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सौ करोड़ का शमन शुल्क करेगा एमडीए का भला
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Mon, 06 Jun 2016 02:30 AM IST
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एमडीए लोगो
- फोटो : अमर उजाला
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आर्थिक तंगी से जूझ रहा एमडीए यदि गंभीरता से काम करे तो सौ करोड़ रुपये की शमन शुल्क वसूली से ही उसका भला हो जाएगा। शहर में दो हजार से ज्यादा मामले ध्वस्तीकरण के केवल फाइलों मे हैं तो इतने ही केस सीलिंग और शमन वसूली के हैं। अब नए सिरे से इस बाबत मशक्कत शुरू की गई है।
मेरठ विकास प्राधिकरण की हालत खस्ता है। किसानों के बार-बार धरने प्रदर्शन तथा मुआवजे की मांग पर अफसरों का यही तर्क है कि एमडीए के पास पैसा नहीं है। कर्मचारियों के वेतन के लिए भी लाले पड़ रहे हैं। दरअसल, सारा खेल आय का है। नीलामी से तो कमाई की जा रही है पर बेहतर आय का स्रोत शमन शुल्क की वसूली होती है। जिसमें अधिकारी फिसड्डी साबित हो रहे हैं। जितनी आय एक माह में होनी चाहिए, वह पूरे साल में हो रही है। एक करोड़ रुपये माहवार बमुश्किल शमन शुल्क से इकट्ठा हो रहे हैं।
यह है शमन शुल्क
शमन शुल्क वह राशि है, जो मानचित्र के विपरीत भवन निर्माण पर लागू होती है। मानचित्र के विपरीत निर्माण पर एमडीए पहले नोटिस, फिर सीलिंग की कार्रवाई करता है। उसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है। ध्वस्तीकरण से बचाव के लिए निर्माणकर्ता एमडीए में यदि यह दरख्वास्त करता है कि निर्माण को ध्वस्त न किया जाए। इसे कंपाउंड किया जाए तो एमडीए अधिकारी यह देखते हैं कि कि अवैध निर्माण को क्या नियमानुसार शुल्क लगाकर वैध किया जा सकता है। यदि हां तो शमन शुल्क लगाकर वसूली की जाती है। यदि नहीं तो फिर ध्वस्तीकरण होता है।
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पांच हजार से ज्यादा मामले पेंडिंग
एमडीए के चारों जोन में दो हजार से ज्यादा मामले ऐसे पेंडिंग हैं, जिनमें ध्वस्तीकरण होना है। इनमें निर्माणकर्ता ने या तो कंपाउंड की दरख्वास्त ही नहीं की या पैसा जमा नहीं किया। या फिर नियमानुसार उनका कंपाउंड नहीं किया सकता है। सीलिंग के अलावा इतने ही मामले ऐसे हैं कि कागज पर ही कार्रवाई हुई, धरातल पर कुछ नहीं हुआ। शमन की बजाय अधिकारी खुद ही सेटिंग में लगे रहे।
चाहेंगे तो होगी वसूली
आरजी पीजी कालेज में पौने पांच करोड़ रुपये की कंपाउंडिंग होनी है। यह एक उदाहरण मात्र है। शहर भर में ऐसे कई केस हैं। इससे कम और ज्यादा सभी तरह की कंपाउंडिंग हैं। इन सभी पेंडेंसी को जोड़ा जाए तो लगभग सौ करोड़ केवल शमन शुल्क से ही प्राप्त हो सकते हैं। स्थिति खराब होने पर अब इन फाइलों से धूल हटाई जा रही है। वीसी ने ऐसी फाइलों को तलब कर कहा है कि शमन वसूली करो, ताकि आय हो।
कोट
शमन शुल्क बढ़ाने के लिए सभी जोन प्रभारियों को निर्देश दिए हैं। कहा है कि कागज में नहीं, मौके पर कार्रवाई होगी। इसका नतीजा भी आ रहा है। जल्द ही काफी शमन शुल्क प्राप्त हो जाएगा। -राजेश कुमार वीसी एमडीए
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मेरठ विकास प्राधिकरण की हालत खस्ता है। किसानों के बार-बार धरने प्रदर्शन तथा मुआवजे की मांग पर अफसरों का यही तर्क है कि एमडीए के पास पैसा नहीं है। कर्मचारियों के वेतन के लिए भी लाले पड़ रहे हैं। दरअसल, सारा खेल आय का है। नीलामी से तो कमाई की जा रही है पर बेहतर आय का स्रोत शमन शुल्क की वसूली होती है। जिसमें अधिकारी फिसड्डी साबित हो रहे हैं। जितनी आय एक माह में होनी चाहिए, वह पूरे साल में हो रही है। एक करोड़ रुपये माहवार बमुश्किल शमन शुल्क से इकट्ठा हो रहे हैं।
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यह है शमन शुल्क
शमन शुल्क वह राशि है, जो मानचित्र के विपरीत भवन निर्माण पर लागू होती है। मानचित्र के विपरीत निर्माण पर एमडीए पहले नोटिस, फिर सीलिंग की कार्रवाई करता है। उसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है। ध्वस्तीकरण से बचाव के लिए निर्माणकर्ता एमडीए में यदि यह दरख्वास्त करता है कि निर्माण को ध्वस्त न किया जाए। इसे कंपाउंड किया जाए तो एमडीए अधिकारी यह देखते हैं कि कि अवैध निर्माण को क्या नियमानुसार शुल्क लगाकर वैध किया जा सकता है। यदि हां तो शमन शुल्क लगाकर वसूली की जाती है। यदि नहीं तो फिर ध्वस्तीकरण होता है।
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पांच हजार से ज्यादा मामले पेंडिंग
एमडीए के चारों जोन में दो हजार से ज्यादा मामले ऐसे पेंडिंग हैं, जिनमें ध्वस्तीकरण होना है। इनमें निर्माणकर्ता ने या तो कंपाउंड की दरख्वास्त ही नहीं की या पैसा जमा नहीं किया। या फिर नियमानुसार उनका कंपाउंड नहीं किया सकता है। सीलिंग के अलावा इतने ही मामले ऐसे हैं कि कागज पर ही कार्रवाई हुई, धरातल पर कुछ नहीं हुआ। शमन की बजाय अधिकारी खुद ही सेटिंग में लगे रहे।
चाहेंगे तो होगी वसूली
आरजी पीजी कालेज में पौने पांच करोड़ रुपये की कंपाउंडिंग होनी है। यह एक उदाहरण मात्र है। शहर भर में ऐसे कई केस हैं। इससे कम और ज्यादा सभी तरह की कंपाउंडिंग हैं। इन सभी पेंडेंसी को जोड़ा जाए तो लगभग सौ करोड़ केवल शमन शुल्क से ही प्राप्त हो सकते हैं। स्थिति खराब होने पर अब इन फाइलों से धूल हटाई जा रही है। वीसी ने ऐसी फाइलों को तलब कर कहा है कि शमन वसूली करो, ताकि आय हो।
कोट
शमन शुल्क बढ़ाने के लिए सभी जोन प्रभारियों को निर्देश दिए हैं। कहा है कि कागज में नहीं, मौके पर कार्रवाई होगी। इसका नतीजा भी आ रहा है। जल्द ही काफी शमन शुल्क प्राप्त हो जाएगा। -राजेश कुमार वीसी एमडीए