सफेदपोशों के साये में काला खेल
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प्रतिबंधित है, फिर भी खनन
रात गहराते ही खनन माफिया सक्रिय हो जाते हैं। खेत मालिक से मिट्टी खरीदकर मशीनों से खनन शुरू हो जाता है। रात 11 बजे से तड़के 4 बजे तक चलने वाले इस खनन की मिट्टी सुबह 7 बजे तक तय स्थानों पर पहुंचा दी जाती है। जो अधिकांश निर्माणाधीन कॉलोनियाें के भराव में प्रयोग होती है।
दरअसल सरकारी रास्तों के निर्माण आदि के लिए तो मिट्टी खनन की अनुमति मिल जाती है, लेकिन प्राइवेट कामों के लिए यह पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे में बड़े स्तर पर कॉलोनियों के भराव में यह मिट्टी प्रयोग होती है।
बना रखे हैं गोदाम
कुछ खनन माफियाओं ने मिट्टी के गोदाम भी बना रखे हैं। हापुड़ रोड के पास फतेहउल्लापुर में एक बड़े भूखंड में खनन माफिया ने मिट्टी का गोदाम बनाया हुआ है। जहां पर तड़के पांच बजे तक डंपर मिट्टी लाकर डाल देते हैं। यहां से यह मिट्टी डंपर या ट्रैक्टर ट्राली में मांग के अनुसार सप्लाई होती रहती है। एक डंपर 3 हजार से 35 सौ रुपये और ट्राली दो हजार रुपये तक की बिकती है।
सफेदपोशों के दबाव में पुलिस मौन
पुलिस इस मामले में जानकारी के बावजूद सफेदपोशों के दबाव में कार्रवाई नहीं करती है। ‘अमर उजाला’ ने जब उस नंबर का पता किया, जिसने शिकायतकर्ता से खनन की जानकारी लेने के बाद कुछ नहीं किया तो पता चला कि उक्त नंबर भावनपुर थाना क्षेत्र की हसनपुर पुलिस चौकी के एक सिपाही का था। लेकिन उक्त सिपाही ने सटीक सूचना के बावजूद कुछ नहीं किया। सूत्रों की मानें तो भावनपुर, किठौर और खरखौदा थाना क्षेत्र में खनन एक बड़े नेता के संरक्षण में हो रहा है।
शहर में भी यही हाल
बेगमपुल पर एक निर्माणाधीन कांप्लेक्स के बराबर में बेसमेंट बनाने की तैयारी हो रही है। यहां पर भारी मात्रा में खनन हो चुका है, जो आते-जाते सभी को नजर आ रहा है। लेकिन इस तरफ किसी ने भी ध्यान नहीं दिया है। जब इस मामले में खनन विभाग से जुड़े लोगों से पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि इसके पीछे एक बड़े नेता हैं, जिस कारण वह सीधे कार्रवाई नहीं कर सकते हैं।