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एनआरएचएम के खेल में हर दिन हुआ भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Mar 2017 02:18 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) की जांच कर रही सीबीआई टीम भी कई मामलों की तह तक नहीं पहुंच पाई। क्योंकि भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड का एक हिस्सा गायब कर दिया गया, जिसमें कई बड़े खिलाड़ी शामिल थे। ‘अमर उजाला’ के हाथ लगा साल 2008-09 रिकॉर्ड बता रहा है कि एनआरएचएम में खेल करने में चिकित्सक ही नहीं, बल्कि बाबू भी शामिल थे। हालांकि ये बात अलग है कि जेल सिर्फ चिकित्सकों को जाना पड़ा। क्योंकि बाबुओं ने खेल से जुड़ा अहम रिकॉर्ड सीबीआई के सामने प्रस्तुत ही नहीं किया। जबकि यह रिकॉर्ड बता रहा है कि चुनिंदा बाबुओं ने अपने नाम पर जमकर चेक काटे।
स्वास्थ्य विभाग के एसबीआई एकाउंट नंबर 30157993697 से किए गए 294 भुगतानों की लिस्ट ‘अमर उजाला’ के पास है, जो बता रही है कि बाबू एनआरएचएम में बड़े खिलाड़ी रहे। सरकारी धन की किस तरह से बंदरबांट हुई, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आरसीएच मेले का खर्च जहां रिकॉर्ड में कुछ जगहों पर 12-15 हजार रुपये दिखाकर भुगतान किया गया, तो वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले 19 मार्च 2009 को उसी मेले का खर्च 50 हजार रुपये दिखाकर भुगतान हुआ। जो रिकॉर्ड में बाबू निशांत बंसल के नाम पर दर्ज है। जबकि इससे पूर्व निशांत बंसल ने 21 जनवरी 2009 को 20 हजार, 23 जनवरी 2009 को 13 हजार रुपये का खर्च दिखाकर भुगतान किया।
हर दिन चला भुगतान का सिलसिला
रिकॉर्ड कई मामलों में बड़े घोटाले की तरफ इशारा करता है। जहां एक तरह के आयोजन पर अलग-अलग एमाउंट में भुगतान किया गया, तो वहीं स्वास्थ्य विभाग के कुछ चुनिंदा बाबुओं और सहायक शोध अधिकारी के नाम पर ही हर दिन भुगतान होता रहा। इसका एक बड़ा उदाहरण रिकॉर्ड की एंट्री नंबर 199 और 200 पर दर्ज आरसीएचम मेले के भुगतान से मिल जाएगा। दोनों ही एंट्री से सहायक शोध अधिकारी वीके गुप्ता को 21 और 22 जनवरी को भुगतान किया गया। 21 जनवरी 2009 को मेले आयोजन पर खर्च के तौर पर 5000 और अगली तिथि 22 जनवरी को 20 हजार मेले के नाम पर चेक से भुगतान किया गया। यानी एंट्री बता रही है कि साल 2009 में 21 जनवरी का आखिरी और 22 जनवरी का पहले भुगतान वीके गुप्ता के नाम पर किया गया। अगर आयोजन एक ही तरह का था, तो उसका भुगतान अलग किस्त में क्यों किया गया। दोनों ही भुगतान एक चेक के अंदर क्यों नहीं किए गए। जाहिर है कि बाबुओं को भुगतान करने से पहले बस तिथि बदलने का इंतजार था, जो अब रिकॉर्ड से साफ हो जाता है।
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वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले बड़े भुगतान
एनआरएचएम के पैसे को ठिकाने लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले बड़े भुगतान किए। आरसीएच मेले का आयोजन पर अपनी जेब से पैसा खर्च दिखाकर कर्मचारी के नाम पर चेक काटे गए जिनका रिकॉर्ड एंट्री नंबर 274, 275 और 276 पर दर्ज है। इसके अतिरिक्त कंपनियों को भी मोटा भुगतान किया गया।
19 जनवरी 2009 का भुगतान
निशांत बंसल - 50 हजार रुपये
बब्बन शुक्ला - 55 हजार रुपये
राजकुमार - 45 हजार रुपये
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स्वास्थ्य विभाग के एसबीआई एकाउंट नंबर 30157993697 से किए गए 294 भुगतानों की लिस्ट ‘अमर उजाला’ के पास है, जो बता रही है कि बाबू एनआरएचएम में बड़े खिलाड़ी रहे। सरकारी धन की किस तरह से बंदरबांट हुई, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आरसीएच मेले का खर्च जहां रिकॉर्ड में कुछ जगहों पर 12-15 हजार रुपये दिखाकर भुगतान किया गया, तो वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले 19 मार्च 2009 को उसी मेले का खर्च 50 हजार रुपये दिखाकर भुगतान हुआ। जो रिकॉर्ड में बाबू निशांत बंसल के नाम पर दर्ज है। जबकि इससे पूर्व निशांत बंसल ने 21 जनवरी 2009 को 20 हजार, 23 जनवरी 2009 को 13 हजार रुपये का खर्च दिखाकर भुगतान किया।
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हर दिन चला भुगतान का सिलसिला
रिकॉर्ड कई मामलों में बड़े घोटाले की तरफ इशारा करता है। जहां एक तरह के आयोजन पर अलग-अलग एमाउंट में भुगतान किया गया, तो वहीं स्वास्थ्य विभाग के कुछ चुनिंदा बाबुओं और सहायक शोध अधिकारी के नाम पर ही हर दिन भुगतान होता रहा। इसका एक बड़ा उदाहरण रिकॉर्ड की एंट्री नंबर 199 और 200 पर दर्ज आरसीएचम मेले के भुगतान से मिल जाएगा। दोनों ही एंट्री से सहायक शोध अधिकारी वीके गुप्ता को 21 और 22 जनवरी को भुगतान किया गया। 21 जनवरी 2009 को मेले आयोजन पर खर्च के तौर पर 5000 और अगली तिथि 22 जनवरी को 20 हजार मेले के नाम पर चेक से भुगतान किया गया। यानी एंट्री बता रही है कि साल 2009 में 21 जनवरी का आखिरी और 22 जनवरी का पहले भुगतान वीके गुप्ता के नाम पर किया गया। अगर आयोजन एक ही तरह का था, तो उसका भुगतान अलग किस्त में क्यों किया गया। दोनों ही भुगतान एक चेक के अंदर क्यों नहीं किए गए। जाहिर है कि बाबुओं को भुगतान करने से पहले बस तिथि बदलने का इंतजार था, जो अब रिकॉर्ड से साफ हो जाता है।
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वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले बड़े भुगतान
एनआरएचएम के पैसे को ठिकाने लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले बड़े भुगतान किए। आरसीएच मेले का आयोजन पर अपनी जेब से पैसा खर्च दिखाकर कर्मचारी के नाम पर चेक काटे गए जिनका रिकॉर्ड एंट्री नंबर 274, 275 और 276 पर दर्ज है। इसके अतिरिक्त कंपनियों को भी मोटा भुगतान किया गया।
19 जनवरी 2009 का भुगतान
निशांत बंसल - 50 हजार रुपये
बब्बन शुक्ला - 55 हजार रुपये
राजकुमार - 45 हजार रुपये