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पीएम का दौरा, मंशा पश्चिम का इतिहास दोहराने की
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 May 2016 01:41 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहारनपुर दौरे के सियासी मायने खूब हैं। केंद्र सरकार के दो साल पूरे होने पर पश्चिम के सहारनपुर को चुनने की वजह उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव भी हैं। दरअसल, लोकसभा चुनाव में पश्चिम में पहले चरण में चुनाव हुए थे। मेरठ, बागपत, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों से भाजपा को भारी बढ़त मिलने की चर्चा पूरे प्रदेश में अगले चरणों तक पहुंच गई।
नतीजा यह रहा कि भाजपा ने प्रदेश में भारी सफलता हासिल की। संभव है कि भाजपा के बड़े नेताओं ने इस बार भी सियासी दौड़ में आगे रहने की मंशा के चलते कुछ ऐसी ही तैयारी विधानसभा चुनाव के लिए भी की हो। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2017 में होने हैं।
सपा और बसपा ने अपने प्रत्याशी तक घोषित कर दिए हैं। चुनावी तैयारियों में भाजपा अभी ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाई है। यह माना जा रहा था कि पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के बाद भाजपा के दिग्गज नेता उत्तर प्रदेश पर पूरा ध्यान लगाएंगे। ऐसे में प्रधानमंत्री का दौरा तो कहीं ज्यादा अहम है। पिछले लोकसभा चुनाव में दंगों के बाद ध्रुवीकरण के दौर में भाजपा की लहर रही थी। जाट लैंड में चौ. अजित सिंह तक को बागपत से अपनी सीट गंवानी पड़ी थी।
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उस समय नरेंद्र मोदी ने चुनावी रण का एलान मेरठ से किया था। मोदी के दौरे के बाद भाजपा की तैयारियों में नयी जान आ गई थी। मोदी की रैली में उमड़ी भीड़ ने दूसरे दलों को बहुत पीछे छोड़ दिया था। अब नरेंद्र मोदी बेशक सीधे चुनावी रैली के अंदाज में बेशक न हों, लेकिन पार्टी की मंशा मोदी के नाम पर विधानसभा चुनाव की तैयारियों में दूसरों से आगे खड़ा होने की हो सकती है।
खूब उठाया था गन्ना और बिजली का मुद्दा
लोकसभा चुनाव से पहले मेरठ में हुई रैली में प्रधानमंत्री पद के दावेदार रहे नरेंद्र मोदी ने पश्चिम के लोगों की नब्ज को थामने की खूब कोशिश की थी। उन्होंने गन्ना किसानों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था तो बिजली संकट को लेकर भी प्रदेश सरकार को घेरा था।
उन्होंने चौधरी चरण सिंह का नाम लेकर किसानों को लुभाने की कोशिश भी की थी। इसके अलावा मेरठ सहित आसपास के जिलों के स्वाधीनता संग्राम से रिश्तों को याद कर भावनात्मक तौर पर जोड़ने की कोशिश की थी।
इस बार भी गन्ना भुगतान को लेकर किसान संगठन प्रदेश सरकार से मांग कर रहे हैं। अभी मिलों पर काफी बकाया है। ऐसे में प्रधानमंत्री के प्रदेश सरकार पर किए गए वार चुनावी तैयारी में लाभ पहुंचा सकते हैं। मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि यह पश्चिम के लिए सम्मान की बात है कि प्रधानमंत्री सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर यहां के जिले में आएंगे।
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नतीजा यह रहा कि भाजपा ने प्रदेश में भारी सफलता हासिल की। संभव है कि भाजपा के बड़े नेताओं ने इस बार भी सियासी दौड़ में आगे रहने की मंशा के चलते कुछ ऐसी ही तैयारी विधानसभा चुनाव के लिए भी की हो। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2017 में होने हैं।
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सपा और बसपा ने अपने प्रत्याशी तक घोषित कर दिए हैं। चुनावी तैयारियों में भाजपा अभी ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाई है। यह माना जा रहा था कि पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के बाद भाजपा के दिग्गज नेता उत्तर प्रदेश पर पूरा ध्यान लगाएंगे। ऐसे में प्रधानमंत्री का दौरा तो कहीं ज्यादा अहम है। पिछले लोकसभा चुनाव में दंगों के बाद ध्रुवीकरण के दौर में भाजपा की लहर रही थी। जाट लैंड में चौ. अजित सिंह तक को बागपत से अपनी सीट गंवानी पड़ी थी।
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उस समय नरेंद्र मोदी ने चुनावी रण का एलान मेरठ से किया था। मोदी के दौरे के बाद भाजपा की तैयारियों में नयी जान आ गई थी। मोदी की रैली में उमड़ी भीड़ ने दूसरे दलों को बहुत पीछे छोड़ दिया था। अब नरेंद्र मोदी बेशक सीधे चुनावी रैली के अंदाज में बेशक न हों, लेकिन पार्टी की मंशा मोदी के नाम पर विधानसभा चुनाव की तैयारियों में दूसरों से आगे खड़ा होने की हो सकती है।
खूब उठाया था गन्ना और बिजली का मुद्दा
लोकसभा चुनाव से पहले मेरठ में हुई रैली में प्रधानमंत्री पद के दावेदार रहे नरेंद्र मोदी ने पश्चिम के लोगों की नब्ज को थामने की खूब कोशिश की थी। उन्होंने गन्ना किसानों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था तो बिजली संकट को लेकर भी प्रदेश सरकार को घेरा था।
उन्होंने चौधरी चरण सिंह का नाम लेकर किसानों को लुभाने की कोशिश भी की थी। इसके अलावा मेरठ सहित आसपास के जिलों के स्वाधीनता संग्राम से रिश्तों को याद कर भावनात्मक तौर पर जोड़ने की कोशिश की थी।
इस बार भी गन्ना भुगतान को लेकर किसान संगठन प्रदेश सरकार से मांग कर रहे हैं। अभी मिलों पर काफी बकाया है। ऐसे में प्रधानमंत्री के प्रदेश सरकार पर किए गए वार चुनावी तैयारी में लाभ पहुंचा सकते हैं। मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि यह पश्चिम के लिए सम्मान की बात है कि प्रधानमंत्री सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर यहां के जिले में आएंगे।