंभीरता से ही नहीं सुना गया, बल्कि मेरठ को ही 13वें स्थान पर रखकर रिपोर्ट तैयार की गई। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी और मेरठ के व्यापारी नेता नवीन गुप्ता को स्मार्ट सिटी के लिए मेरठ का नाम ही केंद्र को भेजने का आश्वासन दिया था। हालांकि लखनऊ से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार अकेले मेरठ का नाम केंद्र को भेजने की बजाय दोनों शहरों का नाम भेज रही है। इसके पीछे भी सियासी बू आ रही है।
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केंद्र के लिए अहसान चुकाने का वक्त
राज्य की रिपोर्ट के मुताबिक अब स्मार्ट सिटी के लिए मेरठ पर मोहर लगाने की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार मेरठ की जनता के विश्वास को जीतेगी, या फिर वादाखिलाफी करेगी। वैसे भी मेरठ ने भाजपा को पहले से ही सांसद, विधायक और महापौर देकर अहसान किया हुआ है। अगर केंद्र सरकार ने जरा भी मेरठ को नजर अंदाज किया तो जनता अपना रुख बदलने में देर नहीं करेगी। इसका खामियाजा भाजपा को भरना ही होगा।