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अब तो कोरिया भी हमसे डरती है : दीपिका
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 17 Oct 2015 02:07 AM IST
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इसी साल वर्ल्ड चैंपियनशिप में टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर ओलंपिक का कोटा हासिल करने वाली अर्जुन अवार्डी दीपिका कुमारी बताती हैं कि तीरंदाजी में भारतीय टीम लगातार बेहतर कर रही है। अब भारत के तीरंदाजों के बाणों से कोरिया की टीम भी डरती है।
रांची निवासी दीपिका का कहना है कि देश में तीरंदाजों को बेहतर सुविधाएं दी जानी चाहिए। उन्हें सही डाइट दी जानी चाहिए। प्रदेश स्तर पर तीरंदाजों को सुविधाओं के अभाव में संघर्ष करना पड़ता है। ओलंपिक खेलने के अनुभव के बारे में दीपिका बताती हैं कि मैं खुश तो जरूर थी। लेकिन, उस पल को इंज्वॉय नहीं कर पाई।
पता ही नहीं चला कि क्या हो रहा है। दीपिका ने कहा कि हमें विदेशी कोच की कोई जरूरत नहीं है। देश में ही कई अच्छे कोच हैं। इन्हीं कोचों ने तीरंदाजों की फौज तैयार की है। परिवार के बारे में दीपिका बताती हैं कि पिता टेंपो ड्राइवर है और माता नर्स हैं। विदेश वातावरण के बारे में दीपिका ने कहा कि भारत से विदेशों का वातावरण बिल्कुल अलग होता है। वहां हवा अगले पल कहां से चलेगी, पता ही नहीं होता। लेकिन ये माइंड गेम है। लक्ष्य पर ध्यान हो तो, कहीं पर भी निशाना लगाया जा सकता है।
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रांची निवासी दीपिका का कहना है कि देश में तीरंदाजों को बेहतर सुविधाएं दी जानी चाहिए। उन्हें सही डाइट दी जानी चाहिए। प्रदेश स्तर पर तीरंदाजों को सुविधाओं के अभाव में संघर्ष करना पड़ता है। ओलंपिक खेलने के अनुभव के बारे में दीपिका बताती हैं कि मैं खुश तो जरूर थी। लेकिन, उस पल को इंज्वॉय नहीं कर पाई।
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पता ही नहीं चला कि क्या हो रहा है। दीपिका ने कहा कि हमें विदेशी कोच की कोई जरूरत नहीं है। देश में ही कई अच्छे कोच हैं। इन्हीं कोचों ने तीरंदाजों की फौज तैयार की है। परिवार के बारे में दीपिका बताती हैं कि पिता टेंपो ड्राइवर है और माता नर्स हैं। विदेश वातावरण के बारे में दीपिका ने कहा कि भारत से विदेशों का वातावरण बिल्कुल अलग होता है। वहां हवा अगले पल कहां से चलेगी, पता ही नहीं होता। लेकिन ये माइंड गेम है। लक्ष्य पर ध्यान हो तो, कहीं पर भी निशाना लगाया जा सकता है।
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