EXCLUSIVE: मेडिकल कॉलेज में बनेगी वेस्ट यूपी की प्रथम प्रयोगशाला, होगा मच्छरों पर शोध
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एक छोटा सा मच्छर हमें कभी भी कहीं भी काटकर गंभीर रूप से बीमार कर सकता है। डेंगू, चिकनगुनिया, फाइलेरिया, मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों से स्वास्थ्य विभाग अब नए तरीके से निपटेगा। लाखों रुपये का जहर पीकर भी जिंदा रहने वाले मच्छरों पर शोध कर बचाव के तरीके ढूंढे जाएंगे। इसके लिए मेडिकल कॉलेज स्थित अपर निदेशक कार्यालय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पहली लैब तैयार की जा रही है। इसके लिए कीट विज्ञानी डॉ. कीर्ति त्रिपाठी की नियुक्ति भी हो गई है।
बीमारियों से होगा बचाव
यहां साल 1991 के बाद से कोई कीट विज्ञानी नहीं था, जिस कारण यहां मच्छरों की जांच नहीं हो पाती थी। मच्छर को पकड़ने वाले कलेक्टर, असिस्टेंट टेक्नीशियन और ड्राइवर आदि अन्य स्टाफ की भी जल्द नियुक्ति की जाएगी। लैब में जांच की जाएगी कि किस क्षेत्र में ज्यादा मच्छर हैं, तो इसकी वजह क्या है। कौन सी प्रजाति के हैं। यह कौन सी बीमारी कितनी फैला सकते हैं। उनकी माइक्रोस्कोपिक जांच की जाएगी। फिर इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों को दी जाएगी, ताकि मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों से बचाव किया जा सके।
एक दिन में 70-80 लोग बन रहे निशाना
कीट विज्ञानी डॉ. कीर्ति त्रिपाठी बताती हैं कि अलग-अलग इलाकों में मच्छरों की अलग-अलग प्रजातियां हैं। यह मच्छर कई तरह के वायरस और पैरासाइट के जरिए कई तरह की बीमारियां तेजी से फैलाते हैं। मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इन्सेफेलाइटिस, फाइलेरिया और जीका इनमें से कुछ हैं। मच्छर बहुत तेजी से बढ़ते और काटते हैं। मच्छर खतरनाक इसलिए भी हैं क्योंकि इनकी आबादी बड़ी तेजी से बढ़ती है। मादा मच्छर की उम्र नर के मुकाबले ज्यादा होती है। मादा मच्छर दो से तीन बार अलग-अलग जगहों पर अंडे देती है। मादा एडीज एक बार में 50 से 100 अंडे देती है और एक दिन में 70 से 80 लोगों को काट सकती है।
कम तापमान में भी फैला रहे डेंगू
अमूमन माना जाता है कि डेंगू का मच्छर 18 से 38 डिग्री के बीच ही रह सकता है। इससे ज्यादा और कम तापमान में जिंदा नहीं रह सकता है, लेकिन अब 18 डिग्री से कम तापमान में भी मच्छर डेंगू फैला रहे हैं। यह कैसे हो रहा है, इस तरह की जांच की जा सकेगी।
मच्छर जनित बीमारियों का हाल
बीमारी 2016 2017 2018
डेंगू 195 660 202
चिकनगुनिया 1105 00 00
मादा मच्छर फैलाती है बीमारी
मच्छर एक हानिकारक कीट है। यह सभी भागों में पाया जाता है। यह विभिन्न प्रकार के रोगों के जीवाणुओं को वहन करता है। मच्छर एकलिंगी जंतु है। यानी नर और मादा मच्छर के शरीर अलग-अलग होते हैं। सिर्फ मादा मच्छर ही मनुष्य या अन्य जंतुओं के रक्त पीते हैं, जबकि नर मच्छर पेड़-पौधों का रस पीते हैं।
जल्द पूरी हो जाएगी लैब
मच्छरों की पड़ताल के लिए लैब तैयार की जा रही है। उम्मीद है कि यहां बेहतर तरीके से मच्छरों की पड़ताल की जा सकेगी। लैब तैयार होने के बाद विभाग बीमारी का पता लगाने के लिए मच्छरों को पकड़ेगा। मच्छरों में पाए जाने वाले जीवाणु की जानकारी की जाएगी। -डॉ. कीर्ति त्रिपाठी, कीट विज्ञानी
स्वास्थ्य विभाग को मिलेगा लाभ
मच्छर जनित बीमारियां काफी होती हैं, लिहाजा यहां कीट विज्ञानी की तैनाती की गई है, ताकि इनकी पड़ताल की जा सके। इससे स्वास्थ्य विभाग को काफी लाभ होगा। - डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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