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मेरठ की हवा दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित, एनजीटी ने डीएम से दो सप्ताह में मांगा जवाब

Wed, 01 Mar 2017 10:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Wed, 01 Mar 2017 10:02 AM IST
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 more pollution in meerut campare to delhi
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

शहर के भीतर संचालित बस अड्डों पर एनजीटी ने गंभीर रुख अपनाया है। आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना की याचिका स्वीकार करते हुए एनजीटी ने डीएम सहित सभी संबंधित विभागों और शासन से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। लोकेश खुराना ने शहर की आबादी के बीच बस स्टैंड होने और डीजल चालित बसों के कारण प्रदूषण फैलने का हवाला देते हुए महायोजना 2021 के प्रस्ताव को भी कोर्ट में प्रस्तुत किया है। इस याचिका में सीएसई के आंकड़ों को भी सामने रखा गया, जिसमें कहा गया कि मेरठ की हवा दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित हो चुकी है।

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ये है मामला
लोकेश खुराना ने कई माह पूर्व पर्यावरण मंत्रालय, चीफ सेक्र्रेटरी यूपी, डीएम मेरठ, आरएम रोडवेज, वीसी एमडीए और नगरायुक्त को नोटिस भेजा था। जिसमें भैसाली और सोहराब गेट बस अड्डों को शहर से बाहर करने की मांग की थी। लोकेश खुराना ने आरटीआई में प्राप्त जवाबों के आधार पर यह नोटिस जारी किया। लेकिन किसी ने भी इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। जिस पर पिछले सप्ताह लोकेश खुराना ने एनजीटी में याचिका दायर की, जिस पर मंगलवार को सुनवाई के बाद एनजीटी ने डीएम मेरठ सहित 11 अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि मेरठ दिल्ली से महज 60 किमी दूर है। लेकिन यहां की हवा बेहद खराब है। मेरठ में दूसरे राज्यों से 10 से 15 वर्ष पुराने डीजल और पेट्रोल वाहन आ रहे हैं, इन पर रोक के साथ बस अड्डे शहर से बाहर किए जाएं।
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ये हैं सीएसई के आंकड़े
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट की रिपोर्ट के आधार पर याचिका में कहा गया कि पर्टिकुलेट मैटर (हवा में मौजूद धूल के बारीक कण) 2.5 की स्थिति दिल्ली के मुकाबले मेरठ में बदतर है। मेरठ में पीएम 2.5 अपने सामान्य मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बजाए 1470 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। वहीं, नवंबर 2016 से जनवरी 2017 तक मेरठ में पीएम 2.5 सामान्य मानक से 10 गुना ज्यादा दर्ज किया गया है।
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65 साल में शहर के भीतर आ गया बस अड्डा
लोकेश खुराना ने बताया कि भैसाली बस अड्डा 1952 और सोहराब गेट बस अड्डा 1978 में स्थापित हुआ था। तब ये दोनों अड्डे शहर के बाहर थे। लेकिन आबादी बढ़ने के साथ शहर का विस्तार होता गया और इस समय दोनों बस अड्डे शहर के मध्य आ चुके हैं। आरटीआई में परिवहन विभाग ने जो जानकारी दी है, उसके अनुसार प्रतिदिन शहर में 1243 बसें आती-जाती हैं और सभी बसें डीजल से चलने वाली हैं।

ये है बस अड्डों की स्थिति
भैसाली बस अड्डा 11671 वर्ग मीटर और इसकी वर्कशॉप 13480 वर्ग मीटर में है। जबकि सोहराब गेट डिपो का क्षेत्रफल 4954 मीटर तथा वर्कशॉप 12733 वर्गमीटर में है। भैसाली अड्डे पर प्रतिदिन औसतन 60 हजार यात्री आते और जाते हैं और दैनिक आय लगभग 30 लाख रुपये हैं, जबकि सोहराब गेट डिपो पर करीब 12 हजार यात्री आते हैं और आय प्रतिदिन 18 लाख रुपये है।

महायोजना 2021 में बाहर जाना था प्रस्तावित
एमडीए ने शहर के विकास के लिए 2006 में महायोजना 2021 तैयार की थी। जिसमें 2021 तक शहर के इन सभी बस अड्डों को बाहर करने का भी प्रस्ताव था। लेकिन आज तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ। हालांकि एमडीए ने भी आरटीआई में जो जवाब दिया है, उसके अनुसार शहर के सभी बाह्य मार्गों दिल्ली रोड़, रुड़की रोड, मवाना रोड़, हापुड़ रोड, गढ़ रोड और परीक्षितगढ़ मार्ग पर बस अड्डों के लिए जमीन के प्रस्ताव रखे हुए हैं। लेकिन इन प्रस्तावों पर अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।


ये मांगा है जवाब
एनजीटी के चेयरमैन स्वतंत्र कुमार, न्यायिक सदस्य रघुवेंद्र सिंह राठौर और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अजय ए देशपांडे की बेंच ने खुराना की याचिका पर सुनवाई की। जिस पर उन्होंने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय यूपी सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एमडीए और उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम सहित 11 प्रतिवादियों से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। इसमें एनजीटी ने अब तक बस अड्डाें को बाहर क्यों नहीं किया? अब तक क्या प्रयास किए गए? बस अड्डे बाहर करने में क्या दिक्कत है? कब तक बाहर करने की योजना है? प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए गए है? आदि बिंदुओं पर जवाब मांगा है।

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