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जहर या जीवन... आप तय करें
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Sun, 05 Jun 2016 02:00 AM IST
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प्रदूषण फैलाती कार।
- फोटो : अमर उजाला
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शहर की आबोहवा ‘जहरीली’ होती जा रही है। पिछले पांच सालों में 50 प्रतिशत तक प्रदूषण बढ़ा है। अगर समय रहते हम लोग नहीं चेते तो परिणाम बेहद गंभीर होंगे। शहर में बेगमपुल और केसरगंज की हवा सबसे ज्यादा दूषित है। डीजल की गाड़ियों से सबसे ज्यादा प्रदूषण बढ़ रहा है।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से शहर में विभिन्न स्थानों पर प्रदूषण की जांच की जाती है। शहर में हर महीने लिए जा रहे नमूनों में चौंकाने वाली बात सामने आई है। वातावरण में आरएसपीएम (रेसपरेबल सस्पेडिंड पॉर्टिकुलेट मैटर ) की मात्रा बढ़ रही है। 2011 में आरएसपीएम की मात्रा 124.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से बढ़कर जून 2015 में 174.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार इसका सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। बेगमपुल और केसरगंज में स्थिति सर्वाधिक खराब है। बढ़ते प्रदूषण की चपेट में शहर जकड़ा जा रहा है। डीजल वाहनों की अधिकता इसका प्रमुख कारण है।
सांस के बढ़ते मरीज प्रदूषण की वजह
विशेषज्ञों की मानें तो वायु प्रदूषण के कारण शहर में सांस के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड के ऑफिसर योगेंद्र कुमार और सहायक वैज्ञानिक पवन मिश्रा ने बताया कि आरएसपीएम की मात्रा अधिंक होने से सबसे अधिक सांस संबंधी रोग बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सांस लेते समय वातावरण में घुले प्रदूषण के कण फेफड़ों में चले जाते हैं। फेफड़ों में पहुंच कर ये वहीं जम जाते हैं, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। कैंसर जैसी बीमारी भी हो सकती है।
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वर्जन
वायु प्रदूषण कम करने के लिए पुराने डीजल वाहनों का प्रयोग बंद करने का प्रयास एनजीटी ने किया है। हमारी ओर से भी इस संबंध में समय-समय पर प्रशासन को पत्र लिखकर अवगत कराया जाता है। लोगों के जागरूक होने से ही समस्या का निदान संभव है। - अतुलेश यादव, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
बेगमपुल पर आंकड़ों की स्थिति
वर्ष - आरएसपीएम
2011 - 124.3
2012 - 130.0
2013 - 140.0
2014 - 162 .8
2015 - 174.2
2016 186.7
(आंकडे़ माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में हैं)
केसरगंज पर प्रदूषण की स्थिति
वर्ष आरएसपीएम
2011 90.9
2012 110.7
2013 118.9
2014 123.5
2015 128.1
2016 136.8
(आंकडे़ माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में हैं)
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से शहर में विभिन्न स्थानों पर प्रदूषण की जांच की जाती है। शहर में हर महीने लिए जा रहे नमूनों में चौंकाने वाली बात सामने आई है। वातावरण में आरएसपीएम (रेसपरेबल सस्पेडिंड पॉर्टिकुलेट मैटर ) की मात्रा बढ़ रही है। 2011 में आरएसपीएम की मात्रा 124.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से बढ़कर जून 2015 में 174.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार इसका सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। बेगमपुल और केसरगंज में स्थिति सर्वाधिक खराब है। बढ़ते प्रदूषण की चपेट में शहर जकड़ा जा रहा है। डीजल वाहनों की अधिकता इसका प्रमुख कारण है।
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सांस के बढ़ते मरीज प्रदूषण की वजह
विशेषज्ञों की मानें तो वायु प्रदूषण के कारण शहर में सांस के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड के ऑफिसर योगेंद्र कुमार और सहायक वैज्ञानिक पवन मिश्रा ने बताया कि आरएसपीएम की मात्रा अधिंक होने से सबसे अधिक सांस संबंधी रोग बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सांस लेते समय वातावरण में घुले प्रदूषण के कण फेफड़ों में चले जाते हैं। फेफड़ों में पहुंच कर ये वहीं जम जाते हैं, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। कैंसर जैसी बीमारी भी हो सकती है।
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वायु प्रदूषण कम करने के लिए पुराने डीजल वाहनों का प्रयोग बंद करने का प्रयास एनजीटी ने किया है। हमारी ओर से भी इस संबंध में समय-समय पर प्रशासन को पत्र लिखकर अवगत कराया जाता है। लोगों के जागरूक होने से ही समस्या का निदान संभव है। - अतुलेश यादव, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
बेगमपुल पर आंकड़ों की स्थिति
वर्ष - आरएसपीएम
2011 - 124.3
2012 - 130.0
2013 - 140.0
2014 - 162 .8
2015 - 174.2
2016 186.7
(आंकडे़ माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में हैं)
केसरगंज पर प्रदूषण की स्थिति
वर्ष आरएसपीएम
2011 90.9
2012 110.7
2013 118.9
2014 123.5
2015 128.1
2016 136.8
(आंकडे़ माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में हैं)