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कल से वक्री होंगे बुध, प्राकृतिक आपदा के योग

Wed, 17 Jun 2020 01:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jun 2020 01:27 AM IST
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Mercury will be retroactive from tomorrow, the sum of natural disaster
कल से वक्री होंगे बुध, प्राकृतिक आपदा के योग
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मेरठ। ज्योतिष के अनुसार मई से जून माह के बीच 6 ग्रह वक्री होने हैं। 11 मई को शनि, 13 मई को शुक्र और 14 मई को गुरु वक्री हुए। राहु, केतु तो हमेशा ही उल्टी चाल चलते हैं। अब 18 जून को सुबह 10:25 बजे से बुध ग्रह संवत्सर 2077 के राजा भी अपनी स्व राशि मिथुन में वक्री हो जाएंगे। यह परिवर्तन मेष, सिंह, मिथुन और कन्या राशि के लिए बहुत अच्छा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब ग्रह वक्री होते हैं तो उनका व्यवहार उग्र हो जाता है। शनि 29 सितंबर तक वक्री चाल ही चलेंगे। ऐसे में प्राकृतिक आपदा, भूकंप, तूफान, दुर्घटना में जान-माल की हानि भी आशंका है।
मंगल का राशि परिवर्तन
मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल 18 जून को मीन राशि में प्रवेश करेगा। यह कर्क, सिंह, मीन, कन्या राशि के लिए अच्छा नहीं होगा। मकर और कुंभ के लिए सामान्य स्थिति रहेगी। ऐसे हालातों में समाज में लड़ाई झगड़े बढ़ेंगे।
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ग्रहों की वक्री और मार्गी गति
आचार्य कौशल वत्स के अनुसार, ज्योतिषशास्त्र में 9 ग्रहों में सिर्फ सूर्य और चंद्रमा कभी वक्री नहीं होते। जबकि दो ग्रह राहु और केतु कभी मार्गी यानी सीधी चाल नहीं चलते हैं। अन्य 5 ग्रह समय-समय पर उलटी और सीधी यानी वक्री और मार्गी चाल से चलते रहते हैं।
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वक्री ग्रह बनाते हैं जीवट
आचार्य भारत भूषण के अनुसार, कुंडली में ग्रहों का वक्री होना सामान्य रूप से अच्छा नहीं माना जाता है। इससे ग्रहों का शुभ प्रभाव और उनके परिणाम मिलने में कमी आ जाती है। ऐसे लोग जिनकी कुंडली में उग्र ग्रह मंगल, शनि, वक्री होते हैं, बहुत ही जीवट होते हैं। इनमें संघर्ष करने की क्षमता आ जाती है।

ज्योतिष विज्ञान में वक्री का अर्थ
सभी ग्रह घड़ी की सुई की विपरीत दशा में सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। कभी-कभी इनकी गति विपरीत दिशा में अर्थात पश्चिम से पूर्व प्रतीत होती है, उसे ग्रह की वक्री अवस्था कहते हैं। हालांकि कोई भी ग्रह कभी भी पीछे की ओर नहीं चलता यह भ्रम मात्र है। घूमती हुई पृथ्वी से ग्रह की दूरी तथा पृथ्वी और उस ग्रह की अपनी गति के अंतर के कारण ग्रहों का उलटा चलना प्रतीत होता है।
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