मुजफ्फरनगर थर्ड क्वालिटी का शहर है... मैं यहां नहीं रह सकती
अच्छा जीवन जीने के लिए अच्छा शहर भी मायने रखता है। मंगलवार को पुलिस ऑफिस में एक ऐसा मामला पहुंचा, जिसमें एक शहर में अच्छी सुविधाएं न होने के कारण पति-पत्नी के रिश्ते में दरार आ गई।
असिस्टेंट प्रोफेसर पत्नी का कहना है कि मुजफ्फरनगर थर्ड क्वालिटी का शहर है, वह यहां नहीं रह सकती। इसके अच्छा है कि वह जिंदगी मेरठ में अपने पिता के घर गुजार दे। इस बात को लेकर मायके और ससुराल पक्ष में घंटों विवाद चला। विवाहिता ने कहा कि वो मुजफ्फरनगर छोड़कर देहरादून, रुड़की, हरिद्वार में रह सकती है।
मंगलवार को यह विवाद पुलिस अफसरों तक पहुंच गया। असिस्टेंट प्रोफेसर युवती अपने पिता के साथ तो डॉक्टर भी परिजनों और भाकियू पदाधिकारियों के साथ एसएसपी ऑफिस पहुंच गया। दोनों पक्षों में पहले महिला थाने में उसके बाद एसएसपी ऑफिस में तीखी नोंकझोंक हुई। सास, ससुर और भाकियू नेताओं के समझाने के बाद भी विवाहिता मुजफ्फरनगर में रहने को तैयार नहीं हुई।
शादी के समय क्यों नहीं देखा
भाकियू नेताओं ने युवती के दरोगा पिता से कहा कि बेटी की शादी के समय शहर क्यों नहीं देखा। युवक के पिता किसान हैं। दिन-रात गन्ने छीलकर बेटे को डॉक्टर बनाया है। इस पर दरोगा ने कहा कि मैं तो कलम चलाता हूं। मेरी बेटी दिक्कतों के बीच नहीं रह सकती।
मुकदमा दर्ज कराया तो देंगे धरना
बघरा ब्लॉक के भाकियू उपाध्यक्ष राकेश सिंह, अमरजीत सिंह, सन्नी प्रधान, विनय फौजी, नवाब सिंह आदि डॉक्टर के साथ थे। उन्होंने कहा कि वह दोनों पक्षों में समझौता कराना चाहते हैं, ताकि परिवार न बिगड़े। अगर दरोगा ने रौब गालिब करने की कोशिश की या डॉक्टर पर मुकदमा दर्ज कराया तो यहीं पर धरना दिया जाएगा।
भाकियू पदाधिकारी युवक के परिजनों के साथ थे। दंपती में मुजफ्फरनगर में रहने को लेकर विवाद है। दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप लगा रहे थे। मामले को परिवार परामर्श केंद्र में सुलझाने के निर्देश दिए गए हैं। -रामअर्ज, एसपी क्राइम