सजग रहेंगे तो नहीं होंगे साइबर क्राइम का शिकार, रखें सिस्टम की पूरी जानकारी
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सिस्टम की अधूरी जानकारी और लापरवाही से लोग साइबर क्राइम का शिकार बन रहे हैं। विभाग के पास ऐसे मामलों की भरमार है, जिसमें छोटी सी लापरवाही ने खाताधारक को लाखों का चूना लगा दिया। हालांकि काफी मामलों में साइबर सेल रिकवरी कराने में सफल रहा। अधिकारियों का कहना है कि अगर लोग सूझबूझ से काम लें तो साइबर क्राइम का शिकार होने से बचा जा सकता है।
ठगी पर अंकुश लगाएगा एप
डेबिट और क्रेडिट कार्ड से ठगी के मामले अधिक रहे हैं। हाल ही में बैंकों ने इसका हल निकालने का प्रयास कर कुछ एप लांच किए, जिनकी मदद से खाता धारक अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड को कहीं से भी लॉक कर सकेगा। एसबीआई, एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक ने अपने खाताधारकों को फिलहाल यह सुविधा प्रदान की है।
केस 1
मेरठ में थाना सदर बाजार क्षेत्र में एक प्रोफेसर के खाते से वर्ष 2017 में 12 लाख रुपया निकाला गया। प्रोफेसर की शिकायत पर साइबर सेल की जांच में शुरू से ही एक महिला इस मामले में शक के दायरे में रही जो अक्सर प्रोफेसर के बैंक खाते को लेकर बातचीत करती थी। लेकिन प्रोफेसर को शक नहीं हो सका।
अगर प्रोफेसर गंभीरता दिखाते तो ठगी का शिकार होने से बच सकते थे। इस महिला ने साजिश के तहत प्रोफेसर के खाते से रजिस्टर्ड फोन नंबर बदलवाकर इस गोरखधंधे को अंजाम दिया। महिला को गिरफ्तार कर प्रोफेसर के रुपयों की रिकवरी की गई।
केस 2
कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में वर्ष 2016 में सोशल मीडिया का रोचक मामला सामने आया था। यहां ऑनलाइन दोस्ती करने के बाद एक विदेशी महिला ने 27 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कराये। विदेशी बीज की ट्रेडिंग करने के युवक को सपने दिखाए। ठगी के शिकार युवक ने साइबर सेल से शिकायत की।
जांच में नाइजीरियाई गिरोह के सक्रिय होने के संकेत मिले। साइबर सेल ने करीब दो माह की मशक्कत के बाद इस गिरोह का पर्दाफाश कर मेरठ में रहने वाले चार सहयोगियों को पकड़कर 27 लाख की रिकवरी कराने में सफलता पाई।
यह सजगता ही बचाएगी आपको
फोन पर कभी भी किसी को बैंक खाते की जानकारी न दें। बैंक से कभी भी इस तरह की कॉल नहीं की जाती हैं।
कॉल करने वाला खुद को कुछ भी बताए, अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड का नंबर और पासवर्ड बिल्कुल न बताएं।
इस तरह की कॉल आए तो ध्यान न दें, जरूरी हो तो सीधे अपनी बैंक शाखा से संपर्क करें।
एटीएम से नकदी निकालते समय सावधानी बरतें, किसी को अंदर मौजूद न रहने दें।
ऑनलाइन सामान केवल भरोसेमंद कंपनियों से खरीदें।
किसी भी ठगी की स्थिति में तत्काल पुलिस और बैंक को सूचित करें।
चार साल में रिकवरी
| वर्ष | मामले | ठगी | रिकवरी |
| 2015 | 120 | 9.73 लाख | 4.98 लाख |
| 2016 | 240 | 13.15 लाख | 8.70 लाख |
| 2017 | 350 | 30.14 लाख | 23.49 लाख |
| 2018 | 511 | 38 लाख | 27.41 लाख |
शार्टकट के चक्कर से बचें
ऑनलाइन ठगी के काफी मामलों में खाताधारक सूझ-बूझ से बच सकते थे। लेकिन शार्टकट के चक्कर में वह ठगे गए। कोशिश रहती है कि रकम पूरी रिकवर की जाए। - सतपाल सिंह, एएसपी कैंट/सीओ क्राइम
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