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स्मार्ट सिटी का शोर, भाजपा के जनप्रतिनिधि मौन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jun 2016 01:49 AM IST
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टाउन हॉल में बैठक में बोलती महिला
- फोटो : अमर उजाला
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शहर में स्मार्ट सिटी का शोर मचा है। लेकिन भाजपा के जनप्रतिनिधि मौन साधे हुए हैं। एक सप्ताह से कंसल्टेंट टीम शहर में डेरा डाले हुए है। केवल महापौर ही उनके साथ शहर में घूमकर स्मार्ट सिटी की अलख जगा रहे हैं। लेकिन भाजपा के सांसद और विधायक पता नहीं कहां लापता हैं। न तो कहीं स्मार्ट सिटी के लिए बैठक करते दिखे और न ही जनता को वोटिंग के लिए जागरूक करते। कमोेवेश यही हाल नगर निगम में भाजपा के 44 पार्षदों का है। जिनमें से एक-दो ही सक्रियता दिखा रहे हैं।
मेरठ में भाजपा की सरकार, और यह हाल
पिछले दिनों केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु, केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राममाधव शहर में थे। इस दौरान एक कार्यक्रम में डॉ. बालियान ने बेबाकी से कहा था कि चाहे कुछ भी हो, मेरठ में तो भाजपा की सरकार ही बनती है। यहां भाजपा से सांसद राजेंद्र अग्रवाल हैं तो शहर, दक्षिण और कैंट में भाजपा से विधायक हैं। महापौर भी भाजपा से हैं और नगर निगम में भाजपा पार्षदों की संख्या भी 48 है। ऐसे में मेरठ को स्मार्ट सिटी बनने का अवसर भी केंद्र की भाजपा सरकार ने ही दिया है। लेकिन उसके बावजूद केवल महापौर को छोड़कर कोई भी सांसद या विधायक स्मार्ट सिटी को लेकर अभी तक जनता के बीच सक्रिय नहीं हुआ है। किसी भी जनप्रतिनिधि ने सार्वजनिक रूप से शहर में घूमकर जनता से स्मार्ट सिटी के लिए वोटिंग करने की अपील तक नहीं की है। जिस स्मार्ट सिटी के लिए पूरा शहर आंदोलन छेड़े हुए है, उसके लिए भाजपा नेताओं की ऐसी बेरुखी को क्या समझा जाए।
निगम के पार्षद भी तो कम नहीं
नगर निगम में 89 पार्षद हैं। जबकि शहर 80 वार्डों में बंटा है। शहर को स्मार्ट सिटी बनाना हो या अन्य विकास कार्य। सभी में पार्षदों की बड़ी भूमिका होती है। लेकिन इस समय निगम के पार्षद स्मार्ट सिटी के नाम पर चादर तानकर सो गए हैं। एक-दो पार्षद को छोड़कर किसी भी पार्षद ने मैदान में उतरकर स्मार्ट सिटी के पक्ष मे वोटिँग के लिए जागरूक करने अथवा वोटिंग कराने में कोई पहल नहीं की है। जिसका परिणाम सामने है। अभी तक स्मार्ट सिटी के पक्ष में की गई वोटिंग 1500 को भी नहीं छू सकी है। अगर ऐसा ही हाल रहा तो स्मार्ट सिटी का आंदोलन कब गति पकड़ेगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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वोटिंग के लिए ये है जरूरी
सांसद को अपने संसदीय क्षेत्र, विधायक को विधानसभा क्षेत्र और प्रत्येक पार्षद को अपने वार्ड की जनता को स्मार्ट सिटी से होने वाले लाभ और वोटिंग करने के लिए जागरूक करना चाहिए था। इसके लिए भले ही जनप्रतिनिधियों और पार्षदों को कैंप ही क्यों न लगाना पड़े। दुर्भाग्य यह है कि अभी तक शहर के 80 वार्डों में से एक भी वार्ड में न तो जागरूकता के लिए कैंप लगा है। और न ही वोटिंग शुरू करायी गई है।
प्रधानमंत्री से ही ले लो सबक
स्थानीय सांसद और विधायक तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यकुशलता और तेजतर्रार छवि से भी सबक नहीं ले रहे हैं। देश दुनिया के अति व्यस्त शेड्यूल में भी उनकी टाइमिंग परफेक्ट रहती है। लेकिन यहां तो एक अदद स्मार्ट सिटी अभियान के लिए यहां के जनप्रतिनिधियों को फुर्सत तक नहीं है।
एक सप्ताह से अकेले जुटे हैं महापौर
करीब आठ दिन से शहर में स्मार्ट सिटी की कंसल्टेंट टीम ने डेरा डाला हुआ है। महापौर हरिकांत अहलूवालिया उसी दिन से जनता को जागरूक करने के लिए बैठकें कर रहे हैं। जनता के सवालों का जवाब दे रहे हैं। जनता से स्मार्ट सिटी के पक्ष में वोटिंग करने के लिए आह्वान किया जा रहा है। लेकिन स्मार्ट सिटी मिशन में अकेले महापौर का योगदान ही काफी नहीं होगा। उनके सपोर्ट के लिए सभी को जुटना होगा। इस संबंध में महापौर का कहना है कि शहर की बड़ी जिम्मेदारी हम सभी के कंधों पर है। एक सप्ताह से लगातार हम स्मार्ट सिटी से भविष्य में जनता को होने वाले लाभ की जानकारी दे रहे हैं। साथ ही जनता को उनकी वोट से मिलने वाले स्मार्ट सिटी की याद दिला रहे हैं। नगरायुक्त हो या अन्य अधिकारी व कर्मचारी, सभी स्मार्ट सिटी के प्रति जनता को जागरूक कराने से लेकर वोटिंग कराने में जुटे हैं। यह सच्चाई है कि स्मार्ट सिटी लेने के लिए जनता को अधिक से अधिक वोट करना होगा।
हमें तो अनुमति चाहिए : कतीरा
पार्षद पंकज कतीरा कहते हैं कि अभी तक हमें वोटिंग कराने की किसी ने जिम्मेदारी ही नहीं दी है। अगर जिम्मेदारी मिलेगी तो हम अपने वार्ड में कुछ स्थानों पर कंप्यूटर लगवाकर जनता से जरूर वोटिंग कराएंगे। इस बात को हम पूरी तरह जानते हैं कि अगर वोटिंग में पिछड़ गए तो एक बार फिर स्मार्ट सिटी के लिए झटका लगेगा।
हमने संसाधन मांगे हैं : अग्रवाल
पार्षद विजय आनंद अग्रवाल का कहना है कि हम अभी तक वोटिंग नहीं करा पाए हैं। उसकी वजह है कि हमारे लोगों को कंप्यूटर का कम ज्ञान है। हमने नगरायुक्त से भी मांग की है कि वह हमें आईटी के दो लोग कंप्यूटर सहित उपलब्ध करा दें। जिससे हम अपने वार्ड की जनता के साथ सभी व्यापारियों से अभियान के साथ वोटिंग कराएंगे।
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मेरठ में भाजपा की सरकार, और यह हाल
पिछले दिनों केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु, केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राममाधव शहर में थे। इस दौरान एक कार्यक्रम में डॉ. बालियान ने बेबाकी से कहा था कि चाहे कुछ भी हो, मेरठ में तो भाजपा की सरकार ही बनती है। यहां भाजपा से सांसद राजेंद्र अग्रवाल हैं तो शहर, दक्षिण और कैंट में भाजपा से विधायक हैं। महापौर भी भाजपा से हैं और नगर निगम में भाजपा पार्षदों की संख्या भी 48 है। ऐसे में मेरठ को स्मार्ट सिटी बनने का अवसर भी केंद्र की भाजपा सरकार ने ही दिया है। लेकिन उसके बावजूद केवल महापौर को छोड़कर कोई भी सांसद या विधायक स्मार्ट सिटी को लेकर अभी तक जनता के बीच सक्रिय नहीं हुआ है। किसी भी जनप्रतिनिधि ने सार्वजनिक रूप से शहर में घूमकर जनता से स्मार्ट सिटी के लिए वोटिंग करने की अपील तक नहीं की है। जिस स्मार्ट सिटी के लिए पूरा शहर आंदोलन छेड़े हुए है, उसके लिए भाजपा नेताओं की ऐसी बेरुखी को क्या समझा जाए।
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निगम के पार्षद भी तो कम नहीं
नगर निगम में 89 पार्षद हैं। जबकि शहर 80 वार्डों में बंटा है। शहर को स्मार्ट सिटी बनाना हो या अन्य विकास कार्य। सभी में पार्षदों की बड़ी भूमिका होती है। लेकिन इस समय निगम के पार्षद स्मार्ट सिटी के नाम पर चादर तानकर सो गए हैं। एक-दो पार्षद को छोड़कर किसी भी पार्षद ने मैदान में उतरकर स्मार्ट सिटी के पक्ष मे वोटिँग के लिए जागरूक करने अथवा वोटिंग कराने में कोई पहल नहीं की है। जिसका परिणाम सामने है। अभी तक स्मार्ट सिटी के पक्ष में की गई वोटिंग 1500 को भी नहीं छू सकी है। अगर ऐसा ही हाल रहा तो स्मार्ट सिटी का आंदोलन कब गति पकड़ेगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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वोटिंग के लिए ये है जरूरी
सांसद को अपने संसदीय क्षेत्र, विधायक को विधानसभा क्षेत्र और प्रत्येक पार्षद को अपने वार्ड की जनता को स्मार्ट सिटी से होने वाले लाभ और वोटिंग करने के लिए जागरूक करना चाहिए था। इसके लिए भले ही जनप्रतिनिधियों और पार्षदों को कैंप ही क्यों न लगाना पड़े। दुर्भाग्य यह है कि अभी तक शहर के 80 वार्डों में से एक भी वार्ड में न तो जागरूकता के लिए कैंप लगा है। और न ही वोटिंग शुरू करायी गई है।
प्रधानमंत्री से ही ले लो सबक
स्थानीय सांसद और विधायक तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यकुशलता और तेजतर्रार छवि से भी सबक नहीं ले रहे हैं। देश दुनिया के अति व्यस्त शेड्यूल में भी उनकी टाइमिंग परफेक्ट रहती है। लेकिन यहां तो एक अदद स्मार्ट सिटी अभियान के लिए यहां के जनप्रतिनिधियों को फुर्सत तक नहीं है।
एक सप्ताह से अकेले जुटे हैं महापौर
करीब आठ दिन से शहर में स्मार्ट सिटी की कंसल्टेंट टीम ने डेरा डाला हुआ है। महापौर हरिकांत अहलूवालिया उसी दिन से जनता को जागरूक करने के लिए बैठकें कर रहे हैं। जनता के सवालों का जवाब दे रहे हैं। जनता से स्मार्ट सिटी के पक्ष में वोटिंग करने के लिए आह्वान किया जा रहा है। लेकिन स्मार्ट सिटी मिशन में अकेले महापौर का योगदान ही काफी नहीं होगा। उनके सपोर्ट के लिए सभी को जुटना होगा। इस संबंध में महापौर का कहना है कि शहर की बड़ी जिम्मेदारी हम सभी के कंधों पर है। एक सप्ताह से लगातार हम स्मार्ट सिटी से भविष्य में जनता को होने वाले लाभ की जानकारी दे रहे हैं। साथ ही जनता को उनकी वोट से मिलने वाले स्मार्ट सिटी की याद दिला रहे हैं। नगरायुक्त हो या अन्य अधिकारी व कर्मचारी, सभी स्मार्ट सिटी के प्रति जनता को जागरूक कराने से लेकर वोटिंग कराने में जुटे हैं। यह सच्चाई है कि स्मार्ट सिटी लेने के लिए जनता को अधिक से अधिक वोट करना होगा।
हमें तो अनुमति चाहिए : कतीरा
पार्षद पंकज कतीरा कहते हैं कि अभी तक हमें वोटिंग कराने की किसी ने जिम्मेदारी ही नहीं दी है। अगर जिम्मेदारी मिलेगी तो हम अपने वार्ड में कुछ स्थानों पर कंप्यूटर लगवाकर जनता से जरूर वोटिंग कराएंगे। इस बात को हम पूरी तरह जानते हैं कि अगर वोटिंग में पिछड़ गए तो एक बार फिर स्मार्ट सिटी के लिए झटका लगेगा।
हमने संसाधन मांगे हैं : अग्रवाल
पार्षद विजय आनंद अग्रवाल का कहना है कि हम अभी तक वोटिंग नहीं करा पाए हैं। उसकी वजह है कि हमारे लोगों को कंप्यूटर का कम ज्ञान है। हमने नगरायुक्त से भी मांग की है कि वह हमें आईटी के दो लोग कंप्यूटर सहित उपलब्ध करा दें। जिससे हम अपने वार्ड की जनता के साथ सभी व्यापारियों से अभियान के साथ वोटिंग कराएंगे।