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मेडिकल में वृद्धा की मौत, डॉक्टरों से हाथापाई

Sun, 12 Jun 2016 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 12 Jun 2016 01:54 AM IST
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medical me vraddh ki maut
मेडिकल कॉलेज में हंगामा - फोटो : अमर उजाला

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 मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर महिला मरीज तीन घंटे तक तड़पती रही, लेकिन डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया। हंगामा करने पर वरिष्ठ डॉक्टरों के कहने पर उसे इमरजेंसी में एडमिट किया गया, लेकिन तुरंत एक्सरे के लिए भेज दिया। एक्सरे में रूम में भी एक घंटे तक मरीज स्ट्रेचर पर पड़ी कराहती रही। इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। परिजनों से डॉक्टरों की हाथापाई हो गई। पुलिस ने आकर दोनों पक्षों को शांत कराया। करीब पांच घंटे चले हंगामे के बाद परिजनों ने थाने में डॉक्टरों के खिलाफ तहरीर दी।
किठौर थाना क्षेत्र के बहरौड़ा निवासी फूजी चौधरी 14 साल से जेल में बंद है और उम्र कैद की सजा काट रहा है। फूजी की पत्नी अफसरी (70) को शनिवार दोपहर करीब एक बजे परिजन सांस की बीमारी के चलते मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराने लाये थे। इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने भर्ती करने से मना करते हुए बाहर निकाल दिया। वृद्धा की हालत बिगड़ने लगी, तो परिजनों ने हंगामा कर दिया। ईएमओ डॉ. अजित चौधरी, डॉ. नितिन यादव मौके पर पहुंचे और परिजनों को शांत कराते हुए करीब चार बजे अफसरी को इमरजेंसी में भर्ती कराया।
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डॉक्टरों ने टीबी की बीमारी बताते हुए एक्सरे के लिए दूसरे वार्ड में भेज दिया। एक्सरे के दौरान अफसरी की हालत बिगड़ गई, तो एक डॉक्टर ने इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगाते ही अफसरी की मौत हो गई। दुखी और गुस्साए परिजनों व ग्रामीणों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। गार्डों ने इमरजेंसी से बाहर निकालने की कोशिश की, तो भीड़ भड़क गई और डॉक्टरों के साथ हाथापाई कर दी। हंगामे की सूचना पर एसओ मेडिकल रविंद्र वशिष्ठ मौके पर पहुंचे।
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परिजनों ने एसओ को बताया कि मेडिकल में इलाज में बेहद लापरवाही बरती गई। पहले तो मरीज को भर्ती नहीं किया गया, जिससे उनकी हालत और बिगड़ गई। समय से भर्ती कर लिया जाता, तो उनका मरीज बच जाता। परिजन डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाकर रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग पर अड़ गए। इस दौरान कई डॉक्टर इमरजेंसी से गायब हो गये। घंटों चले हंगामे के बाद पुलिस ने किसी तरह मामला शांत कराया। परिजनों ने मेडिकल थाने में तहरीर दी और बाद में अफसरी के शव को ले गए।

मंत्री का नाम लिया तो बाहर पटक दूंगा
मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की दबंगई शनिवार शाम फिर देखने को मिली। पहले तो तीन घंटे तक 70 साल की वृद्धा इलाज के लिए इमरजेंसी के बाहर तड़पती रहीं। जब तक डॉक्टरों ने तड़पती हालत में अफसरी को इमरजेंसी में भर्ती किया, तब तक काफी देर हो चुकी थी। मेडिकल कॉलेज के ईएमओ डॉ. अजित चौधरी और सीएमएस तक मामला पहुंचा, तो भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने भर्ती करने के बाद भी इलाज में आनाकानी की, तो परेशान परिजनों ने कहा कि साहब हम मंत्री जी के लोग हैं। इस पर इमरजेंसी में मौजूद एक डॉक्टर भड़क गया। उसने परिजनों से कहा कि यदि यहां मंत्री का नाम लिया, तो मरीज समेत सबको उठाकर बाहर पटक दूंगा। आरोप है कि एक्सरे रूम में भी एक घंटे तक पीड़िता तड़पती हालत में रही।

किस काम की 150 करोड़ की इमरजेंसी
मेडिकल कॉलेज की 150 करोड़ रुपये लागत से बनी इमरजेंसी में इलाज के लिए तड़पने का यह पहला मामला नहीं है। डेढ़ साल पहले परीक्षितगढ़ के एक मरीज को इमरजेंसी से बाहर फेंक दिया गया। विरोध करने पर परिजनों को बंधक बनाकर पीटा था। तीन माह पहले भी एक मरीज को बाहर निकाल दिया। इनके अलावा भी आएदिन ऐसे मामले होते हैं, जो मेडिकल में ही दफन होकर रह जाते हैं, बाहर आ ही नहीं पाते।

वर्जन
जब मुझे मामले का पता चला तो मैंने खुद मरीज को इमरजेंसी में भर्ती कराया। वृद्धा की मौत टीबी की बीमारी के कारण हुई है। इलाज में लापरवाही का आरोप गलत है। उल्टे परिजनों ने डॉक्टरों के साथ अभद्रता की है।

- डॉ. अजित चौधरी, ईएमओ
- परिजनों ने देरी से भर्ती करने और इलाज न करने का आरोप लगाकर हंगामा किया था। जबकि डॉक्टर मरीज की हालत पहले से नाजुक होने को मौत का कारण बता रहे हैं। परिजनों की तहरीर पर जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
- रविंद्र वशिष्ठ, एसओ मेडिकल
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