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स्वर्णा बनीं लाडली: पारुल और अन्नु रानी ने सोने से लिखी कहानी, गांव में जश्न, अक्तूबर में मनी दीपावली

Wed, 04 Oct 2023 10:42 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 04 Oct 2023 10:42 AM IST
सार

Asian Games: मेरठ की बेटी पारुल चौधरी का चीन में जलवा बरकरार है। पारुल चौधरी ने  मंगलवार को स्वर्ण पदक झटका है। पारुल के बाद अन्नू ने भी भाला फेंक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। दोनों बेटियों के गांव में जश्न का माहौल है। परिवार में अक्तूबर माह में ही दीपावली जैसा उल्लास है।

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Parul and Annu Rani creats history with gold in Asian games, celebration like Diwali in village
अन्नू रानी व पारुल चौधरी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

क्रांतिधरा मेरठ और खेल का नाता मंगलवार को स्वर्णिम ऊंचाई पर पहुंच गया। एशियाड में भाला फेंक में अन्नु रानी और पांच हजार मीटर दौड़ में पारुल चौधरी ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पारुल का 24 घंटे में यह दूसरा पदक है। बेटियों की कामयाबी से मेरठ के लोग गौरवान्वित हैं। चीन से लेकर अन्नु के गांव बहादरपुर और पारुल के गांव इकलौता में जश्न का माहौल है। बेटियों के नाम से दीपक जलाए गए। शहरवासियों ने भी विजेता बेटियों को बधाई दी

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चीन के हांगझोऊ में आयोजित एशियन गेम्स में स्टीपल चेज में रजत जीतने के बाद मंगलवार को दौड़ में स्वर्ण पदक दिलाने वाली एथलीट बेटी पारुल चौधरी का सफर गांव की चकरोड से शुरू हुआ था। यहां तक पहुंचने के लिए पारुल ने कड़ा संघर्ष किया। 24 घंटे में दो पदक जीतकर चीन में इतिहास रच दिया। वह अभ्यास करने साइकिल और फिर ऑटो से स्टेडियम जाती थीं। 
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दौराला के इकलौता गांव निवासी कृष्णपाल सिंह ने बताया कि बेटी ने देश का नाम रोशन करते हुए हमारा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। ये दोहरी खुशी किसी सपने के सच होने जैसी है। पारुल ने इसी वर्ष केरल में आयोजित स्टीपल चेज में गोल्ड मेडल जीता था। एशियन चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। एशियन गेम्स से पहले वह पेरिस ओलंपिक 2024 का कोटा भी ले चुकी हैं। पारुल चौधरी प्राथमिक प्रशिक्षण कैलाश प्रकाश स्टेडियम में लिया है। 
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पारुल चौधरी - फोटो : अमर उजाला

उनके कोच गौरव त्यागी ने बताया कि पारुल ने दो माह पहले ही थाइलैंड के बैंकाक में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। 2018 एशियन गेम्स में भी पारुल पदक जीत चुकी हैं। पारुल दो बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। 

मंगलवार को जैसे ही पारुल चौधरी के स्वर्ण पदक जीतने की खबर कैलाश प्रकाश स्टेडियम पहुंची तो वहां अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। पारुल के साथ अभ्यास करने वाले साथी खिलाड़ियों ने स्टेडियम में मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की। इकलौता गांव के प्रधान जान धनकड़ का कहना है कि पारुल ने देश का नाम रोशन किया है। देर रात तक पारुल के घर जश्न का माहौल था। सभी झूम रहे थे। 

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पारुल चौधरी की मां और परिवार के अन्य सदस्य। - फोटो : अमर उजाला

मां बोलीं, बेटी ने किया गर्व से सिर ऊंचा
बेटी की इस कामयाबी पर मां राजेश देवी की आंखें भर आईं। उन्होंने बताया कि उन्होंने शुरू से ही बेटों और बेटियों में कोई अंतर नहीं समझा। पिता कृष्णपाल व उन्होंने बच्चों को अच्छी परवरिश दी और हमेशा देश का नाम रोशन करने की सीख दी। आज उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है, जिसने उनके साथ देश का नाम भी रोशन किया। उन्होंने दूसरे अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वह भी बेटियों को आगे बढ़ने दें।

बोले पिता, बेटी की मेहनत लाई रंग
पिता कृष्णपाल का कहना है कि इस दिन के लिए बेटी ने कड़ा अभ्यास किया। उसकी मेहनत रंग लाई। अब उन्हें उस दिन का इंतजार है जब उनकी बेटी ओलंपिक में देश के लिए सोना लेकर आएगी। उन्हें यकीन है कि पारुल यह कर दिखाएगी। अच्छा लगता है कि जब बच्चे कामयाब हो जाते हैं। उनका कहना है कि वैसे तो बच्चों को पिता के नाम से जाना जाता है, लेकिन उस समय सिर गर्व से और ऊंचा हो जाता है जब पिता को उनके बच्चों के नाम से पहचाना जाता है।

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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विद्यालय का नाम रोशन कर दिया 
शिक्षक सहदेव सिंह ने बताया कि पारुल चौधरी ने कक्षा छह से कक्षा 12 तक की पढ़ाई बीपी इंटर कॉलेज भराला में की है। मैंने पारुल को हिंदी का विषय पढ़ाया है। आज मुझे गर्व की मेरे द्वारा पढ़ाई गई छात्रा देश का नाम रोशन कर रही है। पारुल ने रजत पदक के बाद मंगलवार को सोना जीतकर कॉलेज का नाम भी रोशन किया है।

इकलौता गांव के पूर्व प्रधान राजपाल शर्मा ने बताया कि आज का दिन ऐतिहासिक है। आज दो बेटियों ने देश के लिए सोना जीता है। पारुल ने पदक जीतकर गांव की बेटियों को भी प्रेरित किया है। पारुल को शुरू से ही जीत की भूख थी। मंगलवार को सोना जीतकर उसने ओलंपिक के लिए भी उम्मीद बढ़ा दी है। पूरे गांव में जश्न का माहौल है। सभी लोग बस उसी की बातें कर रहे हैं। 

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Annu Rani - फोटो : Amar Ujala

एशियाड की महिलाओं की भाला-फेंक स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली अन्नु रानी के लिए एक वक्त ऐसा भी था जब उनके पिता उन्हें डेढ़ लाख रुपये का भाला दिलाने में असमर्थ थे। अन्नु को पहला भाला 2500 रुपये में दिलाया गया था। इसके बाद अन्नु ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कामयाबी हासिल की। गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ उनका सफर स्वर्णिम रहा है। 

मंगलवार को सोने का तमगा जीतने के बाद वीडियो कॉल पर जब अन्नु ने अपनी मां मुन्नी देवी और भाई उपेंद्र को गोल्ड मेडल जीतने की जानकारी दी तो बेटी की उपलब्धि पर मां के आंसू छलक पड़े। गांव बहादरपुर और उनके परिवार में जश्न का माहौल है। पिता ने कहा उनकी बेटी ने पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

किसान अमरपाल सिंह के घर 28 अगस्त 1992 को जन्मीं अन्नु रानी पांच बहन-भाइयों में सबसे छोटी है। अमरपाल सिंह ने बताया उनका भतीजा लाल बहादुर व बेटा उपेंद्र अच्छे धावक रहे हैं। वह खुद शॉटपुट खिलाड़ी रह चुके हैं। पिता की प्रेरणा से अन्नु रानी ने खेल के मैदान पर कदम रखा। वह गांव की चकरोड और दबथुआ कॉलेज में अभ्यास करती थीं। शुरुआत में भाला फेंक के साथ गोला फेंक और चक्का फेंक में अभ्यास करती थीं।

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Parul and Annu Rani creats history with gold in Asian games, celebration like Diwali in village
Annu Rani Family - फोटो : Amar Ujala

खेल बदला तो बदल गई जिंदगी
गुरुकुल प्रभात आश्रम के स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने उन्हें 2010 में डिस्कस व गोला फेंक के बजाए भाला फेंक पर फोकस करने की सलाह दी। खेल बदलते ही अन्नु रानी की जिंदगी बदल गई। अभी तक वह भाला फेंक में देश के लिए कई पदक जीत चुकी हैं। 

एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पारुल चौधरी और अन्नु रानी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, महान कि्रकेटर सचिन तेंदुलकर, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक्स (पहले ट्वीटर) पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। इनके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और राष्ट्रीय जाट महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित जाखड़ आदि ने भी बधाई दी है।

पारुल और अन्नु ने मेरठ और देश का मान बढ़ा दिया है। दोनों बेटियों का बहुत-बहुत अभिनंदन। दोनों परिवारों की तपस्या ने पूरी दुनिया में नाम रोशन करा दिया। दोनों बेटियों को ढेरों शुभकामनाएं। 
-राजेंद्र अग्रवाल, सांसद

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