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सेल्स टैक्स के टारगेट पर शहर के ‘नटवरलाल’
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Thu, 29 Sep 2016 02:46 PM IST
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वाणिज्य कर विभाग के टारगेट पर शहर के ‘नटवरलाल’ हैं। फॉर्म 38 का इस्तेमाल करने वाले व्यापारियों पर नजर रखी जा रही है। टिन नंबर के आधार पर व्यावसायिक व स्थाई जगह का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। यह कवायद फर्जी तरीके से टिन नंबर हासिल कर विभाग को करीब चार करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले नटवरलाल का मामला सामने आने के बाद की जा रही है। आरोपी ने 2012 से 2016 के बीच में फर्जी दस्तावेज पर तीन फर्म खड़ी कर दीं और विभाग को भनक तक नहीं लगी।
फर्जी तरीके से टिन नंबर लेकर चार साल तक कारोबार करने के मामले को विभाग बड़ी नाकामी मान रहा है। क्योंकि नियम के तहत अगर कोई व्यक्ति टिन नंबर जनरेट करता है तो उसका उसका भौतिक सत्यापन किया जाता है। टिन नंबर लेते वक्त व्यापारी ने जो दस्तावेज लगाये हैं, उनके हिसाब से व्यावसायिक प्रतिष्ठान व स्थाई पते का सत्यापन किया जाना चाहिए। विभाग की लापरवाही के कारण ही राहुल कुमार जैन से लेकर गुप्ता व अग्रवाल बनकर कारोबारी ने करोड़ों की चपत लगाई। ऐसे में अब सैकड़ों व्यापारी चिह्नित किए गए हैं, जो दूसरे प्रदेश से सामान मंगाने के लिए फार्म - 38 का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ये टैक्स इनवायस या सेल इनवायस में अपना कारोबार बेहद छोटी धनराशि का दिखा रहे हैं। विनोद कुमार सिंह एडिशनल कमिश्नर ग्रेड -2 का कहना है कि अब सारा मामला खंडों में भेज दिया गया है, जिसके बाद खंड स्तर पर पूरा रिकार्ड खंगाला जा रहा है। वहां के अधिकारी ऐसी फर्मों की जांच करेंगे। संभावना है कि ऐसी और भी फर्म पकड़ में आ सकती हैं। क्योंकि जिस सफाई से तीन फर्मों को संचालित करने के लिए टिन नंबर हासिल किया गया, उससे पता चलता है कि उसे कुछ बिल्डरों का भी सहयोग मिल रहा है।
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फर्जी तरीके से टिन नंबर लेकर चार साल तक कारोबार करने के मामले को विभाग बड़ी नाकामी मान रहा है। क्योंकि नियम के तहत अगर कोई व्यक्ति टिन नंबर जनरेट करता है तो उसका उसका भौतिक सत्यापन किया जाता है। टिन नंबर लेते वक्त व्यापारी ने जो दस्तावेज लगाये हैं, उनके हिसाब से व्यावसायिक प्रतिष्ठान व स्थाई पते का सत्यापन किया जाना चाहिए। विभाग की लापरवाही के कारण ही राहुल कुमार जैन से लेकर गुप्ता व अग्रवाल बनकर कारोबारी ने करोड़ों की चपत लगाई। ऐसे में अब सैकड़ों व्यापारी चिह्नित किए गए हैं, जो दूसरे प्रदेश से सामान मंगाने के लिए फार्म - 38 का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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ये टैक्स इनवायस या सेल इनवायस में अपना कारोबार बेहद छोटी धनराशि का दिखा रहे हैं। विनोद कुमार सिंह एडिशनल कमिश्नर ग्रेड -2 का कहना है कि अब सारा मामला खंडों में भेज दिया गया है, जिसके बाद खंड स्तर पर पूरा रिकार्ड खंगाला जा रहा है। वहां के अधिकारी ऐसी फर्मों की जांच करेंगे। संभावना है कि ऐसी और भी फर्म पकड़ में आ सकती हैं। क्योंकि जिस सफाई से तीन फर्मों को संचालित करने के लिए टिन नंबर हासिल किया गया, उससे पता चलता है कि उसे कुछ बिल्डरों का भी सहयोग मिल रहा है।
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