अमर उजाला की खास रिपोर्ट: नींद नहीं आने की बीमारी, सेहत पर पड़ रही भारी, बरतें ये सावधानी
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नींद नहीं आने की बीमारी सेहत पर भारी पड़ रही है। गहरी नींद लेना किसी भी उम्र के व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। अनिद्रा बीमारी ही नहीं, बल्कि दूसरी बीमारी या बीमारियों का लक्षण भी है। अनिद्रा से उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा और मस्तिष्क आघात जैसी जानलेवा समस्याओं से ग्रस्त भी हो सकते हैं।
जागरुकता फैलाने के लिए वर्ष 2008 से विश्व निद्रा दिवस मनाया जा रहा है। चिकित्सक बताते हैं कि अनिद्रा और कम नींद आने से महिलाएं ज्यादा ग्रस्त रहती हैं। इससे उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। अनिद्रा को इनसोमनिया भी कहते हैं। शराब और सिगरेट के सेवन से यह बीमारी और बढ़ी है। देर रात तक जागने के लिए चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक का इस्तेमाल करना व बढ़ता टेबल वर्क और घटता व्यायाम भी इसकी वजह है।
बढ़ रही दिल की बीमारी
वैसे तो नींद नहीं आने के हर व्यक्ति के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। लेकिन आजकल एक कॉमन कारण सोशल मीडिया है। मोबाइल के जरिए देर रात तक लोग इस पर चिपके रहते हैं। चिकित्सकों का मानना है कि देर रात तक ऑनलाइन रहने वालों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है। अनिद्रा डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां बढ़ा रही है।
यह बरतें एहतियात
- सोने और जागने का समय तय करें
- सोते समय मोबाइल से दूर रहें
- नींद नहीं आ रही तो गुनगुने पानी से पैर धो लें
- दिन में ज्यादा न सोएं, रात में ही पूरी नींद लें
- चाय-कॉफी का ज्यादा इस्तेमाल न करें
- बिना चिकित्सक की सलाह के नींद की गोली न लें
अनिद्रा से एनर्जी घटती है
नींद नहीं आने से शरीर के हार्मोंस पूरी तरह से काम नहीं कर पाते। इससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है। एनर्जी घटती है। याददाश्त पर भी फर्क पड़ता है। करीब 80 फीसदी लोग तो इस तरफ ध्यान ही नहीं देते हैं। सामान्य तौर पर यह कोई दिमागी बीमारी नहीं है, लेकिन अगर दिमाग की कोई बीमारी है तो नींद नहीं आना उसका लक्षण हो सकता है। - डॉ. रवि राणा, मनोचिकित्सक
आठ घंटे की नींद जरूरी
रोजाना सात से आठ घंटे की नींद जरूरी होती है। नींद नहीं आने के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप, दिल से संबंधित रोग और मोटापा जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। - डॉ. तनुराज सिरोही, फिजिशियन
बढ़ रहे ओएसए के मरीज
लाइफ स्टाइल में बदलाव की वजह से ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) के मरीज बढ़ रहे हैं। इसमें थोड़ी-थोड़ी देर में ही मरीज की नींद खुलती है। धीरे-धीरे नींद कम होने लगती है। - डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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