{"_id":"6c0e4cebf089d8eb19d8ac3dd985ab68","slug":"meerut-crime-news-hindi-news-125","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनआईए ने नहीं दी हवा, अफसर कयासों में ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनआईए ने नहीं दी हवा, अफसर कयासों में
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Wed, 13 Jan 2016 02:37 AM IST
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की मेरठ में दस्तक की गूंज शासन तक पहुंच गई है। एनआईए के अफसरों ने तो स्थानीय अफसरों को हवा तक नहीं दी जबकि अफसर कयासों तक ही सिमटे हैं।
कभी मानते हैं कि आतंकी का कनेक्शन पठानकोट एयरबेस हमले से हो सकता है तो यह भी अंदेशा लगा रहे हैं कि उसने उड़ीसा में तीन ट्रेनों में आगजनी को अंजाम दिया था। हो सकता है कि वह नक्सली हो।
12 नवंबर को उड़ीसा के पुरी रेलवे स्टेशन पर पुरी-नंदनकानन एक्सप्रेस, पुरी-हावड़ा एक्सप्रेस और पुरी-तिरुपति एक्सप्रेस में आगजनी हुई थी। जिसमें दो आरोपी गिरफ्तार हुए तो आधा दर्जन फरार होना बताए गए। इस आगजनी के एक आरोपी को एनआईए की टीम सोमवार को मेरठ लेकर आई थी।
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पठानकोट एयरबेस पर हुआ आतंकी हमला इस समय सुर्खियों में है। चूंकि इस आतंकी हमले की जांच भी एनआईए के पास है। इसलिए एनआईए जब इस आरोपी को लेकर मेरठ पहुंची तो यही समझा गया कि पठानकोट हमले के तार मेरठ से जुड़े हैं और यह इसी जांच का हिस्सा है।
हालांकि इस शीर्ष जांच एजेंसी के अफसरों का स्थानीय अफसर लाइन ऑफ एक्शन नहीं समझ पाए। ऐसे में सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं कि एनआईए के साथ आए आतंकी का किस वारदात से संबंध है।
पुलिस सूत्रों की माने तो एनआईए ने पठानकोट हमले के आतंकियों का लिंक उड़ीसा ट्रेन अग्निकांड के आरोपियों से जोड़ा है। उड़ीसा में आगजनी की वारदात को अंजाम देने के बाद एक आरोपी मेरठ आकर एक फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने आया था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस वारदात से पहले भी आरोपी यहां गार्ड रह चुका था। जिसके चलते वारदात के बाद उसको तुरंत ही गार्ड की नौकरी मिली थी।
नक्सलियों से जुड़ गए तार
मेरठ के एक अधिकारी ने बताया कि अग्निकांड के तार नक्सलियों से जुड़े थे। मेरठ में जो आतंकी आया था, वह नक्सली था। मेरठ में नक्सली के आने की चर्चा भी अधिकारी ने फैला दी।
अधिकारी ने यहां तक कहा कि मेरठ में नक्सली अपना सेफ ठिकाना बनाने में लगे है। हालांकि एनआईए ने इस संबंध में कुछ भी बोलना मुनासिब नहीं समझा। गौरतलब है कि इससे पहले भी मेरठ में मेडिकल थाना क्षेत्र में नक्सलियों की धरपकड़ हो चुकी है।
आतंकी ने ओढ़ा शातिर चोला
पठानकोट एयरबेस हमले के तार मेरठ से जुड़ने की जानकारी सामने आने और एक आतंकी के हाथ में आने के बावजूद खुफिया तंत्र फेल साबित हो रहा है।
इस आतंकी ने अपने शातिर दिमाग से देश की शीर्ष जांच एजेंसी को भी गच्चा दे रखा है। छह माह तक गार्ड की नौकरी करने और शहर का हर कोना खंगालने वाले इस आतंकी के फैक्ट्री का पता तो क्या रास्ता तक भूलने की बात गले नहीं उतरती।
ऐसे में लोकल इंटेलीजेंस का भी खाली हाथ होना सिस्टम के लापरवाह होने की पुष्टि करता है। आतंकी गतिविधियों का हर बार इनपुट मिलने पर लोकल इंटेलीजेंस से लेकर पुलिस-प्रशासन ने खामोशी की चादर ओढ़ ली है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एसपी के नेतृत्व में दस सदस्यीय टीम सोमवार को शहर में पहुंची थी। टीम के साथ उड़ीसा में एक ट्रेन में आगजनी करने वाला आतंकी भी था। पुलिस के मुताबिक पठानकोट एयरबेस पर हमला करने वाले आतंकियों से उक्त आतंकी का संपर्क था।
ट्रेन में आग लगाने और पठानकोट एयरबेस पर हमला, इन दोनों केसों की जांच एनआईए ही कर रही है। इस आतंकी ने खुलासा किया था कि उसने मेरठ की एक फैक्ट्री में छह महीने तक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की थी। वह रात में फैक्ट्री में रहता था तो दिन में छावनी समेत शहर के अन्य इलाकों में घूमकर युवकों को अपने साथ जोड़कर आतंकी नेटवर्क मजबूत करता था।
इस आतंकी का पाक जासूस मोहम्मद इजाज से संपर्क में होना भी साबित कर देता है कि पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई देश के सैन्य और सिविल एरिया में कहां तक घुसपैठ कर चुकी है।
वेस्ट यूपी है आतंकी गतिविधियों का प्लेटफार्म
दरअसल मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश को आतंकी गतिविधियों का प्लेटफार्म माना जाता रहा है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब मेरठ से कोई आईएसआई एजेंट या स्लीपिंग माड्यूल पकड़ा गया हो। एक दशक से ज्यादा समय से यहां आईएसआई ने अपना नेटवर्क लगातार मजबूत किया है।
यहां तक कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, हापुड़ और बिजनौर जिले के आउटर एरिया में कई बार सेटेलाइट फोन के प्रयोग की जानकारी सामने आ चुकी है। मुंबई सीरियल ब्लास्ट का एक आरोपी भी मेरठ में ठहरकर जा चुका था।
कहां गायब हो गई फैक्ट्री
जिस फैक्ट्री में आतंकी ने रात में नौकरी और दिन में सैन्य इलाके की गोपनीय जानकारी जुटायी, उसकी तलाश करने में एनआईए के अलावा लोकल खुफिया विभाग और पुलिस असफल साबित हो रही है। तमाम प्रयासों के बावजूद भी फैक्ट्री का पता नहीं लगा। पांच घंटे तो खुद एनआईए की टीम ने शहर में कई जगह आतंकी की निशानदेही पर फैक्ट्री तलाशने में मेहनत की, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
कहीं शुगर फैक्ट्री तो नहीं
टीम आतंकी को परतापुर बाईपास स्थित कई फैक्ट्रियों में लेकर पहुंची, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। आतंकी ने बताया कि उस फैक्ट्री का गेट काफी बड़ा था। फैक्ट्री के बारे में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। डीआईजी रेंज का कहना है कि अंदेशा यह भी है कि यह जिले की कोई शुगर मिल भी हो सकती है। हालांकि इससे ज्यादा अफसर इस मामले में कुछ भी बोलना ठीक नहीं बता रहे हैं।
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कभी मानते हैं कि आतंकी का कनेक्शन पठानकोट एयरबेस हमले से हो सकता है तो यह भी अंदेशा लगा रहे हैं कि उसने उड़ीसा में तीन ट्रेनों में आगजनी को अंजाम दिया था। हो सकता है कि वह नक्सली हो।
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12 नवंबर को उड़ीसा के पुरी रेलवे स्टेशन पर पुरी-नंदनकानन एक्सप्रेस, पुरी-हावड़ा एक्सप्रेस और पुरी-तिरुपति एक्सप्रेस में आगजनी हुई थी। जिसमें दो आरोपी गिरफ्तार हुए तो आधा दर्जन फरार होना बताए गए। इस आगजनी के एक आरोपी को एनआईए की टीम सोमवार को मेरठ लेकर आई थी।
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पठानकोट एयरबेस पर हुआ आतंकी हमला इस समय सुर्खियों में है। चूंकि इस आतंकी हमले की जांच भी एनआईए के पास है। इसलिए एनआईए जब इस आरोपी को लेकर मेरठ पहुंची तो यही समझा गया कि पठानकोट हमले के तार मेरठ से जुड़े हैं और यह इसी जांच का हिस्सा है।
हालांकि इस शीर्ष जांच एजेंसी के अफसरों का स्थानीय अफसर लाइन ऑफ एक्शन नहीं समझ पाए। ऐसे में सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं कि एनआईए के साथ आए आतंकी का किस वारदात से संबंध है।
पुलिस सूत्रों की माने तो एनआईए ने पठानकोट हमले के आतंकियों का लिंक उड़ीसा ट्रेन अग्निकांड के आरोपियों से जोड़ा है। उड़ीसा में आगजनी की वारदात को अंजाम देने के बाद एक आरोपी मेरठ आकर एक फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने आया था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस वारदात से पहले भी आरोपी यहां गार्ड रह चुका था। जिसके चलते वारदात के बाद उसको तुरंत ही गार्ड की नौकरी मिली थी।
नक्सलियों से जुड़ गए तार
मेरठ के एक अधिकारी ने बताया कि अग्निकांड के तार नक्सलियों से जुड़े थे। मेरठ में जो आतंकी आया था, वह नक्सली था। मेरठ में नक्सली के आने की चर्चा भी अधिकारी ने फैला दी।
अधिकारी ने यहां तक कहा कि मेरठ में नक्सली अपना सेफ ठिकाना बनाने में लगे है। हालांकि एनआईए ने इस संबंध में कुछ भी बोलना मुनासिब नहीं समझा। गौरतलब है कि इससे पहले भी मेरठ में मेडिकल थाना क्षेत्र में नक्सलियों की धरपकड़ हो चुकी है।
आतंकी ने ओढ़ा शातिर चोला
पठानकोट एयरबेस हमले के तार मेरठ से जुड़ने की जानकारी सामने आने और एक आतंकी के हाथ में आने के बावजूद खुफिया तंत्र फेल साबित हो रहा है।
इस आतंकी ने अपने शातिर दिमाग से देश की शीर्ष जांच एजेंसी को भी गच्चा दे रखा है। छह माह तक गार्ड की नौकरी करने और शहर का हर कोना खंगालने वाले इस आतंकी के फैक्ट्री का पता तो क्या रास्ता तक भूलने की बात गले नहीं उतरती।
ऐसे में लोकल इंटेलीजेंस का भी खाली हाथ होना सिस्टम के लापरवाह होने की पुष्टि करता है। आतंकी गतिविधियों का हर बार इनपुट मिलने पर लोकल इंटेलीजेंस से लेकर पुलिस-प्रशासन ने खामोशी की चादर ओढ़ ली है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एसपी के नेतृत्व में दस सदस्यीय टीम सोमवार को शहर में पहुंची थी। टीम के साथ उड़ीसा में एक ट्रेन में आगजनी करने वाला आतंकी भी था। पुलिस के मुताबिक पठानकोट एयरबेस पर हमला करने वाले आतंकियों से उक्त आतंकी का संपर्क था।
ट्रेन में आग लगाने और पठानकोट एयरबेस पर हमला, इन दोनों केसों की जांच एनआईए ही कर रही है। इस आतंकी ने खुलासा किया था कि उसने मेरठ की एक फैक्ट्री में छह महीने तक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की थी। वह रात में फैक्ट्री में रहता था तो दिन में छावनी समेत शहर के अन्य इलाकों में घूमकर युवकों को अपने साथ जोड़कर आतंकी नेटवर्क मजबूत करता था।
इस आतंकी का पाक जासूस मोहम्मद इजाज से संपर्क में होना भी साबित कर देता है कि पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई देश के सैन्य और सिविल एरिया में कहां तक घुसपैठ कर चुकी है।
वेस्ट यूपी है आतंकी गतिविधियों का प्लेटफार्म
दरअसल मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश को आतंकी गतिविधियों का प्लेटफार्म माना जाता रहा है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब मेरठ से कोई आईएसआई एजेंट या स्लीपिंग माड्यूल पकड़ा गया हो। एक दशक से ज्यादा समय से यहां आईएसआई ने अपना नेटवर्क लगातार मजबूत किया है।
यहां तक कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, हापुड़ और बिजनौर जिले के आउटर एरिया में कई बार सेटेलाइट फोन के प्रयोग की जानकारी सामने आ चुकी है। मुंबई सीरियल ब्लास्ट का एक आरोपी भी मेरठ में ठहरकर जा चुका था।
कहां गायब हो गई फैक्ट्री
जिस फैक्ट्री में आतंकी ने रात में नौकरी और दिन में सैन्य इलाके की गोपनीय जानकारी जुटायी, उसकी तलाश करने में एनआईए के अलावा लोकल खुफिया विभाग और पुलिस असफल साबित हो रही है। तमाम प्रयासों के बावजूद भी फैक्ट्री का पता नहीं लगा। पांच घंटे तो खुद एनआईए की टीम ने शहर में कई जगह आतंकी की निशानदेही पर फैक्ट्री तलाशने में मेहनत की, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
कहीं शुगर फैक्ट्री तो नहीं
टीम आतंकी को परतापुर बाईपास स्थित कई फैक्ट्रियों में लेकर पहुंची, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। आतंकी ने बताया कि उस फैक्ट्री का गेट काफी बड़ा था। फैक्ट्री के बारे में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। डीआईजी रेंज का कहना है कि अंदेशा यह भी है कि यह जिले की कोई शुगर मिल भी हो सकती है। हालांकि इससे ज्यादा अफसर इस मामले में कुछ भी बोलना ठीक नहीं बता रहे हैं।