फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   kisaano ne md office ghera

किसानों ने एमडी ऑफिस घेरा, अधिकारी बनाए बंधक

Thu, 28 Dec 2017 11:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Thu, 28 Dec 2017 11:25 AM IST
विज्ञापन
kisaano ne md office ghera
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

पहले समझौता और बाद में उसका एमडीए बोर्ड में अनुमोदन होने के बावजूद अभी तक प्रतिकर न मिलने से गुस्साए किसानों ने बुधवार को एमडीए कार्यालय पर हल्ला बोल दिया। ‘डेरा डालो घेरा डालो आंदोलन ’ का बिगुल फूंकते हुए ट्रैक्टर ट्रालियाें में किसान एमडीए पहुंचे। इसके बाद सभी गेटों पर महिला किसानों ने कब्जा कर अधिकारियों को कार्यालयों में ही बंधक बना दिया। शाम को अधिकारियों को बिना गाड़ी के पैदल ही ऑफिस से निकलना पड़ा। किसान रात को भी एमडीए में ही डटे थे। किसानों ने कहा कि जब तक किसानों को चेक नहीं दिए जाएंगे या शासन से आई अनुमति को नहीं दिखाई जाएगी, आंदोलन जारी रहेगा।

विज्ञापन


यह है विवाद
प्रतिकर की मांग को लेकर लोहियानगर, गंगानगर तथा वेदव्यासपुरी योजना के किसानों ने आंदोलन किया। किसानों का कहना था कि शताब्दीनगर की तर्ज पर उन्हें भी मुआवजा दिया जाए। लगातार आंदोलन के बाद इस पर सहमति बनी। 11 नवंबर 2015 को एमडीए बोर्ड बैठक में परिचालन प्रस्ताव के माध्यम से यह प्रस्ताव मंजूर हो चुका है कि किसानाें को रकम के बदले भूखंड दिए जाएंगे। बाद में बुलंदशहर के प्रकरण में हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए एमडीए अधिकारियों ने इस वादे पर अमल नहीं किया। किसानों ने दबाव बनाया तो एमडीए ने शासन की अनुमति को यह प्रस्ताव भेज दिया जिसका अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।
विज्ञापन


टूट गया सब्र का बांध
इस समझौते का पालन न होने और शासन से भी अभी तक जवाब न आने पर किसानों के सब्र का बांध टूट गया। संयुक्त संघर्ष समिति के किसान पहले ही आंदोलन की चेतावनी दे चुके थे। बुधवार सुबह सवा दस बजे किसान ट्रैक्टर ट्रालियों में सवार होकर एमडीए परिसर पहुंचे। उन्हें देखकर गेट पर तैनात होमगार्ड भी पीछे हट गए और गेट खोल दिया। इस पर किसानों ने ट्रैक्टर ट्रालियां लगाकर अधिकारियों की गाड़ियां निकालने का मार्ग बंद कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


महिलाआें ने कर दिया अधिकारियों को कैद
इस धरने में महिला किसानों ने अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने मुख्य गेट पर ही धरना शुरू कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि इस गेट से किसी अधिकारी को बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा। गाड़ी तो पहले ही नहीं निकल रही थी। ऐसे में अधिकारी भीतर ही कैद होकर रह गए। वीसी साहब सिंह अपने दफ्तर में बैठे रहे तो इसे अलावा अन्य सभी अधिकारी भी अपने दफ्तरों में मौजूद रहे।

पैदल ही निकले अधिकारी
शाम तक किसानों ने अधिकारियाें की गाड़ियों को निकलने नहीं दिया। ऐसे में वीसी समेत अन्य अधिकारी भी चुपचाप  पैदल ही निकल गए। उधर किसानों ने रात को भी धरना जारी रखा है। रात को महिला किसान भी धरने पर मौजूद रहीं।
हथौड़े, ताले सब थे किसानों के पास
किसान अपने साथ ताले, हथौड़े, छैनी सब लेकर आए थे। किसानों ने साफ कह दिया कि यदि गेट पर ताले लगाए गए तो तोड़ दिए जाएंगे।

वहीं खाया खाना
किसानों ने आती ही कढ़ाही चढ़ा दी। भोजन बना और वहीं खाया गया। किसानों ने साफ कहा कि वे पूरी तैयारी के साथ आए हैं। लंबा आंदोलन चलाना पड़ा तो चलाया जाएगा।


नहीं माने किसान
किसानों को समझाने केलिए सीओ सिविल लाइन चक्रपाणि त्रिपाठी मय फोर्स पहुंचे। इस बाबत उन्होंने समिति के महामंत्री हरविंदर सिंह आदि से बात की। किसानों ने साफ कह दिया कि आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसान शांति से धरना दे रहे हैं पर यदि जबरदस्ती की तो ठीक नहीं होगा। इस पर पुलिस बैरंग लौट गई। धरने में हरविंदर सिंह, सतपाल सिंह, अज्जू, किरनपाल, राजपाल सिंह, सतीश, मंगत सिंह, जय सिंह, सत्यपाल, जागेश्वरी देवी, सरस्वती, सीमा, सतीश आदि किसान मौजूद रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed