मेरठ: कल शुरू हो जाएगा शहर का पहला गैस संचालित शवदाह गृह, 45 मिनट में हो जाएगा अंतिम संस्कार
मेरठ में कल यानी बुधवार से शहर का पहला गैस संचालित शवदाह गृह शुरू हो जाएगा। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान शहर के सूरजकुंड श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए जगह शेष नहीं बची थी, जिसके बाद गंगा मोटर कमेटी ने गैस संचालित शवदाह गृह का निर्माण शुरू कराया था। यह कल से शुरू हो जाएगा। जहां 45 मिनट में अंतिम संस्कार हो सकेगा।
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मेरठ शहर में पहला गैस संचालित शवदाह गृह बुधवार से शुरू हो जाएगा। सोमवार को कंपनी के लोगों ने मशीन से गैस पाइप लाइन को कनेक्ट किया। मशीन का ट्रायल भी बुधवार को होगा। सड़क निर्माण, शौचालय, रंगाई पुताई से लेकर फिटिंग, चिमनी, इलेक्ट्रिक कनेक्शन अन्य निर्माण संबंधी सभी कार्य पूर्ण हो चुके हैं।
वर्ष 2021 में कोरोना का प्रकोप चरम पर था। शहर में प्रतिदिन मृत्यु दर 100 का आंकड़ा पार कर गई थी। गंगा मोटर कमेटी के देखरेख में चल रहे सूरजकुंड श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए जगह शेष नहीं थी। तब आपात हालात को देखते हुए गंगा मोटर कमेटी ने गैस संचालित शवदाह गृह का निर्माण कार्य आरंभ किया।
अप्रैल 2021 में प्लांट लगाने का एस्टीमेट 21 लाख रुपये कंपनी ने तय किया। प्लांट लगाने के लिए आर्य समाज बुढ़ाना गेट ने सहयोग किया। गंगा मोटर कमेटी के आग्रह पर नगर निगम ने बिल्डिंग की मरम्मत, सड़क निर्माण और अन्य आवश्यक कार्य में सहयोग किया गया। गंगा मोटर कमेटी ने विभिन्न व्यवस्था कराई गईं।
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गंगा मोटर कमेटी के कोषाध्यक्ष अनिल मित्तल ने बताया कि लगभग एक वर्ष में सभी मशीन की फिटिंग से लेकर निर्माण संबंधी सभी कार्य पूर्ण हो गए हैं। सोमवार को मशीन से गैस पाइप लाइन को कनेक्ट कर दिया गया। शव दाह ग्रह को संचालित करने के लिए बिजली और गैस दोनों का प्रयोग किया जाएगा। इलेक्ट्रिक हीटर के साथ गैस दोनों का ही अंतिम संस्कार में प्रयोग किया जाएगा। बुधवार सुबह ट्रायल के बाद शवदाह गृह आरंभ हो जाएगा।
45 मिनट में हो जाएगा अंतिम संस्कार
एक अंतिम संस्कार में अधिकतम 45 मिनट का समय लगेगा। प्लेटफार्म से मशीन के अंदर शव को ले जाने के लिए इलेक्ट्रिक मोटर का प्रयोग किया जाएगा। एक शव के अंतिम संस्कार में लगभग 15 किलो गैस उपयोग में आएगी। ऐसे में संपूर्ण खर्च 1200 से 1500 से बीच होगा।
मशीन को ऑपरेट करने के लिए 20 हजार रुपये में एक युवक की नियुक्ति की जाएगी। कोषाध्यक्ष अनिल मित्तल ने बताया कि दो हजार की रसीद कटवाकर किसी भी शव का अंतिम संस्कार हो जाएगा। अभी तक चार क्विंटल लकड़ी का खर्च 3200 रुपये और अन्य खर्च मिलाकर अंतिम संस्कार पांच से छह हजार के बीच होता था।