{"_id":"5818dbe24f1c1bb9314366d5","slug":"meerut-ke-saath-kendra","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेरठ के साथ केंद्र-राज्य का स्मार्ट ‘खेल’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेरठ के साथ केंद्र-राज्य का स्मार्ट ‘खेल’
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Wed, 02 Nov 2016 01:38 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्मार्ट सिटी पर मेरठ के साथ केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही खेल कर रही हैं। जहां पहले अंकों के मामले में राज्य सरकार ने क्रांतिधरा को पीछे कर दिया था, वहीं अब केंद्र सरकार गाइड लाइन जारी करने में देरी कर रही है। इस कारण अधिकारी जनवरी में होने वाली बैठक की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।
केंद्र सरकार की तरफ से 40 शहरों के लिए स्मार्ट सिटी की गाइड लाइन जारी होनी है। ताकी कुछ बिंदुओं पर अपने प्रपोजल को अधिक मजबूत करके पहले दूसरे नंबर की लड़ाई में शामिल हो सके। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने शीघ्र ही सभी शहरों को नई गाइड लाइन जारी करने की बात कही थी, जो अभी तक नहीं मिल पायी है। बता दें कि मई-जून में सरकार से मिली गाइड लाइन पर कंसलटेंट को काम करने के लिए मात्र 15 दिन का समय मिला था। अगर इस बार भी केंद्र की ओर से देरी हुई तो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होने लाजिमी हैं।
20 सितंबर को हुई थी परीक्षा
20 सितंबर 2016 को देश भर के स्मार्ट शहरों की सूची दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने जारी की थी। जिसमें मेरठ का नाम नहीं था। उस समय यह तो घोषणा कर दी गई थी कि अब स्मार्ट शहरों की अंतिम परीक्षा जनवरी 2017 को होगी। इसके लिए शीघ्र नए सिरे से स्मार्ट सिटी का प्रपोजल तैयार करने और सभी बिंदुओं पर गंभीरता से काम करके अधिक से अधिक अंक पाने के लिए नई गाइड लाइन दी जानी थी। जो अभी तक नहीं मिल सकी है।
विज्ञापन
अब मेरठ के लिए नंबर की होगी लड़ाई
कंसलटेंट बीके पटेल की मानें तो मेरठ स्मार्ट शहरों की सूची में तो शामिल हो चुका है, लेकिन 100 शहरों में किस स्थान पर रहेगा, इसकी घोषणा होनी है। जनवरी में होने वाली 40 शहरों की अंतिम परीक्षा में मेरठ का प्रपोजल अपना स्थान तय करेगा। इसके लिए जैसे ही केंद्र और राज्य सरकार से गाइड लाइन आ जाएगी, उसी समय काम धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि अभी भी स्मार्ट सिटी में चयनित हुए शहरों के प्रपोजल के आधार पर हमारा भी कार्य चल रहा है। कंसलटेंट ने दो सप्ताह में गाइड लाइन मिलने का दावा भी किया है।
उप्र सरकार ने रखी थी धोखे की नींव
स्मार्ट सिटी मिशन में उप्र के 13 शहरों के चयन के लिए 29 जुलाई 2015 को केंद्र सरकार और राज्य सरकार के अधिकारियों की कमेटी ने लखनऊ में प्रजेंटेशन कार्यक्रम किया था। उप्र के 14 नगर निगम महापौर, नगरायुक्त, और 48 नगर पालिका अधिकारियों ने अपने अपने शहर की उपलब्धियां गिनायी थीं। प्रजेंटेशन में समिति ने प्रत्येक शहर को उनके कार्य के आधार पर अंक दिए थे। उसी दिन शाम के समय मीडिया और शासन को जारी विज्ञप्ति में मेरठ को 75 अंक देकर 13वें स्थान पर रखा था। लेकिन सूची से छेड़छाड़ की गई। रायबरेली के अंक भी 75 दर्शाकर उसे 13 ए और मेरठ को 13 बी स्थान दिया गया।
ऐसे चला स्मार्ट सिटी के लिए क्रम
- नगर निगम कार्यकारिणी और बोर्ड ने स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव पास करके, भरे थे संकल्प पत्र।
- 29 जुलाई 2015 को मेरठ की लखनऊ में मुख्य सचिव उप्र सरकार के सामने हुई थी प्रजेंटेशन।
- तीन सितंबर को दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में मेरठ का हुआ था प्रजेंटेशन।
- सितंबर में सीएम से मिले थे संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष नवीन गुप्ता।
- व्यापारी नेता और छात्रों ने सपा जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भेजा था राज्य सरकार को ज्ञापन।
- दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री से मिले थे सांसद, विधायक और महापौर।
- 15 जून 2016 से कंसलटेंट और निगम प्रशासन ने तैयार करना शुरू किया था स्मार्ट सिटी का प्रपोजल।
- 15 दिन तक नगर निगम का पूरा अमला, सामाजिक, व्यापारिक संगठन, भाजपा जनप्रतिनिधि और शहर की जनता ने त्योहार के रूप में की थी वोटिंग।
- शहर की जनता ने रात दिन देखा स्मार्ट सिटी का सपना।
- 28 जून 2016 को राज्य सरकार के सामने रखा गया था प्रपोजल।
- 30 जून 2016 को नगरायुक्त और कंसलटेंट ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में सौंपा था प्रपोजल।
- 20 सितंबर 2016 को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री ने फिर किया मेरठ के साथ धोखा।
- अब जनवरी का दिखाया जा रहा है सब्जबाग।
विज्ञापन
केंद्र सरकार की तरफ से 40 शहरों के लिए स्मार्ट सिटी की गाइड लाइन जारी होनी है। ताकी कुछ बिंदुओं पर अपने प्रपोजल को अधिक मजबूत करके पहले दूसरे नंबर की लड़ाई में शामिल हो सके। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने शीघ्र ही सभी शहरों को नई गाइड लाइन जारी करने की बात कही थी, जो अभी तक नहीं मिल पायी है। बता दें कि मई-जून में सरकार से मिली गाइड लाइन पर कंसलटेंट को काम करने के लिए मात्र 15 दिन का समय मिला था। अगर इस बार भी केंद्र की ओर से देरी हुई तो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होने लाजिमी हैं।
विज्ञापन
20 सितंबर को हुई थी परीक्षा
20 सितंबर 2016 को देश भर के स्मार्ट शहरों की सूची दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने जारी की थी। जिसमें मेरठ का नाम नहीं था। उस समय यह तो घोषणा कर दी गई थी कि अब स्मार्ट शहरों की अंतिम परीक्षा जनवरी 2017 को होगी। इसके लिए शीघ्र नए सिरे से स्मार्ट सिटी का प्रपोजल तैयार करने और सभी बिंदुओं पर गंभीरता से काम करके अधिक से अधिक अंक पाने के लिए नई गाइड लाइन दी जानी थी। जो अभी तक नहीं मिल सकी है।
विज्ञापन
अब मेरठ के लिए नंबर की होगी लड़ाई
कंसलटेंट बीके पटेल की मानें तो मेरठ स्मार्ट शहरों की सूची में तो शामिल हो चुका है, लेकिन 100 शहरों में किस स्थान पर रहेगा, इसकी घोषणा होनी है। जनवरी में होने वाली 40 शहरों की अंतिम परीक्षा में मेरठ का प्रपोजल अपना स्थान तय करेगा। इसके लिए जैसे ही केंद्र और राज्य सरकार से गाइड लाइन आ जाएगी, उसी समय काम धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि अभी भी स्मार्ट सिटी में चयनित हुए शहरों के प्रपोजल के आधार पर हमारा भी कार्य चल रहा है। कंसलटेंट ने दो सप्ताह में गाइड लाइन मिलने का दावा भी किया है।
उप्र सरकार ने रखी थी धोखे की नींव
स्मार्ट सिटी मिशन में उप्र के 13 शहरों के चयन के लिए 29 जुलाई 2015 को केंद्र सरकार और राज्य सरकार के अधिकारियों की कमेटी ने लखनऊ में प्रजेंटेशन कार्यक्रम किया था। उप्र के 14 नगर निगम महापौर, नगरायुक्त, और 48 नगर पालिका अधिकारियों ने अपने अपने शहर की उपलब्धियां गिनायी थीं। प्रजेंटेशन में समिति ने प्रत्येक शहर को उनके कार्य के आधार पर अंक दिए थे। उसी दिन शाम के समय मीडिया और शासन को जारी विज्ञप्ति में मेरठ को 75 अंक देकर 13वें स्थान पर रखा था। लेकिन सूची से छेड़छाड़ की गई। रायबरेली के अंक भी 75 दर्शाकर उसे 13 ए और मेरठ को 13 बी स्थान दिया गया।
ऐसे चला स्मार्ट सिटी के लिए क्रम
- नगर निगम कार्यकारिणी और बोर्ड ने स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव पास करके, भरे थे संकल्प पत्र।
- 29 जुलाई 2015 को मेरठ की लखनऊ में मुख्य सचिव उप्र सरकार के सामने हुई थी प्रजेंटेशन।
- तीन सितंबर को दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में मेरठ का हुआ था प्रजेंटेशन।
- सितंबर में सीएम से मिले थे संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष नवीन गुप्ता।
- व्यापारी नेता और छात्रों ने सपा जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भेजा था राज्य सरकार को ज्ञापन।
- दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री से मिले थे सांसद, विधायक और महापौर।
- 15 जून 2016 से कंसलटेंट और निगम प्रशासन ने तैयार करना शुरू किया था स्मार्ट सिटी का प्रपोजल।
- 15 दिन तक नगर निगम का पूरा अमला, सामाजिक, व्यापारिक संगठन, भाजपा जनप्रतिनिधि और शहर की जनता ने त्योहार के रूप में की थी वोटिंग।
- शहर की जनता ने रात दिन देखा स्मार्ट सिटी का सपना।
- 28 जून 2016 को राज्य सरकार के सामने रखा गया था प्रपोजल।
- 30 जून 2016 को नगरायुक्त और कंसलटेंट ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में सौंपा था प्रपोजल।
- 20 सितंबर 2016 को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री ने फिर किया मेरठ के साथ धोखा।
- अब जनवरी का दिखाया जा रहा है सब्जबाग।