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मिड-डे मील में धांधली पर सख्त कार्रवाई, अब बच्चों को स्कूल में मिलेंगे फल
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Updated Sun, 08 Jan 2017 05:28 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बच्चों को बासी भोजन परोसे जाने के मामले में जिला प्रशासन ने मिड-डे मील वितरित कर रहे छह एनजीओ पर रोक लगा दी है। जिसके बाद नगर क्षेत्र के करीब 250 विद्यालयों में बच्चों को मिड डे मील नहीं मिल पा रहा है। जबकि मिड-डे मील के नाम पर खाते में करीब डेढ़ करोड़ रुपया पड़ा हुआ है। ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन ने एक विकल्प निकाला है कि जब तक एनजीओ को चयन नहीं हो जाता है तब तक बच्चों को बिस्किट और फल वितरित किए जाएं। वहीं एनजीओ के खिलाफ कार्रवाई कर उनका पैसा भी काटे जाने की तैयारी है।
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प्राइमरी, जूनियर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यालय में आठवीं कक्षा तक के छात्रों को मिड-डे मील दिया जाता है। शहरी क्षेत्र में छह एनजीओ भोजन बनाने का काम कर रहे थे, लेकिन कुछ महीने पहले चार एनजीओ का अनियमितता के कारण रिन्यूअल नहीं किया गया था। उसके बाद भी चारों एनजीओ भोजन देने का काम करते रहे। हालांकि जिला प्रशासन के आदेश पर इन एनजीओ को खाद्यान्न उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था, लेकिन पुराने स्टॉक के आधार पर वे भोजन देते रहे। उनको उम्मीद थी कि उन्हें टेंडर मिल जायेगा या फिर बीते साल दी गई परमिशन का एक्सटेंशन हो जाएगा। शासन ने व्यवस्था की थी कि बच्चों को हफ्ते में दो दिन रोटी, दाल और और दो दिन फल दिए जाएं। लेकिन महीनों तक एनजीओ रोटी देने से किनारा करते रहे। सीडीओ विशाख जी. ने मामले में नाराजगी जताई तो एनजीओ ने रोटियां देना शुरू कर दिया, लेकिन भोजन की क्वालिटी काफी खराब थी। सभी एनजीओ गाजियाबाद स्थित डासना से रोटियां लेकर आते थे और उन्हें बच्चों को खिलाते रहे। जबकि विद्यालयों तक पहुंचते-पहुंचते रोटियां बासी हो जाती थीं। इतना ही निर्धारित खाद्यान्न की मात्रा से कम ही रोटियां दी जाती थीं। अमर उजाला ने 14 दिसंबर के अंक में ‘भविष्य’ की थाली में बासी रोटी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद प्रशासन ने सभी छह एनजीओ पर रोक दी।
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फल और बिस्किट दिए जाएंगे
ताजा आदेश में कहा गया है कि खाद्यान्न पर होने वाला खर्च और भोजन को बनाने में आने वाले खर्च को जोड़कर विद्यालयों को बिस्किट व फल उपलब्ध कराएं जाएं। अभी तक 4.30 रुपये प्राइमरी और 6.18 रुपये अपर प्राइमरी में प्रति छात्र खाना बनाने का खर्च एनजीओ को दिया जाता है, जिसका इस्तेमाल अब फल व बिस्किट बांटने में किया जाएगा।
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