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‘बवाल शांत हुआ, अब तुम मोर्चा बनाओ’
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Sat, 28 May 2016 02:30 AM IST
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संप्रेक्षण गृह में जांच करने आई टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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किशोरों का बवाल शांत हुआ तो पुलिस ने मोर्चा संभाला। पुलिस ने इस बार किशोरों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। आईजी ने मेरठ पुलिस को निर्देश जारी करते हुए कहा कि प्रशासन को छोड़ो, पुलिस अपनी जिम्मेदारी संभाले। संप्रेक्षण गृह के आसपास घरों से पुलिस मोर्चा बनाए, ताकि किशोर संप्रेक्षण गृह से न भाग सके।
सूरजकुंड स्थित संप्रेक्षण गृह में किशोरों के बवाल करने के मामले में एसएसपी मेरठ जे. रविंदर गौड़ ने कहा कि किशोरों पर शिकंजा कसने का सारा काम प्रशासनिक अधिकारियों का है। इस मामले में आईजी सुजीत पांडेय ने कहा प्रशासन को छोड़ो, पुलिस अपना काम करे।
संप्रेक्षण गृह से भागने वाले किशोरों को पकड़ने का काम पुलिस का है। तीन दिन बाद मामला शांत हुआ है। पुलिस अब पहले से तैयारी कर ले कि किशोर अगर बवाल करे तो उन्हें कैसे काबू किया जाए। आईजी ने कहा कि किशोर रोजाना पथराव करते है। जिसमें पुलिस के साथ लोग घायल होते है। स्थानीय लोग दहशत में है, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की है।
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परिजन बुलाकर कराई किशोरों की काउंसिलिंग
किशोरों के सामने बेबस प्रशासन ने बवाल शांत करने के लिए शुक्रवार किशोरों के परिजनों को बुलाया। किशोरों की काउंसिलिंग कराई। उधर, किशोर से मामले की जानकारी लेने और बवाल की जांच करने सीजेएम, किशोर बोर्ड मजिस्ट्रेट और एडीजे पहुंचे।
संप्रेक्षण गृह में बवाल शांत न होने पर बृहस्पतिवार को प्रशासनिक अफसरों की मीटिंग हुई थी। इसमें सहमति बनी कि किशोरों और उनके परिजनों की काउंसिलिंग कराई जाए। शुक्रवार को उनकी काउंसिलिंग कराई गई। परिजनों ने बच्चों को समझाया, तब जाकर मामला शांत हुआ।
परिजनों का आरोप है कि संप्रेक्षण गृह में किशोरों को घटिया खाना दिया जा रहा है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि बच्चों से गलती हो गई, जिसको उन्होंने स्वीकार किया। किशोरों की कुछ शर्तें है, जिनको प्रशासनिक अफसरों को मान लेना चाहिए। संप्रेक्षण गृह की शिफ्टिंग पर प्रशासनिक अधिकारी एक बार विचार कर ले।
जांच करने पहुंचे न्यायाधीश
संप्रेक्षण गृह में हुए बवाल की जांच करने सीजेएम संजय सिंह, किशोर बोर्ड की मजिस्ट्रेट श्वेता चौधरी और एडीजे बिजेंद्र सिंह टीम के साथ पहुंचे। बाल सदन की व्यवस्था देखकर वह संप्रेक्षण गृह में पहुंचे। किशोरों से बात कर बवाल होने का कारण पूछा। किशोरों ने संप्रेक्षण गृह की कमियां गिनवाईं। संयुक्त टीम ने किशोरों को शांति बनाए रखने की बात कही।
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सूरजकुंड स्थित संप्रेक्षण गृह में किशोरों के बवाल करने के मामले में एसएसपी मेरठ जे. रविंदर गौड़ ने कहा कि किशोरों पर शिकंजा कसने का सारा काम प्रशासनिक अधिकारियों का है। इस मामले में आईजी सुजीत पांडेय ने कहा प्रशासन को छोड़ो, पुलिस अपना काम करे।
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संप्रेक्षण गृह से भागने वाले किशोरों को पकड़ने का काम पुलिस का है। तीन दिन बाद मामला शांत हुआ है। पुलिस अब पहले से तैयारी कर ले कि किशोर अगर बवाल करे तो उन्हें कैसे काबू किया जाए। आईजी ने कहा कि किशोर रोजाना पथराव करते है। जिसमें पुलिस के साथ लोग घायल होते है। स्थानीय लोग दहशत में है, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की है।
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परिजन बुलाकर कराई किशोरों की काउंसिलिंग
किशोरों के सामने बेबस प्रशासन ने बवाल शांत करने के लिए शुक्रवार किशोरों के परिजनों को बुलाया। किशोरों की काउंसिलिंग कराई। उधर, किशोर से मामले की जानकारी लेने और बवाल की जांच करने सीजेएम, किशोर बोर्ड मजिस्ट्रेट और एडीजे पहुंचे।
संप्रेक्षण गृह में बवाल शांत न होने पर बृहस्पतिवार को प्रशासनिक अफसरों की मीटिंग हुई थी। इसमें सहमति बनी कि किशोरों और उनके परिजनों की काउंसिलिंग कराई जाए। शुक्रवार को उनकी काउंसिलिंग कराई गई। परिजनों ने बच्चों को समझाया, तब जाकर मामला शांत हुआ।
परिजनों का आरोप है कि संप्रेक्षण गृह में किशोरों को घटिया खाना दिया जा रहा है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि बच्चों से गलती हो गई, जिसको उन्होंने स्वीकार किया। किशोरों की कुछ शर्तें है, जिनको प्रशासनिक अफसरों को मान लेना चाहिए। संप्रेक्षण गृह की शिफ्टिंग पर प्रशासनिक अधिकारी एक बार विचार कर ले।
जांच करने पहुंचे न्यायाधीश
संप्रेक्षण गृह में हुए बवाल की जांच करने सीजेएम संजय सिंह, किशोर बोर्ड की मजिस्ट्रेट श्वेता चौधरी और एडीजे बिजेंद्र सिंह टीम के साथ पहुंचे। बाल सदन की व्यवस्था देखकर वह संप्रेक्षण गृह में पहुंचे। किशोरों से बात कर बवाल होने का कारण पूछा। किशोरों ने संप्रेक्षण गृह की कमियां गिनवाईं। संयुक्त टीम ने किशोरों को शांति बनाए रखने की बात कही।