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सेल टैक्स और एमडीए को 500 करोड़ का फटका
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sun, 25 Sep 2016 02:19 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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गगनचुंबी इमारतें खड़ी कर शहर के विभिन्न बिल्डरों ने सेल टैक्स और मेरठ विकास प्राधिकरण को 500 करोड़ का चूना लगा रखा है। केवल एक कालोनी में ही 60 करोड़ की टैक्स चोरी सामने आई है, जबकि हाल यह है कि दर्जनों कालोनियों में यही खेल है। खास तौर पर एक्सटेंशन कालोनियों में कालोनाइजरों ने न केवल अनुमति से ज्यादा आवास बनाए हैं, बल्कि वाणिज्य कर विभाग से भी यह स्थिति छुपाई है। अब आंकलन शुरू हो गया है।
यह है करोड़ों का खेल
शहर में नित नई कालोनियों का विकास हो रहा है। लगभग 150 कालोनियां ऐसी हैं, जो एमडीए से मानचित्र स्वीकृत कराकर डेवलप हुई हैं या की जा रही हैं। लेकिन इनमें से अनेक कालोनियों में अनुमति से कहीं ज्यादा आवास बनाए जा रहे हैं। बिजली बंबा बाईपास पर तीन कालोनियां ऐसी हैं, जहां अनुमति से ज्यादा भवन बने हैं। एक कालोनी में तो दो टावर ही अतिरिक्त बना दिए गए हैं।
इसके अलावा एनएच 58 पर आधा दर्जन से ज्यादा कालोनियों में यह खेल हुआ। गढ़ रोड, मवाना रोड की कालोनियों में भी यही स्थिति है। इससे जहां एमडीए को विभिन्न शुल्कों का चूना लगा है, तो वाणिज्य कर की भी तगड़ी चोरी हुई है। केवल द्वारिका धाम में ही सेल टैक्स की टीम ने 60 करोड़ का आंकलन किया है, जबकि शहर में ऐसी दर्जनों कालोनियां हैं। अब सेल टैक्स के अलावा एमडीए ने भी इस पर काम शुरू कर दिया है।
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जीएसटी से पहले तैयारी
दरअसल वित्तीय वर्ष 2017-18 से जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) को लागू किये जाने की तैयारी है, लेकिन उससे पहले सेल्स टैक्स विभाग हरकत में आ गया है। बिना पैन कार्ड के चल रही फर्मों के टिन नंबर ब्लॉक किये जा रहे हैं।
वहीं टैक्स इनवॉयस की जांच की जा रही है, ताकि उन जाली कंपनियों पर शिकंजा कसा जा सके जो अवैध तरीके से संचालित की जा रही हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा बिल्डर और उनसे जुड़े कारोबारी विभाग के रडार पर हैं। जिनकी फाइलों को खंगाला जा रहा है और भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। 60 करोड़ से ऊपर की टैक्स चोरी का मामला पकड़े जाने के बाद विभाग गदगद है। जल्द ही और बिल्डरों की फाइलों को खंगाला जाएगा।
अन्य कंपनियां भी फल-फूल रहीं
सेल टैक्स विभाग को इनपुट मिला है कि बिल्डरों के सहारे कुछ फर्जी कंपनियां भी फलफूल रही हैं। सेनेटरी गुड्स, आयरन स्टील, इलेक्ट्रिकल गुड्स के साथ ही भवन तैयार होने में इस्तेमाल होने वाली अन्य तरह की सामग्री व्यापक पैमाने पर मेरठ से दूसरे जिलों एवं राज्यों को भेजी जा रही है। जिन फर्मों के बिल व टैक्स इनवॉयस नंबर पर सामान भेजा जा रहा है, वो फर्म धोखाधड़ी एवं जालसाजी के जरिये सेल्स टैक्स में पंजीकृत कराई गई हैं।
खास बात यह है कि ऐसी फर्में सालों से चल रही हैं, लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया। अब सचल दल के माध्यम से जांच की गई, तो पता चला कि ऐसी कंपनियों के पास सिर्फ एक कमरा है, वह भी किराए का। एसकेजी कंस्ट्रक्शन नाम से जागृति विहार स्थित एक मकान के पते पर चल रही ऐसी ही फर्म का खुलासा हो चुका है। वहीं चार फर्में और सामने आ रही हैं, जो फर्जी तरीके से डॉक्यूमेंट तैयार कर पंजीकृत कराई गई हैं। इन फर्मों के नाम पर करोड़ों का कारोबार हुआ, लेकिन विभाग को किसी भी तरह का टैक्स नहीं दिया गया।
टैक्स नहीं दे रहीं कंपनियां
एडिशनल कमिश्नर वाणिज्य कर विनोद कुमार सिंह (ग्रेड- 2) का कहना है कि किसी भी बिल्डिंग टावर या कॉलोनी को बनाने के लिए ईंट, सीमेंट, सरिया के अलावा अन्य तरह के सामान की जरूरत होती है। एक फ्लैट में दो लाख का सामान लग जाता है। इनमें से अधिकांश आइटम टैक्स के दायरे में आते हैं। कुछ कंपनियां इन पर टैक्स अदा नहीं कर रही हैं। जिन फर्मों से खरीदा जा रहा है, न वो टैक्स दे रही हैं और न बिल्डर। साथ ही कई कॉलोनियों में अवैध कंस्ट्रक्शन हो रहा है, जिसका टैक्स विभाग को नहीं दिया गया है।
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यह है करोड़ों का खेल
शहर में नित नई कालोनियों का विकास हो रहा है। लगभग 150 कालोनियां ऐसी हैं, जो एमडीए से मानचित्र स्वीकृत कराकर डेवलप हुई हैं या की जा रही हैं। लेकिन इनमें से अनेक कालोनियों में अनुमति से कहीं ज्यादा आवास बनाए जा रहे हैं। बिजली बंबा बाईपास पर तीन कालोनियां ऐसी हैं, जहां अनुमति से ज्यादा भवन बने हैं। एक कालोनी में तो दो टावर ही अतिरिक्त बना दिए गए हैं।
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इसके अलावा एनएच 58 पर आधा दर्जन से ज्यादा कालोनियों में यह खेल हुआ। गढ़ रोड, मवाना रोड की कालोनियों में भी यही स्थिति है। इससे जहां एमडीए को विभिन्न शुल्कों का चूना लगा है, तो वाणिज्य कर की भी तगड़ी चोरी हुई है। केवल द्वारिका धाम में ही सेल टैक्स की टीम ने 60 करोड़ का आंकलन किया है, जबकि शहर में ऐसी दर्जनों कालोनियां हैं। अब सेल टैक्स के अलावा एमडीए ने भी इस पर काम शुरू कर दिया है।
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जीएसटी से पहले तैयारी
दरअसल वित्तीय वर्ष 2017-18 से जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) को लागू किये जाने की तैयारी है, लेकिन उससे पहले सेल्स टैक्स विभाग हरकत में आ गया है। बिना पैन कार्ड के चल रही फर्मों के टिन नंबर ब्लॉक किये जा रहे हैं।
वहीं टैक्स इनवॉयस की जांच की जा रही है, ताकि उन जाली कंपनियों पर शिकंजा कसा जा सके जो अवैध तरीके से संचालित की जा रही हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा बिल्डर और उनसे जुड़े कारोबारी विभाग के रडार पर हैं। जिनकी फाइलों को खंगाला जा रहा है और भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। 60 करोड़ से ऊपर की टैक्स चोरी का मामला पकड़े जाने के बाद विभाग गदगद है। जल्द ही और बिल्डरों की फाइलों को खंगाला जाएगा।
अन्य कंपनियां भी फल-फूल रहीं
सेल टैक्स विभाग को इनपुट मिला है कि बिल्डरों के सहारे कुछ फर्जी कंपनियां भी फलफूल रही हैं। सेनेटरी गुड्स, आयरन स्टील, इलेक्ट्रिकल गुड्स के साथ ही भवन तैयार होने में इस्तेमाल होने वाली अन्य तरह की सामग्री व्यापक पैमाने पर मेरठ से दूसरे जिलों एवं राज्यों को भेजी जा रही है। जिन फर्मों के बिल व टैक्स इनवॉयस नंबर पर सामान भेजा जा रहा है, वो फर्म धोखाधड़ी एवं जालसाजी के जरिये सेल्स टैक्स में पंजीकृत कराई गई हैं।
खास बात यह है कि ऐसी फर्में सालों से चल रही हैं, लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया। अब सचल दल के माध्यम से जांच की गई, तो पता चला कि ऐसी कंपनियों के पास सिर्फ एक कमरा है, वह भी किराए का। एसकेजी कंस्ट्रक्शन नाम से जागृति विहार स्थित एक मकान के पते पर चल रही ऐसी ही फर्म का खुलासा हो चुका है। वहीं चार फर्में और सामने आ रही हैं, जो फर्जी तरीके से डॉक्यूमेंट तैयार कर पंजीकृत कराई गई हैं। इन फर्मों के नाम पर करोड़ों का कारोबार हुआ, लेकिन विभाग को किसी भी तरह का टैक्स नहीं दिया गया।
टैक्स नहीं दे रहीं कंपनियां
एडिशनल कमिश्नर वाणिज्य कर विनोद कुमार सिंह (ग्रेड- 2) का कहना है कि किसी भी बिल्डिंग टावर या कॉलोनी को बनाने के लिए ईंट, सीमेंट, सरिया के अलावा अन्य तरह के सामान की जरूरत होती है। एक फ्लैट में दो लाख का सामान लग जाता है। इनमें से अधिकांश आइटम टैक्स के दायरे में आते हैं। कुछ कंपनियां इन पर टैक्स अदा नहीं कर रही हैं। जिन फर्मों से खरीदा जा रहा है, न वो टैक्स दे रही हैं और न बिल्डर। साथ ही कई कॉलोनियों में अवैध कंस्ट्रक्शन हो रहा है, जिसका टैक्स विभाग को नहीं दिया गया है।