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एमसीटीएसएल से फिसली बीस करोड़ की जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 May 2017 02:58 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एनजीटी ने रोडवेज बस अड्डों को शहर से बाहर नहीं होने पर कड़ा रुख अपनाया है। इससे जिलास्तर के कई विभाग हरकत में आ गए हैं। ऐसे में एमडीए (मेरठ विकास प्राधिक रण) ने एमसीटीएसएल (मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लि.) को बस सेवा संचालन के लिए दी गई जमीन वापस लेकर रोडवेज को बस अड्डा बनाने के लिए देने की तैयारी कर ली है। दरअसल, एमसीटीएसएल तय समय सीमा में इस जमीन का इस्तेमाल ही नहीं कर सका। सोमवार को लोहियानगर पहुंचकर अधिकारियों ने इस जमीन का भौतिक निरीक्षण किया। इस जमीन की कीमत बीस करोड़ बताई जा रही है।
केंद्र सरकार ने जेएनएनयूआरएम योजना के तहत लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मुहैया कराने के लिए 2010-11 में मेरठ को 120 बसें उपलब्ध कराईं थी। शासन स्तर से बस संचालन के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेेड कंपनी (एमसीटीएसएल) बनाई थी। बस अड्डे के लिए कंपनी द्वारा जमीन मांगने पर एमडीए ने लोहिया नगर में 2 हेक्टेयर (5 एकड़) जमीन लीज पर उपलब्ध कराई थी, लेकिन कंपनी पांच साल में भी इस जमीन पर अड्डे का निर्माण नहीं कर सकी है। जमीन की वर्तमान कीमत लगभग बीस करोड़ रुपये बताई जा रही है।
एनजीटी ने दिखाई सख्ताई
आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने रोडवेज बस अड्डों के कारण शहर में वायु प्रदूषण बढ़ने और बसों से लगने वाले जाम को मुद्दा बनाकर एनजीटी में केस दायर कर रखा है। एनजीटी ने रोडवेज, एमडीए, प्रदूषण विभाग, वन और पर्यावरण विभाग से इस मामले में जवाब तलब किया है। इससे रोडवेज और एमडीए पर मास्टर प्लान के मुताबिक बस अड्डों को शहर से बाहर करने का दबाव बढ़ गया है। एनजीटी की कार्रवाई से बचने के लिए एमडीए ने एमसीटीएसएल को दी गई यह जमीन रोडवेज को देने की तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए सोमवार को एमडीए के अधिशासी अभियंता एके त्यागी ने रोडवेज आरएम एसके बनर्जी, सेवा प्रबंधक एसएल शर्मा, अवर अभियंता आरपी सिंह को जमीन का निरीक्षण कराया।
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एमसीटीएसएल ने नहीं पूरी की शर्त
एमसीटीएसएल को पांच साल के अंदर बस अड्डा निर्माण करने की शर्त पर लोहियानगर में जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन कंपनी इस जमीन पर अड्डा नहीं बना सकी है। ऐसे में अब एमडीए बोर्ड और शासन की मंजूरी के बाद यह जमीन रोडवेज को बस अड्डे के लिए दे सकता है। इसके चलते ही जमीन रोडवेज अधिकारियों को दिखाई गई। - एके त्यागी, अधिशासी अभियंता एमडीए
शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
रोडवेज बस अड्डों को शहर से बाहर करने के लिए जमीन की आवश्यकता है। एमडीए ने एमसीटीएसएल को लोहिया नगर में आवंटित की गई जमीन दिखाई है। वे इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज देंगे। बस अड्डों पर निर्णय लखनऊ स्तर से होना है। - एसके बनर्जी, आरएम मेरठ रोडवेज रीजन
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केंद्र सरकार ने जेएनएनयूआरएम योजना के तहत लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मुहैया कराने के लिए 2010-11 में मेरठ को 120 बसें उपलब्ध कराईं थी। शासन स्तर से बस संचालन के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेेड कंपनी (एमसीटीएसएल) बनाई थी। बस अड्डे के लिए कंपनी द्वारा जमीन मांगने पर एमडीए ने लोहिया नगर में 2 हेक्टेयर (5 एकड़) जमीन लीज पर उपलब्ध कराई थी, लेकिन कंपनी पांच साल में भी इस जमीन पर अड्डे का निर्माण नहीं कर सकी है। जमीन की वर्तमान कीमत लगभग बीस करोड़ रुपये बताई जा रही है।
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एनजीटी ने दिखाई सख्ताई
आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने रोडवेज बस अड्डों के कारण शहर में वायु प्रदूषण बढ़ने और बसों से लगने वाले जाम को मुद्दा बनाकर एनजीटी में केस दायर कर रखा है। एनजीटी ने रोडवेज, एमडीए, प्रदूषण विभाग, वन और पर्यावरण विभाग से इस मामले में जवाब तलब किया है। इससे रोडवेज और एमडीए पर मास्टर प्लान के मुताबिक बस अड्डों को शहर से बाहर करने का दबाव बढ़ गया है। एनजीटी की कार्रवाई से बचने के लिए एमडीए ने एमसीटीएसएल को दी गई यह जमीन रोडवेज को देने की तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए सोमवार को एमडीए के अधिशासी अभियंता एके त्यागी ने रोडवेज आरएम एसके बनर्जी, सेवा प्रबंधक एसएल शर्मा, अवर अभियंता आरपी सिंह को जमीन का निरीक्षण कराया।
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एमसीटीएसएल ने नहीं पूरी की शर्त
एमसीटीएसएल को पांच साल के अंदर बस अड्डा निर्माण करने की शर्त पर लोहियानगर में जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन कंपनी इस जमीन पर अड्डा नहीं बना सकी है। ऐसे में अब एमडीए बोर्ड और शासन की मंजूरी के बाद यह जमीन रोडवेज को बस अड्डे के लिए दे सकता है। इसके चलते ही जमीन रोडवेज अधिकारियों को दिखाई गई। - एके त्यागी, अधिशासी अभियंता एमडीए
शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
रोडवेज बस अड्डों को शहर से बाहर करने के लिए जमीन की आवश्यकता है। एमडीए ने एमसीटीएसएल को लोहिया नगर में आवंटित की गई जमीन दिखाई है। वे इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज देंगे। बस अड्डों पर निर्णय लखनऊ स्तर से होना है। - एसके बनर्जी, आरएम मेरठ रोडवेज रीजन