{"_id":"4322b0939bb2f5fdaf3bb6805e36fe99","slug":"meerut-news-hindi-news-95","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वच्छता प्रमाण पत्र लेने में छूटेंगे पसीने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वच्छता प्रमाण पत्र लेने में छूटेंगे पसीने
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
Updated Wed, 10 Feb 2016 01:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ईंट भट्ठा उद्योग संचालन के लिए पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र लेने की प्रक्रिया भले ही शासन के बजाए जिला स्तर पर आ गई हो, लेकिन यह प्रक्रिया अभी भी उतनी आसान नहीं है, जितना भट्ठा मालिक समझ रहे हैं।
आवेदन के साथ औपचारिकता पूरा करना भी आसान नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ईंट भट्ठा संचालन के लिए पर्यावरण विभाग से स्वच्छता प्रमाण पत्र की अनिवार्यता कर दी गई है। जिसके चलते पांच माह से ईंट भट्ठे बंद हैं।
लगातार आंदोलन से केंद्र सरकार ने जिला स्तर पर ही प्रमाण पत्र जारी करने का शासनादेश जारी किया। इसमें जिला स्तर पर गठित कमेटियों और औपचारिकताओं के बारे में पूरा उल्लेख किया गया।
विज्ञापन
ऐसे गठित होंगी दो कमेटियां
पहली कमेटी जिला विशेषज्ञ आंकलन समिति (डीईएसी) में सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिशासी अभियंता, वन विभाग एसडीओ, भूगर्भ जल विभाग के प्रतिनिधि, सीएमओ, जिपं के अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि, पर्यावरण विभाग के एडीओ, प्रदूषण विभाग के एई, पीडब्लूडी के सीनियर सहायक अभियंता, जिला खनन अधिकारी और आयुक्त द्वारा नामित कोई स्वयंसेवी या सामाजिक संगठन का प्रतिनिधि जो पर्यावरण के लिए करीब 10 वर्षों से काम कर रहा हो, शामिल होंगे।
इस समिति से प्रस्ताव मंजूर होकर अंतिम स्वीकृति के लिए जिला पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (डीईआईएए) के पास जाएगा। समिति के अध्यक्ष डीएम और एडीएम (एफ) या एसडीएम इसके सचिव होंगे।
जबकि डीएफओ और आयुक्त द्वारा नामित एक अन्य प्रतिनिधि सदस्य होगा। यह कमेटी एनओसी जारी करेगी।
ऐसे होगा आवेदन
खास बात यह कि ईंट भट्ठा मालिक स्वयं आवेदन नहीं कर सकते हैं। बल्कि उन्हें पर्यावरण विभाग में केंद्र से मान्यता प्राप्त किसी सलाहकार के माध्यम से ही आवेदन कराना होगा।
भट्ठा मालिकों ने दो सलाहकारों से पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली तो बताया गया कि प्रमाणपत्र मिलने में दो माह से ज्यादा समय लगेगा।
भट्टों पर आ चुकी है लेबर
ईंट भट्टा मालिक एक बार फिर फंस गये हैं। जिलों में करीब 240 भट्ठों पर अधिकांश पर लेबर आ चुकी है। जिन्हें दो से चार लाख रुपये रुपये प्रति भट्ठा मालिक एडवांस दे चुका है।
चूंकि भट्ठे सिर्फ जून माह तक ही चल सकते हैं। ऐसे में एनओसी के फेर में नया झटका लगा है। वहीं शासनादेश मिलते ही कुछ भट्ठों के चलने की सूचना पर ग्राम खिवाई, थिरोट, सलाहपुर, बातनौर, फलावदा और सिखैड़ा गांवाें के छापामारी की गई।
16 को बनेगी रणनीति
मंगलवार को समिति पदाधिकारियों ने एडीएम (एफआर) गौरव वर्मा और एसडीएम सदर रवीश गुप्ता से बात की। भट्टा मालिकों ने मांग रखी कि भट्टा संचालन में बहुत कम समय है।
ऐसे में उन्हें आवेदन के साथ ही भट्टा चलाने की अनुमति और टैक्स व रायल्टी दरों में छूट दी जाये। लेकिन अधिकारियों ने इंकार कर दिया। भट्टा मालिकों ने चेतावनी दी कि अब 16 को आईआईए भवन में आम सभा में रणनीति तैयार होगी। इस मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट जाने के साथ ही कलक्ट्रेट पर मजदूरों के साथ बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
इस दौरान केपी सिंह, पवन मित्तल, सतीश गुप्ता, जयकरण गुप्ता, संजय गोदावरी, हाजी राशिद आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
आवेदन के साथ औपचारिकता पूरा करना भी आसान नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ईंट भट्ठा संचालन के लिए पर्यावरण विभाग से स्वच्छता प्रमाण पत्र की अनिवार्यता कर दी गई है। जिसके चलते पांच माह से ईंट भट्ठे बंद हैं।
विज्ञापन
लगातार आंदोलन से केंद्र सरकार ने जिला स्तर पर ही प्रमाण पत्र जारी करने का शासनादेश जारी किया। इसमें जिला स्तर पर गठित कमेटियों और औपचारिकताओं के बारे में पूरा उल्लेख किया गया।
विज्ञापन
ऐसे गठित होंगी दो कमेटियां
पहली कमेटी जिला विशेषज्ञ आंकलन समिति (डीईएसी) में सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिशासी अभियंता, वन विभाग एसडीओ, भूगर्भ जल विभाग के प्रतिनिधि, सीएमओ, जिपं के अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि, पर्यावरण विभाग के एडीओ, प्रदूषण विभाग के एई, पीडब्लूडी के सीनियर सहायक अभियंता, जिला खनन अधिकारी और आयुक्त द्वारा नामित कोई स्वयंसेवी या सामाजिक संगठन का प्रतिनिधि जो पर्यावरण के लिए करीब 10 वर्षों से काम कर रहा हो, शामिल होंगे।
इस समिति से प्रस्ताव मंजूर होकर अंतिम स्वीकृति के लिए जिला पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (डीईआईएए) के पास जाएगा। समिति के अध्यक्ष डीएम और एडीएम (एफ) या एसडीएम इसके सचिव होंगे।
जबकि डीएफओ और आयुक्त द्वारा नामित एक अन्य प्रतिनिधि सदस्य होगा। यह कमेटी एनओसी जारी करेगी।
ऐसे होगा आवेदन
खास बात यह कि ईंट भट्ठा मालिक स्वयं आवेदन नहीं कर सकते हैं। बल्कि उन्हें पर्यावरण विभाग में केंद्र से मान्यता प्राप्त किसी सलाहकार के माध्यम से ही आवेदन कराना होगा।
भट्ठा मालिकों ने दो सलाहकारों से पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली तो बताया गया कि प्रमाणपत्र मिलने में दो माह से ज्यादा समय लगेगा।
भट्टों पर आ चुकी है लेबर
ईंट भट्टा मालिक एक बार फिर फंस गये हैं। जिलों में करीब 240 भट्ठों पर अधिकांश पर लेबर आ चुकी है। जिन्हें दो से चार लाख रुपये रुपये प्रति भट्ठा मालिक एडवांस दे चुका है।
चूंकि भट्ठे सिर्फ जून माह तक ही चल सकते हैं। ऐसे में एनओसी के फेर में नया झटका लगा है। वहीं शासनादेश मिलते ही कुछ भट्ठों के चलने की सूचना पर ग्राम खिवाई, थिरोट, सलाहपुर, बातनौर, फलावदा और सिखैड़ा गांवाें के छापामारी की गई।
16 को बनेगी रणनीति
मंगलवार को समिति पदाधिकारियों ने एडीएम (एफआर) गौरव वर्मा और एसडीएम सदर रवीश गुप्ता से बात की। भट्टा मालिकों ने मांग रखी कि भट्टा संचालन में बहुत कम समय है।
ऐसे में उन्हें आवेदन के साथ ही भट्टा चलाने की अनुमति और टैक्स व रायल्टी दरों में छूट दी जाये। लेकिन अधिकारियों ने इंकार कर दिया। भट्टा मालिकों ने चेतावनी दी कि अब 16 को आईआईए भवन में आम सभा में रणनीति तैयार होगी। इस मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट जाने के साथ ही कलक्ट्रेट पर मजदूरों के साथ बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
इस दौरान केपी सिंह, पवन मित्तल, सतीश गुप्ता, जयकरण गुप्ता, संजय गोदावरी, हाजी राशिद आदि मौजूद रहे।